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एलईडी लाइट ताले में बंद, शहर में अंधेरा
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darkness in city
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झांसी। महानगर को रोशन करने के लिए खरीदी गईं एलईडी लाइटें ताले में बंद रखी हैं। पांच महीने पहले लाइटों की आपूर्ति होने के बाद भी अफसरों को पोल पर लाइट लगवाने का वक्त नहीं मिला। आलम यह है कि महानगर के वार्डों में अंधेरा पसरा हुआ है। इसे लेकर आए दिन पार्षद अधिकारियों को पत्र लिखकर लाइटें लगवाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अफसर सुनने को तैयार नहीं हैं।
महानगर में नगर निगम ने करीब छह महीने पहले सर्वे कराया था। जिसमें दो हजार पोल ऐसे पाए गए, जिन पर एलईडी लाइट नहीं थी। इसके बाद नगर निगम ने जैम पोर्टल के जरिए दो हजार एलईडी लाइटों की खरीद की। फरवरी के अंतिम सप्ताह में कंपनी ने 1.86 करोड़ की लागत से दो हजार लाइटें नगर निगम को मुहैया करा दीं। इन लाइटों को नगर निगम के स्टोर में रखवा दिया गया, लेकिन पोल पर लाइटें लगवाने की कवायद नहीं की गई।
अफसरों का तर्क है कि कोविड के चलते वार्डों में लाइटें नहीं लग सकीं, लेकिन मार्च के अंतिम सप्ताह में लॉकडाउन हुआ था। लाइटों की आपूर्ति के बाद से लॉकडाउन तक अफसरों के पास करीब एक महीने का वक्त था, लेकिन लाइटों को लगवाया नहीं गया। पिछले दिनों बड़ा बाजार क्षेत्र के पार्षद ने क्षेत्र में एलईडी लाइटों की खराबी की शिकायत कर नई लाइटें लगवाने के लिए कहा था, लेकिन कोई गौर नहीं किया गया। अब यह लाइटें नगर निगम के स्टोर की शोभा बढ़ा रही हैं। इसे लेकर पार्षद लगातार सवाल उठा रहे हैं। लेकिन नगर निगम अधिकारी शहर का अंधेरा दूर करने के लिए तैयार नहीं हैं।
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सोडियम लाइटों की नीलामी अब तक नहीं
नगर निगम के स्टोर में करीब आठ हजार से अधिक सोडियम लाइटें खराब रखी हुई हैं। नगर निगम इनकी अब तक नीलामी नहीं करा सका है। एक ओर निगम आय बढ़ाने पर जोर दे रहा है। दूसरी ओर स्क्रैप लाइटों की नीलामी में लापरवाही बरती जा रही है। पार्षदों का कहना है कि सोडियम लाइटों की नीलामी कर नगर निगम आय कर सकता है।
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कोविड में मार्ग प्रकाश विभाग की टीमों को लगा दिया गया था। इसके चलते लाइटें नहीं लगवाई जा सकीं। लाइटों को लगवाने का काम शुरू कर दिया गया है। जल्द ही सभी वार्डों में लाइटें लग जाएंगीं।
अगम कटियार, सहायक अभियंता/प्रभारी, मार्ग प्रकाश विभाग
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महानगर में नगर निगम ने करीब छह महीने पहले सर्वे कराया था। जिसमें दो हजार पोल ऐसे पाए गए, जिन पर एलईडी लाइट नहीं थी। इसके बाद नगर निगम ने जैम पोर्टल के जरिए दो हजार एलईडी लाइटों की खरीद की। फरवरी के अंतिम सप्ताह में कंपनी ने 1.86 करोड़ की लागत से दो हजार लाइटें नगर निगम को मुहैया करा दीं। इन लाइटों को नगर निगम के स्टोर में रखवा दिया गया, लेकिन पोल पर लाइटें लगवाने की कवायद नहीं की गई।
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अफसरों का तर्क है कि कोविड के चलते वार्डों में लाइटें नहीं लग सकीं, लेकिन मार्च के अंतिम सप्ताह में लॉकडाउन हुआ था। लाइटों की आपूर्ति के बाद से लॉकडाउन तक अफसरों के पास करीब एक महीने का वक्त था, लेकिन लाइटों को लगवाया नहीं गया। पिछले दिनों बड़ा बाजार क्षेत्र के पार्षद ने क्षेत्र में एलईडी लाइटों की खराबी की शिकायत कर नई लाइटें लगवाने के लिए कहा था, लेकिन कोई गौर नहीं किया गया। अब यह लाइटें नगर निगम के स्टोर की शोभा बढ़ा रही हैं। इसे लेकर पार्षद लगातार सवाल उठा रहे हैं। लेकिन नगर निगम अधिकारी शहर का अंधेरा दूर करने के लिए तैयार नहीं हैं।
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सोडियम लाइटों की नीलामी अब तक नहीं
नगर निगम के स्टोर में करीब आठ हजार से अधिक सोडियम लाइटें खराब रखी हुई हैं। नगर निगम इनकी अब तक नीलामी नहीं करा सका है। एक ओर निगम आय बढ़ाने पर जोर दे रहा है। दूसरी ओर स्क्रैप लाइटों की नीलामी में लापरवाही बरती जा रही है। पार्षदों का कहना है कि सोडियम लाइटों की नीलामी कर नगर निगम आय कर सकता है।
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कोविड में मार्ग प्रकाश विभाग की टीमों को लगा दिया गया था। इसके चलते लाइटें नहीं लगवाई जा सकीं। लाइटों को लगवाने का काम शुरू कर दिया गया है। जल्द ही सभी वार्डों में लाइटें लग जाएंगीं।
अगम कटियार, सहायक अभियंता/प्रभारी, मार्ग प्रकाश विभाग