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देर से अस्पताल पहुंचने पर टूट रहीं कोविड मरीजों की सांसें
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देर से अस्पताल पहुंचने पर टूट रहीं कोविड मरीजों की सांसें
झांसी। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से हालात बहुत भयावह हो गए हैं। प्रशासन की ओर से जारी सरकारी आंकड़ों में अप्रैल में 20 कोरोना पॉजिटिव मरीजों की मौत हो चुकी हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादातर मौतें देर से अस्पताल पहुंचने के कारण हुई हैं। ऐसे में मरीजों को हालत बिगड़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए, क्योंकि फेफड़े ज्यादा संक्रमित हो जाने पर मरीजों की जान बचाना मुश्किल हो जाता है।
कोरोना की पहली लहर में जितने बुरे हालात नहीं थे, उससे ज्यादा खराब स्थिति दूसरी लहर में हो गई है। दिन- प्रतिदिन रिकॉर्ड मरीज सामने आते जा रहे हैं तो पिछले कुछ दिनों से मौत के आंकड़ों में भी तेजी से उछाल आया है। इस साल एक दिन में सर्वाधिक आठ मौतें सोमवार को हुई थीं। वहीं, अप्रैल के पहले दिन से अब तक 20 मरीजों की सांसें थम चुकी हैं। इसमें 38 साल के युवक से लेकर 85 वर्षीय वृद्ध तक शामिल हैं। खास बात ये है कि इस बार युवाओं की भी काफी जान जा रही है। ऐसे में डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना के लक्षण सामने आने पर जांच कराने में देर नहीं करें। जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आती है और ऑक्सीजन लेवल 90 तक पहुंच जाता है तो अस्पताल में भर्ती होने में देरी न करें। खुद ही डॉक्टर बनकर होम्योपैथी, आयुर्वेदिक आदि दवाएं न खाएं।
80 प्रतिशत ऑक्सीजन तक पता ही नहीं चलता
विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार फेफड़े तक संक्रमण पहुंच जाने के कारण मरीज का ऑक्सीजन लेवल 80 प्रतिशत तक पहुंच जाता है और उसे पता नहीं चलता है। इसे हैप्पी हाईपॉक्सिया सिंड्रोम कहते हैं। जब ऑक्सीजन लेवल 80 के नीचे जाता है तो सांस फूलने लगती है। तब तक 15 से 20 प्रतिशत फेफड़े डैमेज हो चुके होते हैं।
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यदि बुखार, गले में खरास और जुकाम है तो कोरोना की जांच जरूर कराएं। रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो ऑक्सीजन लेवल जांचें। यदि 90 तक ऑक्सीजन लेवल पहुंच जाता है तो बिना देरी किए हुए अस्पताल में भर्ती हो जाएं। इससे पहले छाती के बल लेट जाएं। इससे ऑक्सीजन का लेवल बढ़ जाएगा। - डॉ. पारस गुप्ता, सहायक नोडल अधिकारी कोविड, मेडिकल कॉलेज।
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झांसी। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से हालात बहुत भयावह हो गए हैं। प्रशासन की ओर से जारी सरकारी आंकड़ों में अप्रैल में 20 कोरोना पॉजिटिव मरीजों की मौत हो चुकी हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादातर मौतें देर से अस्पताल पहुंचने के कारण हुई हैं। ऐसे में मरीजों को हालत बिगड़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए, क्योंकि फेफड़े ज्यादा संक्रमित हो जाने पर मरीजों की जान बचाना मुश्किल हो जाता है।
कोरोना की पहली लहर में जितने बुरे हालात नहीं थे, उससे ज्यादा खराब स्थिति दूसरी लहर में हो गई है। दिन- प्रतिदिन रिकॉर्ड मरीज सामने आते जा रहे हैं तो पिछले कुछ दिनों से मौत के आंकड़ों में भी तेजी से उछाल आया है। इस साल एक दिन में सर्वाधिक आठ मौतें सोमवार को हुई थीं। वहीं, अप्रैल के पहले दिन से अब तक 20 मरीजों की सांसें थम चुकी हैं। इसमें 38 साल के युवक से लेकर 85 वर्षीय वृद्ध तक शामिल हैं। खास बात ये है कि इस बार युवाओं की भी काफी जान जा रही है। ऐसे में डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना के लक्षण सामने आने पर जांच कराने में देर नहीं करें। जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आती है और ऑक्सीजन लेवल 90 तक पहुंच जाता है तो अस्पताल में भर्ती होने में देरी न करें। खुद ही डॉक्टर बनकर होम्योपैथी, आयुर्वेदिक आदि दवाएं न खाएं।
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80 प्रतिशत ऑक्सीजन तक पता ही नहीं चलता
विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार फेफड़े तक संक्रमण पहुंच जाने के कारण मरीज का ऑक्सीजन लेवल 80 प्रतिशत तक पहुंच जाता है और उसे पता नहीं चलता है। इसे हैप्पी हाईपॉक्सिया सिंड्रोम कहते हैं। जब ऑक्सीजन लेवल 80 के नीचे जाता है तो सांस फूलने लगती है। तब तक 15 से 20 प्रतिशत फेफड़े डैमेज हो चुके होते हैं।
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यदि बुखार, गले में खरास और जुकाम है तो कोरोना की जांच जरूर कराएं। रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो ऑक्सीजन लेवल जांचें। यदि 90 तक ऑक्सीजन लेवल पहुंच जाता है तो बिना देरी किए हुए अस्पताल में भर्ती हो जाएं। इससे पहले छाती के बल लेट जाएं। इससे ऑक्सीजन का लेवल बढ़ जाएगा। - डॉ. पारस गुप्ता, सहायक नोडल अधिकारी कोविड, मेडिकल कॉलेज।