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Jhansi News: दवाएं ही नहीं, टांके लगाने का धागा, टेप तक बाहर से मंगवा रहे डॉक्टर

Wed, 28 Jun 2023 01:04 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jun 2023 01:04 AM IST
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Doctors are getting not only medicines, thread for stitches, even tape from outside
अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को महंगी-महंगी दवाओं और इंजेक्शन से लेकर सिजेरियन डिलीवरी कराने के लिए टांके लगाने वाला धागा, टेप से लेकर पट्टी तक खरीदकर लानी पड़ रही है। जबकि, शासन मरीजों को सभी दवाएं अस्पताल में ही मिलने का दावा करता है। असाध्य जैसे गंभीर बीमारियों के इलाज में तो मीटर निजी अस्पताल की तरह चलता है।
मेडिकल के गायनी विभाग में डिलीवरी के लिए भर्ती होते ही मरीज से छह से सात हजार रुपये की दवाएं मंगवा ली जाती हैं। मंगलवार को अमर उजाला ने अस्पताल में जाकर पड़ताल की तो हैरान कर देने वाली स्थिति सामने आईं। मरीजों ने बाहर से खरीदी गईं दवाओं का बिल दिखाया तो उसमें एंटीबायोटिक दवाएं, टेप, टांके लगाने के लिए धागा से लेकर डॉक्टर ने खुद के इस्तेमाल के लिए ग्लव्स, मास्क और प्लास्टिक एप्रेन तक डिलीवरी के लिए आई महिला के परिजनों से मंगवाया था। इसके अलावा एनेस्थीसिया डॉक्टर द्वारा लिखी जाने वाली बेहोशी का इंजेक्शन तक स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ ने पर्चे पर लिख डाला। जबकि, यहां पर जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसूताओं की नि:शुल्क डिलीवरी होनी चाहिए। कोई भी दवा, इंजेक्शन बाहर से नहीं मंगवानी चाहिए।
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इसके अलावा मरीजों को जांच कराने के लिए बहुत परेशानी झेलनी पड़ती है। खासकर अल्ट्रासाउंड की जांच के लिए तो तीन-तीन हफ्ते बाद का नंबर मिलता है। नगरिया कॉलोनी के मुकेश कुमार ने बताया कि उनकी बहू सोमवार को गायनी विभाग में भर्ती हुई थी। डॉक्टर ने अल्ट्रासांउड जांच लिखी। उस दिन शाम को चार से नौ बजे तक अल्ट्रासाउंड जांच कक्ष के बाहर बहू बैठी रही पर जांच नहीं हो पाई। मंगलवार को भी सुबह नौ से दोपहर 12 बजे तक जांच नहीं हो पाई। इस वजह से कई मरीज तो निजी सेंटर पर पैसे खर्च करके अल्ट्रासाउंड कराने को मजबूर हैं। तीन से पांच हजार रुपये खर्च करके मरीजों को एमआरआई जांच भी बाहर से करानी पड़ रही है, क्योंकि मेडिकल कॉलेज में पिछले चार महीने से मशीन ठीक नहीं हो पाई है। वहीं, सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में इलाज कराने आए मरीजों का 30-30 हजार रुपये तक दवा, इंजेक्शन खरीदने में खर्च हो जा रहा है।
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यूं बयां किया दर्द
पत्नी की डिलीवरी होनी थी। सोमवार को गायनी विभाग में भर्ती कराया। पहले ही दिन छह हजार रुपये की दवाएं बाहर से मंगवा ली गईं। इसमें ग्लव्स, मास्क, प्लास्टिक एप्रेन, टेप भी शामिल है। - कनिष्क, खातीबाबा।

सोमवार को पत्नी को डिलीवरी कराने के लिए भर्ती किया था। छह से सात हजार रुपये की दवाएं और इंजेक्शन बाहर से खरीदकर ला चुका हूं। कुछ दवाएं अस्पताल से भी मिली हैं। - फरहान, अलीगोल।

पिता खुमान सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में भर्ती थे। पांच-छह दिनों में ही 30 हजार रुपये की दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ीं। पेशे से पिता किसान हैं। इसलिए रिश्तेदारों से उधार लेकर इलाज करा रहा हूं। - भूपत, जतरा।

सात जून को अपनी बहन को दिखाने आई तो डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कहा। 20 दिन बाद की तारीख मिली।मंगलवार को सुबह नौ बजे आ गई थीं। 12 बजे तक जांच नहीं हो पाई। - रिहाना, दतिया गेट बाहर।



सोमवार को गायनी विभाग में पत्नी को दिखाने आया था। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड लिखा। कई दिनों बाद का नंबर मिला। मंगलवार को बाहर से एक हजार रुपये की जांच कराई। - विक्रम पटेल, उनाव बालाजी।



गायनी विभाग द्वारा बाहर से टेप, मास्क आदि मंगवाने की जानकारी नहीं है। डॉक्टरों से पूछताछ की जाएगी। अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध हैं। - डॉ. सचिन माहुर, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज।
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