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इलाज करने के बजाए कर दिया रेफर
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झांसी। प्रसव पीड़ा होने पर ट्रेन से उतारी गई गर्भवती का इलाज करने में महिला अस्पताल में बड़ी लापरवाही सामने आई है। गर्भवती की हालत गंभीर बताते हुए अस्पताल के स्टाफ ने उसका इलाज नहीं किया और मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। जहां उसकी सामान्य डिलीवरी हो गई।
महिला अस्पताल में गर्भवतियों के साथ इलाज के नाम पर मनमानी की जा रही है। हाल ही में सामने आए एक मामले ने अस्पताल में चल रही घोर लापरवाही की कलई खोल दी है। दो अक्तूबर को दक्षिण एक्सप्रेस (2721) से दिल्ली निवासी शमा परवीन अपने देवर के साथ घर जा रही थीं। इसी बीच उन्हें प्रसव पीड़ा होने लगी। झांसी स्टेशन पर महिला को उतारा गया। इसके बाद गर्भवती को महिला अस्पताल ले जाया गया। यहां पर स्टाफ ने महिला की स्थिति को गंभीर बताया और कहा कि कहीं और ले जाओ।
फिर परिजन महिला को आठ-दस किलोमीटर दूर मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। कॉलेज में महिला की नॉर्मल डिलीवरी हो गई। महिला के देवर ने आरोप लगाया कि महिला अस्पताल के स्टाफ के रवैये से महिला की जान जोखिम में पड़ सकती थी। स्टेशन से पहले महिला अस्पताल आने और फिर मेडिकल कॉलेज पहुंचने में एक घंटे का समय लग गया। वहीं, इस मामले में सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय का कहना है कि प्रकरण संज्ञान में नहीं है। इस मामले में जवाब-तलब किया जाएगा।
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महिला अस्पताल में गर्भवतियों के साथ इलाज के नाम पर मनमानी की जा रही है। हाल ही में सामने आए एक मामले ने अस्पताल में चल रही घोर लापरवाही की कलई खोल दी है। दो अक्तूबर को दक्षिण एक्सप्रेस (2721) से दिल्ली निवासी शमा परवीन अपने देवर के साथ घर जा रही थीं। इसी बीच उन्हें प्रसव पीड़ा होने लगी। झांसी स्टेशन पर महिला को उतारा गया। इसके बाद गर्भवती को महिला अस्पताल ले जाया गया। यहां पर स्टाफ ने महिला की स्थिति को गंभीर बताया और कहा कि कहीं और ले जाओ।
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फिर परिजन महिला को आठ-दस किलोमीटर दूर मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। कॉलेज में महिला की नॉर्मल डिलीवरी हो गई। महिला के देवर ने आरोप लगाया कि महिला अस्पताल के स्टाफ के रवैये से महिला की जान जोखिम में पड़ सकती थी। स्टेशन से पहले महिला अस्पताल आने और फिर मेडिकल कॉलेज पहुंचने में एक घंटे का समय लग गया। वहीं, इस मामले में सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय का कहना है कि प्रकरण संज्ञान में नहीं है। इस मामले में जवाब-तलब किया जाएगा।
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