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डीबीटी योजना : नौ दिन चले अढ़ाई कोस
ब्यूरो
Updated Mon, 11 Jan 2016 01:22 AM IST
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झांसी। किसानों को सब्सिडी का सीधा लाभ दिलाने के लिए शुरू की गई डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजना का काम जिले में धीमी चाल से चल रहा है। स्थिति यह है कि अंतिम तिथि निकलने के दो माह बाद भी लक्ष्य के सापेक्ष लाभार्थियों के पंजीयन नहीं हो सके हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से किसानों के पंजीयन नहीं हो रहे हैं।
केंद्र सरकार ने किसानों के हिस्से के लाभ को बिचौलियों से बचाने के लिए डीबीटी स्कीम लागू की है। इसके तहत किसानों को बीज, खाद आदि मूल रकम देकर गोदाम से लेनी है। उस पर मिलने वाली सब्सिडी को किसानों के खाते में भेजा जाना है। सरकार का उद्देश्य यह है कि किसानों के हिस्से की रकम बिचौलिए हजम न कर सकें।
जिले के करीब साढ़े तीन लाख किसानों में से पहले चरण में 63 हजार किसानों का डीबीटी के तहत ऑनलाइन पंजीयन होना है। इसके लिए 31 अक्तूबर अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी। अंतिम तिथि बीते दो माह से भी अधिक समय हो चुका है, लेकिन अभी तक लक्ष्य के सापेक्ष शत प्रतिशत पंजीयन नहीं हो सके हैं। अभी महज 44 हजार किसानों के ही पंजीयन हो सके हैं। कृषि विभाग की मशीनरी द्वारा पंजीयन कराने के काम को गंभीरता से न लेने के कारण लक्ष्य अधूरा पड़ा हुआ है।
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पंचायत चुनाव की व्यस्तता के कारण पंजीयन पर ध्यान नहीं दिया जा सका। चुनाव खत्म होते ही पंजीयन का काम तेजी से किया जा रहा है। शीघ्र ही शत प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
बीआर मौर्या, जिला कृषि अधिकारी, झांसी।
किसानों के खातों में नहीं पहुंची सब्सिडी
झांसी। जिले के चालीस फीसदी से अधिक खेत बिना बुवाई के पड़े हुए हैं, जिन लोगों ने बुवाई की है, उनको लेकर भी कृषि विभाग गंभीर नहीं है। विभिन्न गोदामों से अब तक करीब पांच हजार किसानों ने खरीद की है, इनमें से 3400 के खातों में सब्सिडी पहुंच गई है। जिले के सोलह सौ किसानों के खातों में अभी तक बीज खरीद की सब्सिडी नहीं पहुंची है। प्रमुख सचिव ने जिला कृषि अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि 15 जनवरी तक सभी किसानों के खातों में सब्सिडी भेज दी जाए।
कम बिका गेहूं का बीज
जिले में सर्वाधिक बोया जाने वाला गेहूं का बीज इस वर्ष पिछले साल की अपेक्षा काफी कम बिका है। पिछले वर्ष 12500 क्विंटल बीज सरकारी गोदामों से बेचा गया था, जबकि इस बार सिर्फ 7500 क्विंटल गेहूं का बीज ही बेचा गया है।
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केंद्र सरकार ने किसानों के हिस्से के लाभ को बिचौलियों से बचाने के लिए डीबीटी स्कीम लागू की है। इसके तहत किसानों को बीज, खाद आदि मूल रकम देकर गोदाम से लेनी है। उस पर मिलने वाली सब्सिडी को किसानों के खाते में भेजा जाना है। सरकार का उद्देश्य यह है कि किसानों के हिस्से की रकम बिचौलिए हजम न कर सकें।
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जिले के करीब साढ़े तीन लाख किसानों में से पहले चरण में 63 हजार किसानों का डीबीटी के तहत ऑनलाइन पंजीयन होना है। इसके लिए 31 अक्तूबर अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी। अंतिम तिथि बीते दो माह से भी अधिक समय हो चुका है, लेकिन अभी तक लक्ष्य के सापेक्ष शत प्रतिशत पंजीयन नहीं हो सके हैं। अभी महज 44 हजार किसानों के ही पंजीयन हो सके हैं। कृषि विभाग की मशीनरी द्वारा पंजीयन कराने के काम को गंभीरता से न लेने के कारण लक्ष्य अधूरा पड़ा हुआ है।
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पंचायत चुनाव की व्यस्तता के कारण पंजीयन पर ध्यान नहीं दिया जा सका। चुनाव खत्म होते ही पंजीयन का काम तेजी से किया जा रहा है। शीघ्र ही शत प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
बीआर मौर्या, जिला कृषि अधिकारी, झांसी।
किसानों के खातों में नहीं पहुंची सब्सिडी
झांसी। जिले के चालीस फीसदी से अधिक खेत बिना बुवाई के पड़े हुए हैं, जिन लोगों ने बुवाई की है, उनको लेकर भी कृषि विभाग गंभीर नहीं है। विभिन्न गोदामों से अब तक करीब पांच हजार किसानों ने खरीद की है, इनमें से 3400 के खातों में सब्सिडी पहुंच गई है। जिले के सोलह सौ किसानों के खातों में अभी तक बीज खरीद की सब्सिडी नहीं पहुंची है। प्रमुख सचिव ने जिला कृषि अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि 15 जनवरी तक सभी किसानों के खातों में सब्सिडी भेज दी जाए।
कम बिका गेहूं का बीज
जिले में सर्वाधिक बोया जाने वाला गेहूं का बीज इस वर्ष पिछले साल की अपेक्षा काफी कम बिका है। पिछले वर्ष 12500 क्विंटल बीज सरकारी गोदामों से बेचा गया था, जबकि इस बार सिर्फ 7500 क्विंटल गेहूं का बीज ही बेचा गया है।