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जिंदगी! तेरे अंजाम पे रोना आया: अधूरी रह गई घर जाने की आस...स्टेशन पर टूटी बुजुर्ग की सांस, अपनों ने छोड़ा साथ

Mon, 17 Jun 2024 09:57 AM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Published by: आकाश दुबे Updated Mon, 17 Jun 2024 09:57 AM IST
सार

मौत की सूचना पर बुजुर्ग के परिजनों ने कहा कि हम दूर के रिश्तेदार हैं और मृतक की शादी नहीं हुई थी। ऐसे में हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती। इसके बाद परिजनों ने मोबाइल फोन बंद कर दिया।

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Elderly man returning home after 25 years dies at railway station
स्टेशन पर बुजुर्ग की मौत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूरी जिंदगी काम और अपनों की हसरतों को पूरा करने में गुजर गई। जीवन के आखिरी दिन अपनों के बीच बिताने की चाहत लिए एक वृद्ध 25 साल बाद छत्तीसगढ़ से अपने गांव झांसी के लालनपुरा के लिए निकला। लेकिन झांसी रेलवे स्टेशन पर ही वृद्ध की सांस टूट गई। प्लेटफार्म पर शव मिलने के बाद जब जीआरपी ने परिजनों को फोन किया तो उन्होंने भी साथ छोड़ दिया। परिजनों ने वृद्ध से सारे-रिश्ते नाते तोड़कर शव लेने से इनकार कर दिया।

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रविवार दोपहर 3:30 बजे कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4/5 पर एक बुजुर्ग दिल्ली एंड पर अचेत पड़ा है। सूचना मिलते ही डिप्टी एसएस वाणिज्य एसके नरवरिया, रेलवे के चिकित्सक, जीआरपी उप निरीक्षक शिव स्वरूप और आरपीएफ के जवान मौके पर पहुंचे। डॉक्टर ने बुजुर्ग का परीक्षण किया तो पता चला कि उसकी मौत हो गई है। इसके बाद जेब से मिले जनरल टिकट और आधार कार्ड से जानकारी मिली कि वह मोंठ थाना क्षेत्र के लालनपुरा का 63 वर्षीय राकेश श्रीवास्तव पुत्र प्रेम नारायण है। टिकट देखकर पता चला कि वृद्ध छत्तीसगढ़ के चांपा से झांसी के लिए यात्रा कर रहा था। 

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जीआरपी ने वृद्ध के परिजनों को सूचना देते हुए शव ले जाने को कहा। लेकिन परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया। परिजनों ने कहा कि हम दूर के रिश्तेदार हैं और मृतक राकेश श्रीवास्तव की शादी नहीं हुई थी। ऐसे में हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती। इसके बाद परिजनों ने मोबाइल फोन बंद कर दिया। उसके बचपन के दोस्त और मोंठ के ही मुरारी ने बताया राकेश 25 साल पहले छत्तीसगढ़ के चांपा में जाकर बस गया था। जीआरपी ने अब मृतक का शव मेडिकल कॉलेज को सौंपा है। उप निरीक्षक शिव स्वरूप ने बताया कि मृतक के परिजनों से शव ले जाने की अपील कर चुके हैं, लेकिन वह बात करने को तैयार नहीं हैं।

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सात महीने पहले हुई ही बात
राकेश के बचपन के दोस्त मुरारी ने बताया कि राकेश की उससे सात माह पहले फोन पर बात हुई थी। उसने बताया था कि वह जीवन के बचे हुए दिन अब घर पर और अपनों के बीच बिताना चाहता है।

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