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Jhansi News: मप्र में विस्थापन की गांठ ने यूपी में अटकाई केन-बेतवा परियोजना की रफ्तार

Wed, 07 Oct 2026 02:14 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 07 Oct 2026 02:14 AM IST
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Displacement-related hurdles in MP stall the pace of the Ken-Betwa project in UP.
झांसी। केन-बेतवा लिंक परियोजना (केबीएलपी) की रफ्तार मध्य प्रदेश में उलझे पुनर्वास और विस्थापन के पेच के कारण प्रभावित हो रही है। इसका असर उत्तर प्रदेश के हिस्से में होने वाले काम पर भी पड़ने लगा है। परियोजना के तहत केन और बेतवा नदियों को जोड़ने के लिए 216 किलोमीटर लंबी लिंक कैनाल बनाई जानी है। यह कैनाल पन्ना स्थित दौधन बांध से निकलेगी, लेकिन बांध क्षेत्र में पुनर्वास और विस्थापन का काम पूरा नहीं होने के कारण कैनाल का निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है।
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केन-बेतवा लिंक परियोजना में मध्य प्रदेश का हिस्सा सबसे अहम है। पन्ना में दौधन बांध का निर्माण किया जा रहा है। इसके डूब क्षेत्र में करीब 9,000 हेक्टेयर जमीन आ रही है। साथ ही पर्यावरणीय शर्तों के तहत पन्ना टाइगर रिजर्व भी प्रभावित हो रहा है। बांध निर्माण के कारण पन्ना के 14 गांवों का पुनर्वास और विस्थापन किया जाना है। इसके अलावा छतरपुर के 14 गांव भी परियोजना में शामिल हैं। इससे करीब 25 हजार आबादी प्रभावित होने का अनुमान है। पुनर्वास और विस्थापन को लेकर कई महीनों से ग्रामीणों का विरोध चल रहा है। इसका असर दौधन बांध के निर्माण के साथ ही केन-बेतवा को जोड़ने वाली लिंक कैनाल पर भी पड़ रहा है।
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परियोजना को मार्च 2030 तक पूरा करने की समयसीमा तय है। ऐसे में मध्य प्रदेश में काम प्रभावित होने से उत्तर प्रदेश के हिस्से में होने वाले कार्य भी प्रभावित होने लगे हैं। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, लिंक कैनाल का निर्माण शुरू करने में अभी कई तकनीकी पेच हैं। मुख्य अभियंता देवेश शुक्ला का कहना है कि इन तकनीकी दिक्कतों को दूर करने की कोशिश की जा रही है। सभी बाधाएं दूर होने के बाद कैनाल का काम शुरू किया जाएगा।
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सूखाग्रस्त बुंदेलखंड के लिए महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना के जरिये उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में 10.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई की जाएगी। इसके अलावा करीब 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने की योजना है। परियोजना पर शुरुआती तौर पर 44,605 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था। हालांकि, काम में देरी के कारण इसकी लागत बढ़कर करीब 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है।
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