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कचरे से बनेगी तीन मेगावाट बिजली, दिसंबर में काम शुरू
amar ujala
Updated Wed, 22 Nov 2017 01:26 AM IST
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administration, jhansi news
- फोटो : demo
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महानगर में सफाई करने केे बाद निकलने वाले कचरे से अब बिजली बनाई जाएगी। इसका प्लांट पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के आधार पर स्थापित होगा और इसके जरिए तीन मेगावाट बिजली तैयार होगी। बिजली तीन हजार परिवारों के काम आएगी। लखनऊ में इसका टेंडर निकाला गया। अगले महीने दिसंबर में काम शुरू होने की उम्मीद है।
महानगर में प्रतिदिन तीन सौ टन कचरा निकलता है। कचरा में से प्लास्टिक अलग कर उसे प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में भेज दिया जाता है। यहां इस कचरे को सड़क बनाने में काम आने वाले डामर के साथ उपयोगी बनाया जाता है, जिससे सड़क डामर की तुलना में मजबूत बनती है। लेकिन, इसके बाद भी बहुत सा कचरा बेकार हो जाता है। कचरा की खंतियां भर गई हैं, जिससे इसे फेंकने में दिक्कत आ रही है। इसलिए नगर निगम ने ‘वेस्ट टू इनर्जी’ योजना के अंतर्गत कचरे से बिजली बनाने का प्रपोजल शासन को भेजा था, जिसे स्वीकृति मिल गई है। बिजली का यह प्लांट बिजौली में लगाया जाएगा, इसके लिए 25.5 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। जल निगम की कार्यदायी संस्था कंस्ट्रक्शन एडं डिजाइन सर्विसेज को प्लांट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
रेल प्रशासन से सहयोग लिया जाएगा
बिजली बनाने के लिए प्लांट में कचरे की कमी न रहे, इसलिए रेल प्रशासन व आसपास की नगर पालिका व नगर पंचायत प्रशासन से सहयोग लिया जाएगा। उनका कचरा भी इसी प्लांट में उपयोग किया जाएगा।
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शासन से कोई भुगतान नहीं होगा
बिजली का प्लांट तैयार करने में कंपनी कितना पैसा खर्च करेगी, इसमेें शासन अथवा नगर निगम का कोई हस्तक्षेप नहीं रहेगा। बल्कि, कंपनी खर्च करेगी। इसका 25 साल का अनुबंध रहेगा। कंपनी अपने हिसाब से बिजली बेचेगी।
रोजगार मिलेगा
बिजली का प्लांट बनाने में कम से कम डेढ़ साल का समय लगेगा। प्लांट निर्माण के दौरान सौ से डेढ़ सौ व्यक्तियों को रोजगार मिलेगा।
बाराबंकी में चल रहा प्लांट
पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर वेस्ट टू इनर्जी योजना के अंतर्गत बाराबंकी में 16 मेगावाट का प्लांट शुरू हो गया है।
तैयारी पूरी हो गई है
पावर प्लांट पूरी तरह से पीपीपी मॉडल पर बनाया जाएगा। टेंडर के बाद तकनीकी बिड भी फाइनल हो गई है। इस पर जल्द निर्णय होगा।
- आरएन गोयल, महाप्रबंधक
कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज
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महानगर में प्रतिदिन तीन सौ टन कचरा निकलता है। कचरा में से प्लास्टिक अलग कर उसे प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में भेज दिया जाता है। यहां इस कचरे को सड़क बनाने में काम आने वाले डामर के साथ उपयोगी बनाया जाता है, जिससे सड़क डामर की तुलना में मजबूत बनती है। लेकिन, इसके बाद भी बहुत सा कचरा बेकार हो जाता है। कचरा की खंतियां भर गई हैं, जिससे इसे फेंकने में दिक्कत आ रही है। इसलिए नगर निगम ने ‘वेस्ट टू इनर्जी’ योजना के अंतर्गत कचरे से बिजली बनाने का प्रपोजल शासन को भेजा था, जिसे स्वीकृति मिल गई है। बिजली का यह प्लांट बिजौली में लगाया जाएगा, इसके लिए 25.5 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। जल निगम की कार्यदायी संस्था कंस्ट्रक्शन एडं डिजाइन सर्विसेज को प्लांट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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रेल प्रशासन से सहयोग लिया जाएगा
बिजली बनाने के लिए प्लांट में कचरे की कमी न रहे, इसलिए रेल प्रशासन व आसपास की नगर पालिका व नगर पंचायत प्रशासन से सहयोग लिया जाएगा। उनका कचरा भी इसी प्लांट में उपयोग किया जाएगा।
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शासन से कोई भुगतान नहीं होगा
बिजली का प्लांट तैयार करने में कंपनी कितना पैसा खर्च करेगी, इसमेें शासन अथवा नगर निगम का कोई हस्तक्षेप नहीं रहेगा। बल्कि, कंपनी खर्च करेगी। इसका 25 साल का अनुबंध रहेगा। कंपनी अपने हिसाब से बिजली बेचेगी।
रोजगार मिलेगा
बिजली का प्लांट बनाने में कम से कम डेढ़ साल का समय लगेगा। प्लांट निर्माण के दौरान सौ से डेढ़ सौ व्यक्तियों को रोजगार मिलेगा।
बाराबंकी में चल रहा प्लांट
पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर वेस्ट टू इनर्जी योजना के अंतर्गत बाराबंकी में 16 मेगावाट का प्लांट शुरू हो गया है।
तैयारी पूरी हो गई है
पावर प्लांट पूरी तरह से पीपीपी मॉडल पर बनाया जाएगा। टेंडर के बाद तकनीकी बिड भी फाइनल हो गई है। इस पर जल्द निर्णय होगा।
- आरएन गोयल, महाप्रबंधक
कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज