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बैनामा होने के बाद भी अस्सी को नहीं मिला मालिकाना हक
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झांसी। सदर तहसील में दाखिल खारिज के लगभग अस्सी से अधिक आवेदन लंबित पडे़ हुए हैं। जिनमें से कई आवेदनों को एक साल से भी अधिक समय बीत गया है। आवेदक भी लगातार तहसील के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन तहसील प्रशासन द्वारा निस्तारण में रुचि नहीं दिखाई जा रही है। जिसका खामियाजा आवेदकों को भुगतना पड़ रहा है।
सरकारी नियमानुसार एक व्यक्ति द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति को संपत्ति को हस्तांतरित करता है अथवा बेचता है तो संपत्ति का दाखिल खारिज करने के बाद ही खरीदार को मालिकाना हक मिलता है। दाखिल खारिज की प्रक्रिया पूरी नहीं होने की दशा में क्रेता को मालिकाना हक की प्राप्ति होती है। दाखिल का मतलब होता है निरस्त करना। जिसका मतलब है कि संपत्ति पर से विक्रेता के मालिकाना हक को निरस्त कर खरीदार के मालिकाना हक को दर्ज करना। दाखिल खारिज की प्रक्रिया पूरी होने के बाद खरीदार संपत्ति का असली हकदार माना जाता है। जिसके चलते लोग बैनामा होने के बाद ही दाखिल खारिज को कराना चाहते हैं। लेकिन तहसील प्रशासन के सुस्त रवैये के कारण सदर तहसील में अस्सी से अधिक दाखिल खारिज के आवेदन लटके हुए हैं। जिसके चलते लोग तहसील के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
इस संबंध में तहसीलदार मदन मोहन गुप्ता ने बताया कि कागजों में कमी के चलते दाखिल खारिज की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया सकता है। दाखिल खारिज के सभी मामलों को निपटाने के आदेश जारी किए गए हैं।
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सरकारी नियमानुसार एक व्यक्ति द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति को संपत्ति को हस्तांतरित करता है अथवा बेचता है तो संपत्ति का दाखिल खारिज करने के बाद ही खरीदार को मालिकाना हक मिलता है। दाखिल खारिज की प्रक्रिया पूरी नहीं होने की दशा में क्रेता को मालिकाना हक की प्राप्ति होती है। दाखिल का मतलब होता है निरस्त करना। जिसका मतलब है कि संपत्ति पर से विक्रेता के मालिकाना हक को निरस्त कर खरीदार के मालिकाना हक को दर्ज करना। दाखिल खारिज की प्रक्रिया पूरी होने के बाद खरीदार संपत्ति का असली हकदार माना जाता है। जिसके चलते लोग बैनामा होने के बाद ही दाखिल खारिज को कराना चाहते हैं। लेकिन तहसील प्रशासन के सुस्त रवैये के कारण सदर तहसील में अस्सी से अधिक दाखिल खारिज के आवेदन लटके हुए हैं। जिसके चलते लोग तहसील के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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इस संबंध में तहसीलदार मदन मोहन गुप्ता ने बताया कि कागजों में कमी के चलते दाखिल खारिज की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया सकता है। दाखिल खारिज के सभी मामलों को निपटाने के आदेश जारी किए गए हैं।
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