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एक साल में आया सिर्फ एक आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 27 Mar 2016 12:45 AM IST
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- फोटो : demopic
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झांसी। पीपीपी मॉडल (प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप) पर आरक्षण कार्यालय खोलने की योजना के अच्छे परिणाम अब तक नहीं आ सके हैं। शर्तें कठिन होने के कारण सिर्फ एक आवेदक ने ही आवेदन किया है। ऐसे हालातों में रेलवे ने इस योजना पर विचार बंद कर दिया है।
पिछले साल उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन ने जेटीबीएस (अनारक्षित टिकट सुविधा केंद्र) की तरह वाईटीएसके (यात्री टिकट सुविधा केंद्र) शुरू करने की योजना बनाई थी। यह केंद्र पीपीपी मॉडल पर खोले जाने थे। इन काउंटरों पर लोग रेलवे के आरक्षित टिकट खरीद सकते थे। उस समय मंडल के सभी प्रमुख स्टेशनों के लिए आवेदन मांगे गए थे, मगर शर्तें बेहद जटिल होने के कारण महोबा से एक व्यक्ति ने ही आवेदन किया था। इस आवेदन पर भी अभी तक विचार नहीं हो सका है। अच्छे परिणाम न आने के कारण रेल प्रशासन ने इस महत्वाकांक्षी योजना पर हथियार डाल दिए हैं। इस संदर्भ में जनसंपर्क अधिकारी गिरीश कंचन ने बताया कि पहली बार टेंडर में अच्छा रिस्पांस नहीं मिला है।
गौरतलब है कि इस व्यवस्था में टेंडर लेने वाले को आधारभूत ढांचा व कर्मचारी खुद लगाने हैं। सिर्फ तकनीकी सुविधाएं रेलवे मुहैया कराएगा। इस केंद्र पर लोग आरक्षित व अनारक्षित दोनों तरह के टिकट ले सकते हैं। लाइसेंस लेने वाले से पांच लाख की धरोहर राशि ली जाएगी, जो वापस नहीं होगी। जेटीबीएस संचालित कर रहे संचालकों को इस योजना में प्राथमिकता दी जा रही थी। भारी भरकम खर्चा व कमीशन के तौर पर न के बराबर राशि मिलने के कारण योजना लेने में कोई रुचि नहीं दिखा रहा है।
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पिछले साल उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन ने जेटीबीएस (अनारक्षित टिकट सुविधा केंद्र) की तरह वाईटीएसके (यात्री टिकट सुविधा केंद्र) शुरू करने की योजना बनाई थी। यह केंद्र पीपीपी मॉडल पर खोले जाने थे। इन काउंटरों पर लोग रेलवे के आरक्षित टिकट खरीद सकते थे। उस समय मंडल के सभी प्रमुख स्टेशनों के लिए आवेदन मांगे गए थे, मगर शर्तें बेहद जटिल होने के कारण महोबा से एक व्यक्ति ने ही आवेदन किया था। इस आवेदन पर भी अभी तक विचार नहीं हो सका है। अच्छे परिणाम न आने के कारण रेल प्रशासन ने इस महत्वाकांक्षी योजना पर हथियार डाल दिए हैं। इस संदर्भ में जनसंपर्क अधिकारी गिरीश कंचन ने बताया कि पहली बार टेंडर में अच्छा रिस्पांस नहीं मिला है।
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गौरतलब है कि इस व्यवस्था में टेंडर लेने वाले को आधारभूत ढांचा व कर्मचारी खुद लगाने हैं। सिर्फ तकनीकी सुविधाएं रेलवे मुहैया कराएगा। इस केंद्र पर लोग आरक्षित व अनारक्षित दोनों तरह के टिकट ले सकते हैं। लाइसेंस लेने वाले से पांच लाख की धरोहर राशि ली जाएगी, जो वापस नहीं होगी। जेटीबीएस संचालित कर रहे संचालकों को इस योजना में प्राथमिकता दी जा रही थी। भारी भरकम खर्चा व कमीशन के तौर पर न के बराबर राशि मिलने के कारण योजना लेने में कोई रुचि नहीं दिखा रहा है।
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