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चुनाव में ड्यूटी लगने से डिप्रेशन के चलते गई महिला चुनाव अधिकारी की जान
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झांसी। मतदान के दौरान चुनाव अधिकारी द्वितीय निर्मला साहू की मौत चुनावी ड्यूटी को लेकर पैदा हुए डिप्रेशन के चलते हुई। परिजनों का कहना है चुनाव में ड्यूटी लग जाने से निर्मला काफी घबराई हुई थीं। ड्यूटी लगने के बाद से उनका खाना-पीना भी कम हो गया। उनको अनहोनी की आशंका सता रही थी। ड्यूटी कटवाने के लिए उन्होंने अफसरों के भी चक्कर काटे लेकिन, कहीं सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार चुनाव के दौरान ही उनकी मौत हो गई।
कोतवाली थानाक्षेत्र के दतिया गेट बाहर निवासी निर्मला साहू (56) पत्नी रामप्रकाश साहू नलकूप मंडल में प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर तैनात थीं। पति रामप्रकाश साहू घर में ही आटा की चक्की चलाते हैं। उनका कहना है कि निर्मला कैंसर से भी पीड़ित थीं। लेकिन दो वर्ष पहले दिल्ली में उपचार के बाद उससे वह उबर गई थीं। काफी दिनों तक बीमार रहने की वजह से वह काफी कमजोर हो गईं थीं। सेवानिवृत्त में भी सिर्फ चार वर्ष बचे थे, ऐसे में वह नौकरी पूरी हो जाने का इंतजार कर रही थीं। इसी बीच उनकी पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगा दी गई। पति रामप्रकाश के मुताबिक इस वजह से वह काफी घबड़ा गई थीं। उन्होंने निर्मला को ढांढस बांधया लेकिन, उनके मन का डर खत्म नहीं हो रहा था। ड्यूटी कटवाने के लिए उन्होंने अपने विभाग के अधिकारियों से भी संपर्क किया लेकिन, सभी ने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद आला अफसरों को भी उन्होंने प्रार्थना पत्र दिए लेकिन, सुनवाई नहीं हुई। मतदान केंद्र तक वह खुद उनको छोड़ने गए। तब भी निर्मला काफी परेशान थीं। बूथ पर वह अकेली महिला थीं। रात में उनकी तबियत खराब हुई लेकिन, सुबह होते-होते तबीयत काफी खराब हो गई। जब तक कुछ समझ में आता, उनकी मौत हो गई। उनकी मौत के बाद परिजन यह सवाल पूछ रहे है कि आखिर जब उन्होंने बीमारी की बात अफसरों को बताई तब भी उनको ड्यूटी करने के लिए क्यूं मजबूर किया गया। आखिरकार उनकी मौत के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए।
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कोतवाली थानाक्षेत्र के दतिया गेट बाहर निवासी निर्मला साहू (56) पत्नी रामप्रकाश साहू नलकूप मंडल में प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर तैनात थीं। पति रामप्रकाश साहू घर में ही आटा की चक्की चलाते हैं। उनका कहना है कि निर्मला कैंसर से भी पीड़ित थीं। लेकिन दो वर्ष पहले दिल्ली में उपचार के बाद उससे वह उबर गई थीं। काफी दिनों तक बीमार रहने की वजह से वह काफी कमजोर हो गईं थीं। सेवानिवृत्त में भी सिर्फ चार वर्ष बचे थे, ऐसे में वह नौकरी पूरी हो जाने का इंतजार कर रही थीं। इसी बीच उनकी पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगा दी गई। पति रामप्रकाश के मुताबिक इस वजह से वह काफी घबड़ा गई थीं। उन्होंने निर्मला को ढांढस बांधया लेकिन, उनके मन का डर खत्म नहीं हो रहा था। ड्यूटी कटवाने के लिए उन्होंने अपने विभाग के अधिकारियों से भी संपर्क किया लेकिन, सभी ने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद आला अफसरों को भी उन्होंने प्रार्थना पत्र दिए लेकिन, सुनवाई नहीं हुई। मतदान केंद्र तक वह खुद उनको छोड़ने गए। तब भी निर्मला काफी परेशान थीं। बूथ पर वह अकेली महिला थीं। रात में उनकी तबियत खराब हुई लेकिन, सुबह होते-होते तबीयत काफी खराब हो गई। जब तक कुछ समझ में आता, उनकी मौत हो गई। उनकी मौत के बाद परिजन यह सवाल पूछ रहे है कि आखिर जब उन्होंने बीमारी की बात अफसरों को बताई तब भी उनको ड्यूटी करने के लिए क्यूं मजबूर किया गया। आखिरकार उनकी मौत के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए।
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