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एक किलोमीटर दूरी तय करने वाला ड्रोन तैयार
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एक किलोमीटर दूरी तय करने वाला ड्रोन तैयार
झांसी। बुंदेलखंड अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के छात्र-छात्राओं ने एक ऐसा ड्रोन तैयार किया है, जो कंप्यूटर प्रोग्राम की सहायता से चलता है। यह ड्रोन पूरी तरह स्वचालित है। यह बताए गए कमांड को पढ़कर बिना किसी हस्तक्षेप के निर्धारित जगह पर मदद पहुंचाकर वापस आ जाता है। यह एक किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम है। हाल ही में इसका परीक्षण बीआईईटी कैंपस में किया गया, जो पूरी तरह सफल साबित हुआ।
इस ड्रोन के जरिए ट्रैफिक की निगरानी तो की ही जा सकती है, साथ ही दूरदराज के आपदाग्रस्त स्थानों पर कम समय और कम खर्चे में मदद भी पहुंचाई जा सकती है। इसके अतिरिक्त प्रशासन इसका उपयोग मेले जैसे सार्वजनिक स्थानों पर बिना जाए निगरानी करने में कर सकता है। छात्रों ने बताया कि यह ड्रोन अन्य की तुलना में काफी सस्ता और विश्वसनीय है। इस ड्रोन को जीपीएस तकनीक से भी लैस किया गया है, जो कि बताए गए पते पर मेडिकल किट, रक्त, खानपान आदि पहुंचा सकता है।
ड्रोन लर्नस क्लब के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार राजपूत के अनुसार यह विमान परीक्षण के तौर पर तैयार किया गया है। यह 200 मीटर ऊंचाई, एक किलोमीटर दूरी, दो किलोग्राम वजन उठाने में सक्षम है। भविष्य में सोलर ऊर्जा का उपयोग करके भार उठाने की क्षमता और उड़ान का समय, दूरी बढ़ाने पर कार्य किया जाएगा। संस्थान के निदेशक प्रो. वीके त्यागी ने भविष्य में इस पर कार्य करवाने और इनोवेशन और इंक्यूबेशन द्वारा सहायता किए जाने का आश्वासन दिया। वहीं, मीडिया प्रभारी डॉ. दीपक नगरिया ने बताया कि इसका परीक्षण बीआईईटी के केंद्रीय खेल मैदान में किया जा चुका है। भविष्य में इसमें आईसी इंजन का इस्तेमाल किया जाएगा, इससे ड्रोन की वजन उठाने एवं दूरी तय करने की क्षमता में बढ़ोतरी होगी। इस दौरान संस्था के निदेशक के अलावा मेकेनिकल इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष डॉ. तरुण गुप्ता, डॉ. आदित्य कुमार पादप, डॉ. विमल किशोर मौजूद रहे।
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झांसी। बुंदेलखंड अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के छात्र-छात्राओं ने एक ऐसा ड्रोन तैयार किया है, जो कंप्यूटर प्रोग्राम की सहायता से चलता है। यह ड्रोन पूरी तरह स्वचालित है। यह बताए गए कमांड को पढ़कर बिना किसी हस्तक्षेप के निर्धारित जगह पर मदद पहुंचाकर वापस आ जाता है। यह एक किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम है। हाल ही में इसका परीक्षण बीआईईटी कैंपस में किया गया, जो पूरी तरह सफल साबित हुआ।
इस ड्रोन के जरिए ट्रैफिक की निगरानी तो की ही जा सकती है, साथ ही दूरदराज के आपदाग्रस्त स्थानों पर कम समय और कम खर्चे में मदद भी पहुंचाई जा सकती है। इसके अतिरिक्त प्रशासन इसका उपयोग मेले जैसे सार्वजनिक स्थानों पर बिना जाए निगरानी करने में कर सकता है। छात्रों ने बताया कि यह ड्रोन अन्य की तुलना में काफी सस्ता और विश्वसनीय है। इस ड्रोन को जीपीएस तकनीक से भी लैस किया गया है, जो कि बताए गए पते पर मेडिकल किट, रक्त, खानपान आदि पहुंचा सकता है।
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ड्रोन लर्नस क्लब के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार राजपूत के अनुसार यह विमान परीक्षण के तौर पर तैयार किया गया है। यह 200 मीटर ऊंचाई, एक किलोमीटर दूरी, दो किलोग्राम वजन उठाने में सक्षम है। भविष्य में सोलर ऊर्जा का उपयोग करके भार उठाने की क्षमता और उड़ान का समय, दूरी बढ़ाने पर कार्य किया जाएगा। संस्थान के निदेशक प्रो. वीके त्यागी ने भविष्य में इस पर कार्य करवाने और इनोवेशन और इंक्यूबेशन द्वारा सहायता किए जाने का आश्वासन दिया। वहीं, मीडिया प्रभारी डॉ. दीपक नगरिया ने बताया कि इसका परीक्षण बीआईईटी के केंद्रीय खेल मैदान में किया जा चुका है। भविष्य में इसमें आईसी इंजन का इस्तेमाल किया जाएगा, इससे ड्रोन की वजन उठाने एवं दूरी तय करने की क्षमता में बढ़ोतरी होगी। इस दौरान संस्था के निदेशक के अलावा मेकेनिकल इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष डॉ. तरुण गुप्ता, डॉ. आदित्य कुमार पादप, डॉ. विमल किशोर मौजूद रहे।
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