बरसात में महानगर को जलभराव से राहत देने के लिए नगर निगम बड़ी अनदेखी कर रहा है। नगर निगम नालों को साफ कराने के लिए टेंडर और सफाई कर्मचारियों की तैनाती की प्रक्रिया पूरी कर चुका है, लेकिन काम की रफ्तार बेहद धीमी है। आलम यह है कि नाले गंदगी से भरे पड़े हैं, लेकिन सफाई के नाम पर महज कोरम पूरा करा किया जा रहा है। नगर निगम के अफसर भी नाला सफाई को लेकर संजीदा नजर नहीं आ रहे हैं। महानगर में 55 बड़े नालों की सफाई के लिए टेंडरिंग और 110 छोटे नालों की सफाई के लिए सफाई कर्मचारियों को तैनात किया गया था। नगर निगम अधिकारियों ने तीन दिन पहले नालों की सफाई शुरू करा दी। लेकिन अब तक नालों की सफाई का काम धीमा चल रहा है। नंदनपुरा और सीपरी समेत महानगर के तमाम इलाकों में नालें गंदगी से भरे पड़े हैं। ऐसे में बरसात हुई, तो जलभराव होने से लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। इसके साथ ही टेंडर में नालों की सफाई के बाद 36 घंटे में सिल्ट उठाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जहां सफाई हुई है वहां भी सिल्ट बिखरी पड़ी है। बारिश होने पर सिल्ट दोबारा नाले में बह जाएगी। वहीं छोटे नालों की सफाई के लिए सफाई कर्मचारी निरीक्षकों के नेतृत्व में काम कर रहे हैं, लेकिन यहां भी काम की रफ्तार धीमी चल रही है। ऐसे में 15 जून तक नाला सफाई पूरी करने के दावे पर पानी फिरता नजर आ रहा है। हर साल नाला सफाई के लिए गैंग बनाया जाता था। जिसमें 20 सफाई कर्मचारी हर सर्किल में लगाए जाते थे। लेकिन इस बार सफाई गैंग भी नहीं बना है। ऐसे में वार्डों में छोटे नालों की सफाई को लेकर कोई रणनीति तय नहीं है। सफाई निरीक्षक अपने हिसाब से नाले साफ करा रहे हैं। बड़े नालों की सफाई शुरू करा दी गई है। रोज अवर अभियंता इसकी रिपोर्ट दे रहे हैं। 15 जून तक नाला सफाई का काम पूरा कर लिया जाएगा। एलएन सिंह, मुख्य अभियंता निर्माण