फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Due to lack of oxygen, the strings of many broken breaths in Jhansi too

ऑक्सीजन की कमी से झांसी में भी कइयों की टूटी सांसों की डोर

Sun, 05 Dec 2021 08:39 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 05 Dec 2021 08:39 PM IST
विज्ञापन
Due to lack of oxygen, the strings of many broken breaths in Jhansi too
झांसी। देश के किसी भी राज्य की तरफ से ऑक्सीजन की कमी से कोई जान न जाने की बात गले उतरना मुश्किल है, क्योंकि झांसी में ही कइयों की सांसों की डोर ऑक्सीजन की कमी से टूट गई। हाल ये रहा कि ऑक्सीजन न मिल पाने से कई लोगों की नर्सिंगहोमों में बेड पर पड़े-पड़े सांसें थम गईं। कई अस्पताल में भर्ती नहीं हो पाए, इस कारण उनकी मौत हो गई।
विज्ञापन

अमर उजाला ने झांसी में ऑक्सीजन की कमी से हुई परेशानियों की पड़ताल की तो पता चला कि जिले में भी कई मरीजों की जान ऑक्सीजन न मिल पाने से चली गई। दूसरे जनपदों से भी इलाज के भरोसे झांसी आने वाले कई मरीज ऑक्सीजन के टोटे से काल के गाल में समा गए। दर्जनों मरीजों के परिजन दिन-रात ऑक्सीजन की जुगत में इधर-उधर भागते रहे। हाल ये रहा कि कइयों ने अपने मरीज को प्राण वायु देने के लिए औद्योगिक इस्तेमाल में आने वाली ऑक्सीजन भी ऊंचे दाम देकर खरीदी। कुछ लोग अपने मरीजों को ग्वालियर, दिल्ली, आगरा समेत दूसरे महानगर लेकर भागे।
विज्ञापन

खपत थी 20 मीट्रिक टन की लेकिन मिल पाई कम
अप्रैल में कोरोना संक्रमण जब अपने पीक पर पहुंच गया था, तब जिले में एक दिन में ऑक्सीजन की खपत 20 मीट्रिक टन तक पहुंच गई थी। हालांकि, मेडिकल कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट होने से वहां दिक्कत नहीं हुई लेकिन निजी अस्पतालों में कमी हो गई। क्योंकि, कई दिन 20 मीट्रिक टन से कम ऑक्सीजन आ पाई। हालांकि, सरकार की तरफ से ऑक्सीजन एक्सप्रेस चलने के बाद कुछ दिनों में समस्या दूर हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

ये हैं मामले
केस-1
टीकमगढ़ निवासी हिदायत (36) की भी ऑक्सीजन की कमी से जान चली गई। बड़े भाई इकबाल के मुताबिक 20 अप्रैल को खांसी, बुखार आने पर हिदायत को नौगांव में डॉक्टर को दिखाया था। डॉक्टर ने बुखार, खांसी की दवा देकर घर भेज दिया। बाद में हालत बिगड़ी तो छतरपुर ले गए। यहां ऑक्सीजन की कमी होने पर एंबुलेंस से झांसी ले आए। यहां पर निजी अस्पताल में भर्ती कराया। सुबह ऑक्सीजन खत्म होने पर 26 अप्रैल को उनका निधन हो गया।
केस-2
मिशन कंपाउंड निवासी मनोज की चाची बरुआसागर में रहती थीं। उन्होंने बताया कि अप्रैल में कोरोना संक्रमित होेने के बाद चाची की हालत बिगड़ने लगी। सांस लेने में समस्या होने पर उन्हें निजी अस्पताल लेकर गए। यहां डॉक्टरों ने उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रख दिया। इसी बीच, अस्पताल में ऑक्सीजन का टोटा हो गया। मनोज का आरोप है कि नर्सिंगहोम के एक कर्मचारी ने चाची की ऑक्सीजन हटाकर दूसरे मरीज को लगा दी। कुछ देर बार चाची की मौत हो गई।
केस-3
बड़ाबाजार निवासी तरुण के छतरपुर में रहने वाले बहनोई को कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आने से हालत बिगड़ गई थी। उन्होंने जिला अस्पताल में बहनोई को भर्ती कराने की व्यवस्था कर 25 अप्रैल को झांसी बुला लिया था। मगर अस्पताल पहुंचने पर उन्हें दाखिल करने से साफ मना कर दिया गया। बहनोई की लगातार सांसें फूल रही थीं। तरण सीएमओ से लेकर हेल्पलाइन नंबरों पर मदद मांगते रहे पर कुछ नहीं हुआ। ऑक्सीजन की कमी से गाड़ी में उनकी मौत हो गई।

केस-4
बंगलाघाट निवासी आशिया बेगम की भी ऑक्सीजन की कमी से मौत हो गई थी। उनके बेटे असद ने बताया कि 22 अप्रैल को सांस लेने में दिक्कत होने पर उन्हें जिला अस्पताल ले गए थे। वहां डॉक्टरों ने पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन की जांच की तो कम निकली। इस पर डॉक्टरों ने कहा कि यहां पर ऑक्सीजन नहीं है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज ले जाओ। जब मेडिकल कॉलेज पहुंचे तो वहां बेड खाली नहीं था। नर्सिंगहोमों ने भी भर्ती नहीं किया। आशिया ने गाड़ी में ही दम तोड़ दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed