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Jhansi News: बंद पड़ा मुक्तिधाम का साइक्लोन सेपरेटर, 70-80 प्रतिशत तक कम कर देता है पीएम 10 और 2.5 का उत्सर्जन
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बिल बकाया होने पर काट दी मुक्तिधाम की चिमनी की बिजली
- पांच दिन से बंद पड़ी है, विद्युत विभाग बिजली काटने से कर रहा इन्कार
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बिल बकाया होने पर विद्युत विभाग ने श्याम चौपड़ा मुक्तिधाम में लगी साइक्लोन सेपरेटर यानी चिमनी की बिजली काट दी। लगभग पांच दिन से चिमनी बंद पड़ी है, जो कि धुएं को अवशोषित करती है। अब नगर निगम ने बकाया जमा करा दिया है। वहीं, विद्युत विभाग बिजली काटने से इन्कार कर रहा है।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत शिवाजी नगर स्थित श्याम चौपड़ा मुक्ति धाम में साइक्लोन सेपरेटर की स्थापना की गई है। लोड अनुसार विद्युत कनेक्शन भी लिया है। इसकी स्थापना वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए की गई है। बताया गया कि मुक्तिधाम में औसतन रोज दो से तीन शवों का दहन किया जाता है। प्रति शव दहन में 400 से 500 किलो लकड़ी आदि की आवश्यकता होती है। दाह संस्कार के दौरान लकड़ी से पार्टिकुलेट मैटर 10 और 2.5 भी निकलते हैं, जो स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक हैं। किसी भी शव दहन में औसत लगभग पांच किलो धूल और विभिन्न जहरीली गैसें निकलती हैं। निगम अफसरों का दावा है कि चिमनी की मदद से उत्सर्जित डस्ट पार्टिकुलेट मेटल 70 से 80 प्रतिशत तक कम भी हुआ है। मगर पांच दिन पहले विद्युत विभाग ने चिमनी की बिजली काट दी। इससे धुएं के कण अवशोषित नहीं हो पा रहे हैं। अपर नगर आयुक्त मो. कमर का कहना है कि एक दिन पहले बिजली का बिल 20,600 रुपये बकाया होने पर विद्युत विभाग ने बिजली काट दी है। जबकि, अगले ही दिन बिल जमा करा दिया गया था। वहीं, विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता रविंद्र कुमार का कहना है कि कोई तार हिल गया होगा। विद्युत विभाग ने बिजली नहीं काटी है।
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- पांच दिन से बंद पड़ी है, विद्युत विभाग बिजली काटने से कर रहा इन्कार
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बिल बकाया होने पर विद्युत विभाग ने श्याम चौपड़ा मुक्तिधाम में लगी साइक्लोन सेपरेटर यानी चिमनी की बिजली काट दी। लगभग पांच दिन से चिमनी बंद पड़ी है, जो कि धुएं को अवशोषित करती है। अब नगर निगम ने बकाया जमा करा दिया है। वहीं, विद्युत विभाग बिजली काटने से इन्कार कर रहा है।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत शिवाजी नगर स्थित श्याम चौपड़ा मुक्ति धाम में साइक्लोन सेपरेटर की स्थापना की गई है। लोड अनुसार विद्युत कनेक्शन भी लिया है। इसकी स्थापना वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए की गई है। बताया गया कि मुक्तिधाम में औसतन रोज दो से तीन शवों का दहन किया जाता है। प्रति शव दहन में 400 से 500 किलो लकड़ी आदि की आवश्यकता होती है। दाह संस्कार के दौरान लकड़ी से पार्टिकुलेट मैटर 10 और 2.5 भी निकलते हैं, जो स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक हैं। किसी भी शव दहन में औसत लगभग पांच किलो धूल और विभिन्न जहरीली गैसें निकलती हैं। निगम अफसरों का दावा है कि चिमनी की मदद से उत्सर्जित डस्ट पार्टिकुलेट मेटल 70 से 80 प्रतिशत तक कम भी हुआ है। मगर पांच दिन पहले विद्युत विभाग ने चिमनी की बिजली काट दी। इससे धुएं के कण अवशोषित नहीं हो पा रहे हैं। अपर नगर आयुक्त मो. कमर का कहना है कि एक दिन पहले बिजली का बिल 20,600 रुपये बकाया होने पर विद्युत विभाग ने बिजली काट दी है। जबकि, अगले ही दिन बिल जमा करा दिया गया था। वहीं, विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता रविंद्र कुमार का कहना है कि कोई तार हिल गया होगा। विद्युत विभाग ने बिजली नहीं काटी है।
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