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मां के जन्मदिन पर आई बेटे की मौत की खबर, मेजर अंकित ने पालतू कुत्ते को बचाने के लिए गंवाई जान
Tue, 03 Mar 2020 02:06 AM IST
झांसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 03 Mar 2020 02:06 AM IST
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पत्नी अनुभूति और मां सुमन के साथ मेजर अंकित बुद्धराजा (फाइल फोटो)
- फोटो : REPORTERS
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पालतू कुत्ते की जान बचाने की खातिर अपनी जान गंवाने वाले मेजर अंकित बुद्धराजा की मां सुमन का एक मार्च को जन्मदिन था। वह अपनी मां को बड़ा उपहार देने की योजना बना रहे थे, लेकिन क्या पता था कि जन्मदिन के दिन मां को अपने जिगर के टुकड़े की मौत का समाचार सुनने को मिलेगा। मेजर अंकित का मंगलवार की सुबह आठ बजे सैनिक सम्मान के साथ बिजौली मुक्तिधाम पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।
मेजर अंकित बचपन से ही मेधावी विद्यार्थी थे। इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करते ही 2005 में सेना में उनका अधिकारी पद पर चयन हो गया। उनकी एक बहन भावना है, जिसकी शादी हो चुकी है। जबकि, मेजर अंकित की शादी चार साल पहले भोपाल की अनुभूति के साथ हुई थी। बीएचईएल से रिटायर पिता विजय बुद्धराजा अपनी पत्नी सुमन के साथ राजगढ़ स्थित एल्डिको कॉलोनी में रहते हैं। जबकि, अंकित अपनी पत्नी और दो कुत्तों के साथ कश्मीर के बारामूला में रह रहे थे।
अंकित के दोस्त अवनीश ने बताया कि दो-तीन दिन पहले अंकित ने बताया था कि एक मार्च को उनकी मां का जन्मदिन है। मां को वह बड़ा उपहार देना चाहते हैं। इसकी वे योजना बना रहे थे। लेकिन, होनी को कुछ और ही मंजूर था। घटना की जानकारी होने पर दिन भर उनके घर लोगों का जमावड़ा बना रहा। लोग परिजनों को ढांढस बंधाते रहे। मां का रो-रो कर बुरा हाल रहा।
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जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय के वेलफेयर ऑर्गनाइजर एसके शुक्ला ने बताया कि मंगलवार की सुबह आठ बजे बिजौली में सैनिक सम्मान के साथ मेजर अंकित का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
आखिरी सांस तक पशुओं से प्रेम का रिश्ता निभाया मेजर अंकित ने
पशु - पक्षियों से बचपन से ही प्रेम था, जो जिंदगी की आखिरी सांस तक कायम रहा। अपने पालतू कुत्ते की जान बचाने की खातिर अपनी जान गंवाने वाले सेना के मेजर अंकित बुद्धराजा (32) के बचपन के दोस्त अवनीश कस्तवार ने बताया कि स्कूल के दिनों से ही अंकित को पशु - पक्षियों से विशेष लगाव था। गर्मी में पक्षियों के लिए पानी का इंतजाम करते थे, तो कुत्तों को बिस्किट खिलाना रोज का काम था। अक्सर अपना टिफिन भी गायों के हवाले कर देते थे। इंटरमीडिएट के बाद वह सन् 2005 में सेना में भर्ती हो गए। लेकिन, यहां भी उनका पशु प्रेम कम नहीं हुआ। चार साल पहले उन्होंने दो कुत्ते पाले थे। कुत्तों को वह जान से ज्यादा चाहते थे। देर रात उनका पार्थिव शरीर झांसी लाया गया।
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मेजर अंकित बचपन से ही मेधावी विद्यार्थी थे। इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करते ही 2005 में सेना में उनका अधिकारी पद पर चयन हो गया। उनकी एक बहन भावना है, जिसकी शादी हो चुकी है। जबकि, मेजर अंकित की शादी चार साल पहले भोपाल की अनुभूति के साथ हुई थी। बीएचईएल से रिटायर पिता विजय बुद्धराजा अपनी पत्नी सुमन के साथ राजगढ़ स्थित एल्डिको कॉलोनी में रहते हैं। जबकि, अंकित अपनी पत्नी और दो कुत्तों के साथ कश्मीर के बारामूला में रह रहे थे।
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अंकित के दोस्त अवनीश ने बताया कि दो-तीन दिन पहले अंकित ने बताया था कि एक मार्च को उनकी मां का जन्मदिन है। मां को वह बड़ा उपहार देना चाहते हैं। इसकी वे योजना बना रहे थे। लेकिन, होनी को कुछ और ही मंजूर था। घटना की जानकारी होने पर दिन भर उनके घर लोगों का जमावड़ा बना रहा। लोग परिजनों को ढांढस बंधाते रहे। मां का रो-रो कर बुरा हाल रहा।
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जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय के वेलफेयर ऑर्गनाइजर एसके शुक्ला ने बताया कि मंगलवार की सुबह आठ बजे बिजौली में सैनिक सम्मान के साथ मेजर अंकित का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
आखिरी सांस तक पशुओं से प्रेम का रिश्ता निभाया मेजर अंकित ने
पशु - पक्षियों से बचपन से ही प्रेम था, जो जिंदगी की आखिरी सांस तक कायम रहा। अपने पालतू कुत्ते की जान बचाने की खातिर अपनी जान गंवाने वाले सेना के मेजर अंकित बुद्धराजा (32) के बचपन के दोस्त अवनीश कस्तवार ने बताया कि स्कूल के दिनों से ही अंकित को पशु - पक्षियों से विशेष लगाव था। गर्मी में पक्षियों के लिए पानी का इंतजाम करते थे, तो कुत्तों को बिस्किट खिलाना रोज का काम था। अक्सर अपना टिफिन भी गायों के हवाले कर देते थे। इंटरमीडिएट के बाद वह सन् 2005 में सेना में भर्ती हो गए। लेकिन, यहां भी उनका पशु प्रेम कम नहीं हुआ। चार साल पहले उन्होंने दो कुत्ते पाले थे। कुत्तों को वह जान से ज्यादा चाहते थे। देर रात उनका पार्थिव शरीर झांसी लाया गया।