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सदन की बैठक से क्यों लगता है डर, फिर टाली
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 18 Dec 2016 12:52 AM IST
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nagar nigm, jhansi news
- फोटो : demo
आगामी 22 दिसंबर को प्रस्तावित नगर निगम सदन की बेहद महत्वपूर्ण बैठक एक बार फिर टाल दी गई और इस तरह जनता से जुड़े कई काम एक बार फिर फाइलों में दबे रह गए। इसमें कई विकास कार्यों के अलावा आवारा कुत्तों की नसबंदी, अतिक्रमण, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट और गाद प्रबंधन प्रोजेक्ट जैसे की महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी हैं। गौरतलब है कि यदि विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित हो गईं तो सदन की बैठक फिर लंबे समय तक के लिए टल जाएगी और कई काम रुक जाएंगे।
नियम है कि नगर निगम सदन की बैठक दो महीने में एक बार अनिवार्य है। सदन की बैठक 21 जून को हुई थी। उसके बाद आठ नवंबर को फिर बैठक बुलाई गई थी, लेकिन कोरम पूरा नहीं होने के कारण स्थगित कर दी गई। उसके बाद से एक महीना हो गया, लेकिन बैठक नहीं हो सकी। कभी विधानसभा सत्र, कभी नगर आयुक्त की नामौजूदगी और फिर लोकसभा सत्र के बहाने बैठक टाली जाती रही। तय किया गया कि 20 दिसंबर को बैठक बुलाई जाएगी लेकिन इस बीच महापौर का ठेकेदारों से विवाद हो गया और इसी तर्क के साथ एक बार फिर बैठक टाल दी गई। हालात यह हैं कि अब विधानसभा चुनाव की घोषणा कभी भी हो सकती है और तब आचार संहिता लागू हो जाएगी। जाहिर है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक सदन की बैठक नहीं हो सकेगी।
बीते शुक्रवार को पार्षदों की बैठक के दौरान उनके कहा गया कि वे इसी बैठक को सदन की बैठक मानकर इसमें सहमति के हस्ताक्षर कर दें तो सभी प्रस्ताव पास कर दिए जाएं, लेकिन पार्षद भड़क गए। हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया और कहा कि सदन बुलाया जाए। इस बाबत नगर आयुक्त अरुण प्रकाश ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया।
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ये काम फंसे
सदन की बैठक नहीं हो पाने के कारण आवारा कुत्तों की नसबंदी करने का प्रोजेक्ट अटका पड़ा है। इसके अलावा मल एवं गाद प्रबंधन परियोजना लागू नहीं हो पा रही है। इसके अंतर्गत शहर के विभिन्न घरों में बने शौचालय टैंकों की निशुल्क सफाई की जाएगी तथा इसके पानी का उपयोग फसल पैदावार बढ़ाने में किया जाएगा। इसके अलावा भट्टागांव में पार्क, सामुदायिक भवन, अम्रत योजना के अंतर्गत रघुनाथराव महल पार्क, सूजे खां खंती पार्क और स्वच्छता कर लगाने संबंधी कार्य लटके हैं।
ऐसे में कैसे हो बैठक
नगर निगम सदन की बैठक नियमित होनी चाहिए, ताकि नई योजनाओं और मुद्दों पर चर्चा हो सके। लेकिन अब इनदिनों नगर निगम गहमा-गहमी का माहौल है। ठेकेदारों से विवाद के बाद हालात ठीक नहीं हैं। ऐसे में कैसे हो बैठक?
- अशोक पलया
पार्षद भाजपा
हंगामे का डर है
यदि सदन की बैठक बुलाई जाती है तो इसमें ठेकेदारों के मुद्दे पर चर्चा होती। यह भी सवाल उठता कि वर्क आर्डर कब जारी किए गए और काम कब पूरा हुआ। बैठक में ठेकेदारों की मनमानी पर हंगामा भी हो सकता था, लेकिन बैठक को टाल दिया गया।
- सुरेश चंद्र गोपी
पार्षद, बसपा
छह माह से लटका सड़क का काम
छह माह से अलीगोल खिड़की की एक सड़क के निर्माण का काम लटका है। टेंडर हो गया है, लेकिन अभी तक वर्कआर्डर के चक्कर में काम नहीं हो पा रहा है। अन्य सड़कों के काम भी नहीं हो पा रहे हैं। सदन की बैठक होती तो सड़क के मुद्दे पर हंगामा होता।
- महेलका मकरानी
पार्षद सपा
सामान्य बैठक को सदन बताने की कोशिश
महापौर की ओर से शुक्रवार को बुलाई गई पार्षदों की बैठक को ही सदन की बैठक मानकर हस्ताक्षर कराए जा रहे थे, लेकिन मैंने और साथी पार्षदों ने मना कर दिया। सदन की बैठक नहीं होने से जनता में गलत संदेश जाता है।
- आनंद साहू
पार्षद बसपा
विकास कार्य ठप
सदन की बैठक नहीं होने से विकास कार्य ठप हैं। रही-सही कसर ठेकेदारों ने पूरी कर दी है। मैं हमेशा समय पर बैठक बुलाने का मुद्दा उठाता हूं लेकिन उस पर अमल नहीं किया जाता है।
- कन्हैया कपूर
पार्षद, कांग्रेस
बदले हालातों में सदन की बैठक टालनी पड़ी। बैठक में हंगामा हो सकता था। विकास कार्यों में कोई कोताही नहीं बरती जाती। फिलहाल मेरा ध्यान सड़कों के निरीक्षण पर है। शहर भर से घटिया सड़कों की शिकायतें आ रही थीं। जनता सब समझती है। शहर की जनता उनके साथ है। अभी नहीं बता सकते कि बैठक कब होगी।
- किरण वर्मा
महापौर
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नियम है कि नगर निगम सदन की बैठक दो महीने में एक बार अनिवार्य है। सदन की बैठक 21 जून को हुई थी। उसके बाद आठ नवंबर को फिर बैठक बुलाई गई थी, लेकिन कोरम पूरा नहीं होने के कारण स्थगित कर दी गई। उसके बाद से एक महीना हो गया, लेकिन बैठक नहीं हो सकी। कभी विधानसभा सत्र, कभी नगर आयुक्त की नामौजूदगी और फिर लोकसभा सत्र के बहाने बैठक टाली जाती रही। तय किया गया कि 20 दिसंबर को बैठक बुलाई जाएगी लेकिन इस बीच महापौर का ठेकेदारों से विवाद हो गया और इसी तर्क के साथ एक बार फिर बैठक टाल दी गई। हालात यह हैं कि अब विधानसभा चुनाव की घोषणा कभी भी हो सकती है और तब आचार संहिता लागू हो जाएगी। जाहिर है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक सदन की बैठक नहीं हो सकेगी।
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बीते शुक्रवार को पार्षदों की बैठक के दौरान उनके कहा गया कि वे इसी बैठक को सदन की बैठक मानकर इसमें सहमति के हस्ताक्षर कर दें तो सभी प्रस्ताव पास कर दिए जाएं, लेकिन पार्षद भड़क गए। हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया और कहा कि सदन बुलाया जाए। इस बाबत नगर आयुक्त अरुण प्रकाश ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया।
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ये काम फंसे
सदन की बैठक नहीं हो पाने के कारण आवारा कुत्तों की नसबंदी करने का प्रोजेक्ट अटका पड़ा है। इसके अलावा मल एवं गाद प्रबंधन परियोजना लागू नहीं हो पा रही है। इसके अंतर्गत शहर के विभिन्न घरों में बने शौचालय टैंकों की निशुल्क सफाई की जाएगी तथा इसके पानी का उपयोग फसल पैदावार बढ़ाने में किया जाएगा। इसके अलावा भट्टागांव में पार्क, सामुदायिक भवन, अम्रत योजना के अंतर्गत रघुनाथराव महल पार्क, सूजे खां खंती पार्क और स्वच्छता कर लगाने संबंधी कार्य लटके हैं।
ऐसे में कैसे हो बैठक
नगर निगम सदन की बैठक नियमित होनी चाहिए, ताकि नई योजनाओं और मुद्दों पर चर्चा हो सके। लेकिन अब इनदिनों नगर निगम गहमा-गहमी का माहौल है। ठेकेदारों से विवाद के बाद हालात ठीक नहीं हैं। ऐसे में कैसे हो बैठक?
- अशोक पलया
पार्षद भाजपा
हंगामे का डर है
यदि सदन की बैठक बुलाई जाती है तो इसमें ठेकेदारों के मुद्दे पर चर्चा होती। यह भी सवाल उठता कि वर्क आर्डर कब जारी किए गए और काम कब पूरा हुआ। बैठक में ठेकेदारों की मनमानी पर हंगामा भी हो सकता था, लेकिन बैठक को टाल दिया गया।
- सुरेश चंद्र गोपी
पार्षद, बसपा
छह माह से लटका सड़क का काम
छह माह से अलीगोल खिड़की की एक सड़क के निर्माण का काम लटका है। टेंडर हो गया है, लेकिन अभी तक वर्कआर्डर के चक्कर में काम नहीं हो पा रहा है। अन्य सड़कों के काम भी नहीं हो पा रहे हैं। सदन की बैठक होती तो सड़क के मुद्दे पर हंगामा होता।
- महेलका मकरानी
पार्षद सपा
सामान्य बैठक को सदन बताने की कोशिश
महापौर की ओर से शुक्रवार को बुलाई गई पार्षदों की बैठक को ही सदन की बैठक मानकर हस्ताक्षर कराए जा रहे थे, लेकिन मैंने और साथी पार्षदों ने मना कर दिया। सदन की बैठक नहीं होने से जनता में गलत संदेश जाता है।
- आनंद साहू
पार्षद बसपा
विकास कार्य ठप
सदन की बैठक नहीं होने से विकास कार्य ठप हैं। रही-सही कसर ठेकेदारों ने पूरी कर दी है। मैं हमेशा समय पर बैठक बुलाने का मुद्दा उठाता हूं लेकिन उस पर अमल नहीं किया जाता है।
- कन्हैया कपूर
पार्षद, कांग्रेस
बदले हालातों में सदन की बैठक टालनी पड़ी। बैठक में हंगामा हो सकता था। विकास कार्यों में कोई कोताही नहीं बरती जाती। फिलहाल मेरा ध्यान सड़कों के निरीक्षण पर है। शहर भर से घटिया सड़कों की शिकायतें आ रही थीं। जनता सब समझती है। शहर की जनता उनके साथ है। अभी नहीं बता सकते कि बैठक कब होगी।
- किरण वर्मा
महापौर