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साइकिल बनी फिटनेस का मंत्र: बचत और पर्यावरण का सफर, झांसी से लद्दाख और नेपाल तक पहुंचा जुनून
Wed, 03 Jun 2026 02:21 PM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Wed, 03 Jun 2026 02:21 PM IST
सार
झांसी में कई लोग साइकिल को केवल व्यायाम तक सीमित नहीं रख रहे, बल्कि इसके जरिये कठिन यात्राएं कर नई मिसालें भी स्थापित कर रहे हैं।
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साइकिल से लद्दाख पहुंचे डाॅ आदित्य साहू।
- फोटो : स्वयं
विस्तार
कभी आम आदमी की सवारी मानी जाने वाली साइकिल आज फिटनेस, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक बचत का मजबूत माध्यम बनकर उभर रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच शहर में साइकिल चलाने वालों की संख्या बढ़ रही है। सुबह-शाम सड़कें ऐसे लोगों से गुलजार रहती हैं जो फिट रहने के लिए नियमित रूप से साइकिल चला रहे हैं।
झांसी में कई लोग साइकिल को केवल व्यायाम तक सीमित नहीं रख रहे, बल्कि इसके जरिये कठिन यात्राएं कर नई मिसालें भी स्थापित कर रहे हैं। आवास विकास नंदनपुरा निवासी नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आदित्य साहू साइकिल से लद्दाख की चुनौतीपूर्ण यात्रा पूरी कर चुके हैं। वहीं साहनी बिहार के संजय तिवारी डबल पैडल साइकिल से खरदुंगला तक पहुंचकर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज करा चुके हैं। हीरापुरा निवासी ज्ञान सिंह गुर्जर साइकिल से दो बार नेपाल यात्रा कर चुके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार नियमित साइकिल चलाने से हृदय, फेफड़े और जोड़ों की कार्यक्षमता बेहतर होती है। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों का कहना है कि सप्ताह में पांच दिन करीब 30 मिनट साइकिल चलाने से शरीर स्वस्थ रहता है, वजन नियंत्रित रहता है और कई बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ अग्रवाल के अनुसार साइकिल चलाने से घुटनों और पंजों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं तथा जोड़ों पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता। वहीं हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज राय बताते हैं कि नियमित साइकिल चलाने से रक्त संचार बेहतर होता है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर संतुलित बना रहता है।
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साइकिल का एक बड़ा फायदा पर्यावरण संरक्षण भी है। इससे न तो ईंधन खर्च होता है और न ही प्रदूषण फैलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छोटी दूरी के लिए लोग मोटर वाहन छोड़कर साइकिल का उपयोग करें तो न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि स्वास्थ्य और जेब, दोनों को फायदा पहुंचेगा।
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झांसी में कई लोग साइकिल को केवल व्यायाम तक सीमित नहीं रख रहे, बल्कि इसके जरिये कठिन यात्राएं कर नई मिसालें भी स्थापित कर रहे हैं। आवास विकास नंदनपुरा निवासी नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आदित्य साहू साइकिल से लद्दाख की चुनौतीपूर्ण यात्रा पूरी कर चुके हैं। वहीं साहनी बिहार के संजय तिवारी डबल पैडल साइकिल से खरदुंगला तक पहुंचकर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज करा चुके हैं। हीरापुरा निवासी ज्ञान सिंह गुर्जर साइकिल से दो बार नेपाल यात्रा कर चुके हैं।
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विशेषज्ञों के अनुसार नियमित साइकिल चलाने से हृदय, फेफड़े और जोड़ों की कार्यक्षमता बेहतर होती है। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों का कहना है कि सप्ताह में पांच दिन करीब 30 मिनट साइकिल चलाने से शरीर स्वस्थ रहता है, वजन नियंत्रित रहता है और कई बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ अग्रवाल के अनुसार साइकिल चलाने से घुटनों और पंजों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं तथा जोड़ों पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता। वहीं हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज राय बताते हैं कि नियमित साइकिल चलाने से रक्त संचार बेहतर होता है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर संतुलित बना रहता है।
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साइकिल का एक बड़ा फायदा पर्यावरण संरक्षण भी है। इससे न तो ईंधन खर्च होता है और न ही प्रदूषण फैलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छोटी दूरी के लिए लोग मोटर वाहन छोड़कर साइकिल का उपयोग करें तो न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि स्वास्थ्य और जेब, दोनों को फायदा पहुंचेगा।