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खेतों से सीधे गोशाला पहुंचेगी पराली
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झांसी। पराली से निपटने को अब पशुपालन विभाग को ही खेतों से पराली उठाने का जिम्मा सौंपा गया है। किसानों को सिर्फ खेतों में पराली पड़े होने की सूचना देनी होगी। उसके बाद पशुपालन विभाग गोशालाओं तक पराली पहुंचाने की व्यवस्था खुद बनाएगा। इस कार्य में ग्राम प्रधानों की मदद ली जाएगी।
धान की फसल के कटाई खत्म हो चुकी है। अब गेहूं के लिए खेत तैयार किए जा रहे। धान की फसल के बाद खेतों में अभी पराली पड़ी हुई है, जिसे नष्ट करना किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण है। पिछले वर्ष पूरे प्रदेश में पराली जलाने वाले दस बड़े शहरों में झांसी भी शुमार था। सरकार को सुप्रीम कोर्ट में काफी फटकार भी खानी पड़ी थी। इसके देखते हुए प्रशासन पहले से सतर्क है। किसानों को जागरूक करने के साथ ही पशुपालन विभाग ने नई व्यवस्था शुरू की है। मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. वाईके तोमर के मुताबिक किसानों को पराली हटाने के लिए अतिरिक्त इंतजाम नहीं करने होंगे बल्कि इसकी सूचना ग्राम प्रधान अथवा विभाग को देनी होगी। इसके बाद पशुपालन विभाग पराली को सीधे खेतों से उठाकर गोशालाओं तक पहुंचाएगा। उनके मुताबिक इसके लिए उनको कोई शुल्क भी नहीं देना होगा। हालांकि पराली को खेत में एकत्रित करना ही किसानों के लिए काफी खर्चीला काम होता है।
सौ से अधिक मामले आ चुके सामने
झांसी। पराली जलाने के अब तक करीब सौ मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि 37 किसानों के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी। किसानों से जुर्माना भी वसूला गया। लेकिन किसी जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बता दें, पराली जलाने की घटना पर नियंत्रण के लिए सेटेलाइट से लगातार निगरानी की जा रही है। लेकिन उसके बावजूद जिन इलाकों में सर्वाधिक पराली जलाई जाती रही है वहां अंकुश नहीं लग पा रहा है। पिछली बार की तरह इस बार भी मोंठ में ही सर्वाधिक पराली जलाए जाने की घटनाएं प्रकाश में आई हैं।
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धान की फसल के कटाई खत्म हो चुकी है। अब गेहूं के लिए खेत तैयार किए जा रहे। धान की फसल के बाद खेतों में अभी पराली पड़ी हुई है, जिसे नष्ट करना किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण है। पिछले वर्ष पूरे प्रदेश में पराली जलाने वाले दस बड़े शहरों में झांसी भी शुमार था। सरकार को सुप्रीम कोर्ट में काफी फटकार भी खानी पड़ी थी। इसके देखते हुए प्रशासन पहले से सतर्क है। किसानों को जागरूक करने के साथ ही पशुपालन विभाग ने नई व्यवस्था शुरू की है। मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. वाईके तोमर के मुताबिक किसानों को पराली हटाने के लिए अतिरिक्त इंतजाम नहीं करने होंगे बल्कि इसकी सूचना ग्राम प्रधान अथवा विभाग को देनी होगी। इसके बाद पशुपालन विभाग पराली को सीधे खेतों से उठाकर गोशालाओं तक पहुंचाएगा। उनके मुताबिक इसके लिए उनको कोई शुल्क भी नहीं देना होगा। हालांकि पराली को खेत में एकत्रित करना ही किसानों के लिए काफी खर्चीला काम होता है।
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सौ से अधिक मामले आ चुके सामने
झांसी। पराली जलाने के अब तक करीब सौ मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि 37 किसानों के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी। किसानों से जुर्माना भी वसूला गया। लेकिन किसी जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बता दें, पराली जलाने की घटना पर नियंत्रण के लिए सेटेलाइट से लगातार निगरानी की जा रही है। लेकिन उसके बावजूद जिन इलाकों में सर्वाधिक पराली जलाई जाती रही है वहां अंकुश नहीं लग पा रहा है। पिछली बार की तरह इस बार भी मोंठ में ही सर्वाधिक पराली जलाए जाने की घटनाएं प्रकाश में आई हैं।
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