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बिजली विभाग एउवांस लेकर सुधारेगा माली हालत
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बिजली विभाग एडवांस लेकर सुधारेगा माली हालत
झांसी। बिजली विभाग की तंगहाली सरकारी विभागों के बिजली बिल के एडवांस पैसे से सुधरेगी। इसको लेकर विभागों के बीच सहमति बन गई है। जिस विभाग के खाते में एडवांस पैसा होगा, वह बिजली विभाग में जमा कर देगा। बाद में बिजली के बिल में वह पैसा समायोजित हो जाएगा।
विकास भवन में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में बताया गया कि बिजली विभाग के ऊपर एक लाख करोड़ रुपये की बकाएदारी है। इस कारण से नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन, बजाज ग्रुप और रिलायंस ग्रुप बिजली देने में आनाकानी कर रहे हैं। इस कारण चौबीस घंटे बिजली देने की उम्मीदों पर पानी फिर रहा है। यदि सरकारी विभाग बिजली की देनदारी को एडवांस में देंगे तो काफी हद तक समस्या का समाधान हो जाएगा।
सरकारी विभागों के बिजली के बिल का पैसा ट्रेजरी के कोष में कोषवानी पोर्टल पर शो करता है। उस पैसे का कोई उपयोग नहीं होता है, केवल बिजली का बिल जमा किया जाता है। इसलिए यदि यह पैसा बिजली विभाग को एडवांस में दे दिया जाए तो विभाग को काफी हद तक राहत मिल जाएगी और दूसरी देनदारियां चुकाने में आसानी होगी। मुख्य विकास अधिकारी शैलेष कुमार ने विभागों से सहमति मांगी तो सभी ने हामी भर दी।
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मेडिकल कॉलेज के खाते में पोर्टल पर बिजली मद में करीब पांच करोड़ रुपया है, जबकि विभाग का बिजली का बिल 70 लाख रुपये आता है। इसी तरह जिला अस्पताल का एक करोड़ रुपये पोर्टल पर है, लोक निर्माण विभाग का तीस लाख रुपये पोर्टल पर है, जबकि बिल 15 लाख रुपये आता है। तकनीकी शिक्षा समेत अन्य विभागों का पैसा भी बिजली के बिल के मद में पोर्टल पर शो कर रहा है। विभागों के बीच सहमति बन गई कि बिजली के बिल का पैसा जिन विभागों के पास शासन से एडवांस आ जाता है, वह पैसे को बिजली विभाग में ट्रांसफर कर देंगे, ताकि विभाग इसका सदुपयोग कर सके।
बैठक में अधीक्षण अभियंता जेपीएन सिंह, अधीक्षण अभियंता राजकुमार, अधिशासी अभियंता डी यादवेंदु, अनुभव कुमार, अधिशासी अभियंता ग्रामीण शैलेंद्र कटियार, जिला पंचायत राज अधिकारी जगदीश राम गौतम समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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झांसी। बिजली विभाग की तंगहाली सरकारी विभागों के बिजली बिल के एडवांस पैसे से सुधरेगी। इसको लेकर विभागों के बीच सहमति बन गई है। जिस विभाग के खाते में एडवांस पैसा होगा, वह बिजली विभाग में जमा कर देगा। बाद में बिजली के बिल में वह पैसा समायोजित हो जाएगा।
विकास भवन में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में बताया गया कि बिजली विभाग के ऊपर एक लाख करोड़ रुपये की बकाएदारी है। इस कारण से नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन, बजाज ग्रुप और रिलायंस ग्रुप बिजली देने में आनाकानी कर रहे हैं। इस कारण चौबीस घंटे बिजली देने की उम्मीदों पर पानी फिर रहा है। यदि सरकारी विभाग बिजली की देनदारी को एडवांस में देंगे तो काफी हद तक समस्या का समाधान हो जाएगा।
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सरकारी विभागों के बिजली के बिल का पैसा ट्रेजरी के कोष में कोषवानी पोर्टल पर शो करता है। उस पैसे का कोई उपयोग नहीं होता है, केवल बिजली का बिल जमा किया जाता है। इसलिए यदि यह पैसा बिजली विभाग को एडवांस में दे दिया जाए तो विभाग को काफी हद तक राहत मिल जाएगी और दूसरी देनदारियां चुकाने में आसानी होगी। मुख्य विकास अधिकारी शैलेष कुमार ने विभागों से सहमति मांगी तो सभी ने हामी भर दी।
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मेडिकल कॉलेज के खाते में पोर्टल पर बिजली मद में करीब पांच करोड़ रुपया है, जबकि विभाग का बिजली का बिल 70 लाख रुपये आता है। इसी तरह जिला अस्पताल का एक करोड़ रुपये पोर्टल पर है, लोक निर्माण विभाग का तीस लाख रुपये पोर्टल पर है, जबकि बिल 15 लाख रुपये आता है। तकनीकी शिक्षा समेत अन्य विभागों का पैसा भी बिजली के बिल के मद में पोर्टल पर शो कर रहा है। विभागों के बीच सहमति बन गई कि बिजली के बिल का पैसा जिन विभागों के पास शासन से एडवांस आ जाता है, वह पैसे को बिजली विभाग में ट्रांसफर कर देंगे, ताकि विभाग इसका सदुपयोग कर सके।
बैठक में अधीक्षण अभियंता जेपीएन सिंह, अधीक्षण अभियंता राजकुमार, अधिशासी अभियंता डी यादवेंदु, अनुभव कुमार, अधिशासी अभियंता ग्रामीण शैलेंद्र कटियार, जिला पंचायत राज अधिकारी जगदीश राम गौतम समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।