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Jhansi News: आलिमा की डिग्री हासिल कर बेटियां बनीं शरीयत की जानकार
Tue, 06 Feb 2024 02:59 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Tue, 06 Feb 2024 02:59 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। अलीगोल स्थित मदरसा इस्लामिया दावतुल कुरान लिल्बनात में सोमवार को जलसे का आयोजन किया गया। जलसे में मदरसे की तीन छात्राओं को आलिमा की डिग्री दी गई। जलसे में तकरीर करते हुए दारूल उलूम देवबंद से तशरीफ लाए मौलाना मुफ्ती राशिद साहब ने इस्लाम की बारीकियां बताईं।
उन्होंने कहा कि इस्लाम में लड़कों और लड़कियों को बराबरी का हक दिया गया है। इस वक्त तालीम की जरूरत लड़कों से ज्यादा लड़कियों को है। कहा कि लड़की जब तालीमयाफ्ता होगी तो आगे की नस्लों मेें सुधार होगा। औरतों की परवरिश से ही मर्द वली सिफत (महापुरुष) बनते हैं। उन्होंने कहा कि मां ही इस्लाम की यूनिवर्सिटी है। नफरत को मुहब्बत से जीतने का नाम ही इस्लाम है। इस्लाम अमन का पैगाम देता है। मुफ्ती साबिर कासमी ने कहा कि इल्म ही इंसान को कामयाबी का रास्ता दिखाता है। मदरसे में पिछले वर्ष पांच छात्राएं आलिमा हो चुकी हैं। इस साल की शुरुआत में ही तीन छात्राओं ने आलिमा की डिग्री हासिल की है। इस मौके पर मौलाना रिजवान, मौलाना सलमान, मौलाना शादाब, मुफ्ती खालिद, सैयद ताबिश मौजूद रहे।
- बाक्स...
छह साल की पढ़ाई के बाद हासिल की डिग्री
झांसी। मदरसे में पढ़ने वाली छात्रा कहकशां, सफिया और शिफा ने छह साल तक मदरसे में पढ़ाई की। छह साल के कोर्स के बाद ही उन्होंने आलिमा की डिग्री हासिल की है। इसके साथ ही उन्हें ट्रिपल सी और सिलाई, कढ़ाई भी सिखाई गई। मदरसे की छात्राओं ने अंग्रेजी में कुरान की आयतों का तर्जुमा (अनुवाद) किया।
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झांसी। अलीगोल स्थित मदरसा इस्लामिया दावतुल कुरान लिल्बनात में सोमवार को जलसे का आयोजन किया गया। जलसे में मदरसे की तीन छात्राओं को आलिमा की डिग्री दी गई। जलसे में तकरीर करते हुए दारूल उलूम देवबंद से तशरीफ लाए मौलाना मुफ्ती राशिद साहब ने इस्लाम की बारीकियां बताईं।
उन्होंने कहा कि इस्लाम में लड़कों और लड़कियों को बराबरी का हक दिया गया है। इस वक्त तालीम की जरूरत लड़कों से ज्यादा लड़कियों को है। कहा कि लड़की जब तालीमयाफ्ता होगी तो आगे की नस्लों मेें सुधार होगा। औरतों की परवरिश से ही मर्द वली सिफत (महापुरुष) बनते हैं। उन्होंने कहा कि मां ही इस्लाम की यूनिवर्सिटी है। नफरत को मुहब्बत से जीतने का नाम ही इस्लाम है। इस्लाम अमन का पैगाम देता है। मुफ्ती साबिर कासमी ने कहा कि इल्म ही इंसान को कामयाबी का रास्ता दिखाता है। मदरसे में पिछले वर्ष पांच छात्राएं आलिमा हो चुकी हैं। इस साल की शुरुआत में ही तीन छात्राओं ने आलिमा की डिग्री हासिल की है। इस मौके पर मौलाना रिजवान, मौलाना सलमान, मौलाना शादाब, मुफ्ती खालिद, सैयद ताबिश मौजूद रहे।
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छह साल की पढ़ाई के बाद हासिल की डिग्री
झांसी। मदरसे में पढ़ने वाली छात्रा कहकशां, सफिया और शिफा ने छह साल तक मदरसे में पढ़ाई की। छह साल के कोर्स के बाद ही उन्होंने आलिमा की डिग्री हासिल की है। इसके साथ ही उन्हें ट्रिपल सी और सिलाई, कढ़ाई भी सिखाई गई। मदरसे की छात्राओं ने अंग्रेजी में कुरान की आयतों का तर्जुमा (अनुवाद) किया।
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