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गड़बड़ी पाश मशीनों की, भुगत रहे किसान
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झांसी। जिले में सहकारी समितियों से खाद बांटी जा रही है। समितियों पर पर्याप्त खाद होने के बावजूद यदि प्वाइंट ऑफ सेल (पॉश) मशीन का नेटवर्क गायब हो जाता है, तो खाद बंटनी बंद हो जाती है। इससे किसान हंगामा करने लगते हैं। यह स्थिति एक या दो समितियों पर नहीं, बल्कि चालीस समितियों की है। सॉफ्टवेयर अपग्रेड होने के कारण यहां मशीनें बदली गईं हैं। समितियों पर नेटवर्क सुचारु रहे, इसका कोई समाधान नहीं निकल पा रहा है। समितियों में नई पॉश मशीनें आ गई हैं। लेकिन नेटवर्क की समस्या का समाधान नहीं है।
जिले में 56 सहकारी समितियां और 111 खाद की दुकानें हैं। सभी जगह से किसानों को खाद उपलब्ध कराई जा रही है। लेकिन इसके बाद भी दुकानों पर खाद के लिए किसानों की कतार कम होने का नाम नहीं ले रही है। दरअसल, केंद्र सरकार ने व्यवस्था की है कि पॉश मशीन में अंगूठा लगाने के बाद किसान की पुष्टि होती है और उसी क्रम में किसानों को खाद दी जाती है। शासन का मानना है कि इससे खाद की कालाबाजारी रुकेगी और अनावश्यक खाद का उपयोग भी कम हो जाएगा।
पॉश मशीन सीधे दिल्ली के खाद मंत्रालय से ऑनलाइन जुड़ी हैं। जिले में कुछ सहकारी समितियां ग्रामीण अंचल में हैं। यहां पर अक्सर नेटवर्क की समस्या रहती है। इस कारण खाद वितरण में सर्वाधिक दिक्कत दूरदराज के क्षेत्रों में आ रही है। जैसे ही नेटवर्क गायब होता है, पॉश मशीन काम करना बंद कर देती है और समितियां भी खाद बांटने का काम रोक देती हैं। इससे किसानों का धैर्य जवाब दे जाता है और वे हंगामा करने लगते हैं। जबकि, दूसरी जगह के किसानों को लगता है कि खाद की कमी के कारण यह दिक्कत हो रही है।
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दीपावली के बाद माना जा रहा था कि खाद की किल्लत दूर हो जाएगी। लेकिन, करीब चालीस पॉश मशीनों के साफ्टवेयर में दिक्कत आ गई, इससे खाद वितरण का काम प्रभावित रहा। यही नहीं, नेटवर्क की गड़बड़ी से भी कभी एक घंटा तो कभी डेड़ घंटा खाद वितरण बंद रहता है। इससे भी किसान हंगामा करते हैं।
खाद की उपलब्धता पर्याप्त है। लेकिन, नेटवर्क की गड़बड़ी के कारण पॉश मशीनें बंद हो जाती हैं और किसान हंगामा करने लगते हैं। यदि किसान धैर्य से काम लें तो खाद की कोई समस्या नहीं है।
- अनूप कुमार द्विवेदी,
सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता
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जिले में 56 सहकारी समितियां और 111 खाद की दुकानें हैं। सभी जगह से किसानों को खाद उपलब्ध कराई जा रही है। लेकिन इसके बाद भी दुकानों पर खाद के लिए किसानों की कतार कम होने का नाम नहीं ले रही है। दरअसल, केंद्र सरकार ने व्यवस्था की है कि पॉश मशीन में अंगूठा लगाने के बाद किसान की पुष्टि होती है और उसी क्रम में किसानों को खाद दी जाती है। शासन का मानना है कि इससे खाद की कालाबाजारी रुकेगी और अनावश्यक खाद का उपयोग भी कम हो जाएगा।
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पॉश मशीन सीधे दिल्ली के खाद मंत्रालय से ऑनलाइन जुड़ी हैं। जिले में कुछ सहकारी समितियां ग्रामीण अंचल में हैं। यहां पर अक्सर नेटवर्क की समस्या रहती है। इस कारण खाद वितरण में सर्वाधिक दिक्कत दूरदराज के क्षेत्रों में आ रही है। जैसे ही नेटवर्क गायब होता है, पॉश मशीन काम करना बंद कर देती है और समितियां भी खाद बांटने का काम रोक देती हैं। इससे किसानों का धैर्य जवाब दे जाता है और वे हंगामा करने लगते हैं। जबकि, दूसरी जगह के किसानों को लगता है कि खाद की कमी के कारण यह दिक्कत हो रही है।
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दीपावली के बाद माना जा रहा था कि खाद की किल्लत दूर हो जाएगी। लेकिन, करीब चालीस पॉश मशीनों के साफ्टवेयर में दिक्कत आ गई, इससे खाद वितरण का काम प्रभावित रहा। यही नहीं, नेटवर्क की गड़बड़ी से भी कभी एक घंटा तो कभी डेड़ घंटा खाद वितरण बंद रहता है। इससे भी किसान हंगामा करते हैं।
खाद की उपलब्धता पर्याप्त है। लेकिन, नेटवर्क की गड़बड़ी के कारण पॉश मशीनें बंद हो जाती हैं और किसान हंगामा करने लगते हैं। यदि किसान धैर्य से काम लें तो खाद की कोई समस्या नहीं है।
- अनूप कुमार द्विवेदी,
सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता