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367 करोड़ का मुआवजा न बंटने से अधर में कचनौदा डैम
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झांसी। हर घर जल योजना जिन बांधों पर आधारित है वह बांध परियोजनाएं ही आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। समय पर इनके पूरा न होने से हर घर जल योजना का अधर में फंसना तय है। इसका अहम हिस्सा कचनौदा बांध करीब 367 करोड़ का मुआवजा न बंट पाने से अटका हुआ है। इस वजह से इसमें पानी नहीं भरा जा पा रहा जबकि इससे 1.64 लाख लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने की योजना है।
सजनम नदी पर निर्माणाधीन इस डैम का निर्माण वर्ष 2007 में शुरू हुआ था। शुरूआती लागत 594.46 करोड़ आंकी गई। बांध के लिए 2363 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत होनी थी लेकिन, करीब 15 साल बीत जाने के बाद भी सबसे जरूरी यही काम नहीं हुआ। अब बांध का ढांचा करीब 75 फीसदी बनकर तैयार है लेकिन, डूब की जमीन अधिग्रहीत न होने से इसमें पानी नहीं भर पा रहा है। सिंचाई अफसरों का कहना है कि पुनरीक्षित लागत के मुताबिक करीब 415 करोड़ रुपये का काम बाकी है। इससे सबसे अधिक 367 करोड़ रुपये की भूमि अधिग्रहण में खर्च किया जाना है।
उधर, बांध का भराव क्षेत्र तय होने से पहले ही सरकार ने दिसंबर 2020 में इसे ललितपुर एवं झांसी के आसपास के इलाकों के करीब 1.64 लाख आबादी को पानी देने के लिए हर घर जल योजना के तहत चुन लिया। इसके अलावा इससे 10850 हेक्टेयर (7850 रबी एवं 3000 खरीफ) सिंचाई होनी है लेकिन, सारा मामला मुआवजा राशि न बटने से अटका हुआ है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के यहां आने के बाद अब इस परियोजना के आगे बढ़ने की उम्मीद दिखाई पड़ती है।
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शासन स्तर पर यह मामला अभी विचाराधीन है। इस परियोजना को पूरा करने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए वित्तीय स्रोत तलाशे जा रहे हैं। कुछ दिनों में ही इसके बारे में फैसला हो जाएगा।
शीलचंद्र उपाध्याय, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग
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सजनम नदी पर निर्माणाधीन इस डैम का निर्माण वर्ष 2007 में शुरू हुआ था। शुरूआती लागत 594.46 करोड़ आंकी गई। बांध के लिए 2363 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत होनी थी लेकिन, करीब 15 साल बीत जाने के बाद भी सबसे जरूरी यही काम नहीं हुआ। अब बांध का ढांचा करीब 75 फीसदी बनकर तैयार है लेकिन, डूब की जमीन अधिग्रहीत न होने से इसमें पानी नहीं भर पा रहा है। सिंचाई अफसरों का कहना है कि पुनरीक्षित लागत के मुताबिक करीब 415 करोड़ रुपये का काम बाकी है। इससे सबसे अधिक 367 करोड़ रुपये की भूमि अधिग्रहण में खर्च किया जाना है।
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उधर, बांध का भराव क्षेत्र तय होने से पहले ही सरकार ने दिसंबर 2020 में इसे ललितपुर एवं झांसी के आसपास के इलाकों के करीब 1.64 लाख आबादी को पानी देने के लिए हर घर जल योजना के तहत चुन लिया। इसके अलावा इससे 10850 हेक्टेयर (7850 रबी एवं 3000 खरीफ) सिंचाई होनी है लेकिन, सारा मामला मुआवजा राशि न बटने से अटका हुआ है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के यहां आने के बाद अब इस परियोजना के आगे बढ़ने की उम्मीद दिखाई पड़ती है।
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शासन स्तर पर यह मामला अभी विचाराधीन है। इस परियोजना को पूरा करने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए वित्तीय स्रोत तलाशे जा रहे हैं। कुछ दिनों में ही इसके बारे में फैसला हो जाएगा।
शीलचंद्र उपाध्याय, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग