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मिट्टी और कंकड़ खाना हो सकता है जानलेवा

Fri, 04 Nov 2016 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 04 Nov 2016 01:05 AM IST
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Dirt and gravel can be life-threatening food
health news jhansi - फोटो : demo
बच्चों के शरीर में न्यूट्रियंस और कैल्शियम की कमी होने से उनको मिट्टी खाने की आदत पड़ जाती है। लेकिन, यह आदत बच्चों के लिए जानलेवा हो सकती हैं। यदि आपका बच्चा कंकड़ या मिट्टी खाता है तो तुरंत उसे खाने से रोकें और डाक्टर से संपर्क करें।
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बच्चे मिट्टी, कंकड़, बाल, पत्थर खाने लगते हैं, जिस पर अभिभावक ध्यान नहीं देते। वह सोचते हैं कि बुरी आदत है, लेकिन बड़े होने पर छूट जाएगी। लेकिन, ध्यान नहीं देने पर यह आदत जानलेवा हो सकती है। ऐसा ही वाकया एक महीने पहले मेडिकल कालेज में आया। टीकमगढ़ जिला की रहने वाली आठ साल की बच्ची शिवानी को उसके माता- पिता ने पेट में दर्द, कमजोरी, भूख न लगने व पेट फूलने की शिकायत पर मेडिकल कालेज में सर्जरी प्रवक्ता डा. पंकज सोनकिया को दिखाया। बच्ची की एक्सरे जांच होने पर पता चला कि उसके आंत में पत्थर हैं। आपरेशन करने पर लगभग एक किलो छोटे-छोटे पत्थर मिले। पत्थरों के कारण पेट में कई घाव भी हो गए थे। लगभग एक फीट आंत भी खराब हो गई थी।
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बच्ची के मां- बाप ने बताया कि वह मजदूरी करते हैं और काम के सिलसिले में अक्सर बाहर रहते हैं। बच्ची अकेले में मिट्टी और कंकड़ खाती रहती थी। जब उनको पेट से निकले कंकड़ दिखाए तो उन्होेंने बताया कि यह पत्थर घर के निर्माण के लिए रखे थे। पत्थर खाने से आंत डैमेज होने के कारण बच्ची की आंत काटनी पड़ी। लेकिन, आपरेशन के दूसरे दिन ही बच्ची की मौत हो गई।
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इस आपरेशन में मेडिकल कालेज के वरिष्ठ सर्जन डा. पंकज सोनकिया, डा. राजकुमार वर्मा, डा. सत्येंद्र राजपूत, संतोष कुमार सरोज, संतवीर सिंह शामिल रहे।

इनका रखें ध्यान
- यदि आपका बच्चा मिट्टी आदि खाता है तो उसे रोकें। मनोचिकित्सक से संपर्क करें। भूख न लगना, पेट दर्द, पेट फूलने जैसी शिकायत होने पर लापरवाही न बरतें, बल्कि तुरंत कुशल चिकित्सक को दिखाएं।

यह हो सकती है समस्या
- कंकड़ खाने से आंतें डैमेज हो जाती हैं, जिससे बच्चे का मानसिक और शारीरिक विकास रुक जाता है। पाचन शक्ति कमजोर और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी घट जाती है, जिससे बच्चों पर अन्य रोगों का हमला भी हो जाता है।


अक्सर मां- बाप बच्चों के खानपान पर ध्यान नहीं देते हैं। बच्चे अवशिष्ट पदार्थ खाते रहते हैं, जिससे कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं। बच्चे मानसिक तनाव में होने के कारण भी यह सब खाने लगते हैं। इस मामले में मानसिक चिकित्सक से भी सलाह लें।
- डा. पंकज सोनकिया
सर्जरी प्रवक्ता, मेडिकल कालेज
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