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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Railway booking scandal began to open secret

रेलवे बुकिंग कांड के खुलने लगे राज

Sun, 11 Oct 2015 01:14 AM IST
झांसी
झांसी Updated Sun, 11 Oct 2015 01:14 AM IST
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झांसी। ललितपुर रेलवे स्टेशन के बुकिंग कार्यालय में टिकटों की बिक्री में हुए गड़बड़ झाले के राज खुलने लगे हैं। इस कारगुजारी में तीन और कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आ रही है। जांच अंतिम चरण में है।  जल्द ही इस मामले में कार्रवाई की संभावना है।  

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पिछले दिनों ललितपुर रेलवे स्टेशन के बुकिंग कार्यालय में होने वाले निरस्त टिकटों की जांच में ट्रैफिक इंस्पेक्टर एकाउंट ने पाया था कि लंबी दूरी के टिकट को निरस्त कर दूसरा टिकट जारी किया गया है, मगर उसमें टिकट की राशि कम आ रही है। इसके बाद जांच में परतें खुलीं तो सभी दंग रह गए। जांच में सामने आया कि बुकिंग क्लर्क कुसुम लंबी दूरी का टिकट सादा पेज पर छापकर उसे निरस्त करने के बाद दूसरा टिकट कम दूरी का बनाकर यात्री को सौंप देती थी। बचे हुए रुपये कर्मचारी अपने जेब में रख लेती थी। पिछले छह माह में करीब ढाई लाख रुपये का घालमेल किया गया था। 

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सीनियर डीसीएम दुर्गेश दुबे ने इस मामले का पता लगने पर बुकिंग क्लर्क को निलंबित कर दिया था। जांच  कामर्शियल इंस्पेक्टर को सौंप दी थी। विभागीय सूत्रों के अनुसार जांच में तीन और कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं, जो इस मिलीभगत में शामिल हैं। इनमें एक और महिला कर्मी शामिल है, जिसके द्वारा जारी टिकटों में भी करीब पच्चीस हजार रुपये के घालमेल की आशंका जताई गई है। इस प्रकरण में जनसंपर्क अधिकारी नीरज भटनागर ने बताया कि मामला बेहद गंभीर है। जांच के उपरांत जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ  विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। 

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एक महिला कर्मी हो चुकी है बर्खास्त 

ग्वालियर रेलवे स्टेशन के बुकिंग कार्यालय में भी 3 मार्च 2013 को इसी तरह का मामला सामने आया था। प्रेमनगर थाना क्षेत्र के दीनदयाल नगर निवासी महिला बुकिंग क्लर्क पूजा शर्मा को दस नकली टिकटों के साथ पकड़ा गया था। बाद में पूजा व डीजल शेड में कार्यरत उसके भाई के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। रेल प्रशासन ने जांच के उपरांत महिला कर्मी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। यही गलती ललितपुर में पकड़ी गई कुसुम ने दोहराई। गौरतलब है कि दोनों ने ही अपने पिता की मृत्यु के उपरांत अनुकंपा नियुक्ति पायी थी। नौकरी के दो तीन साल के कार्यकाल में ही उन्होंने यह कारगुजारी कर डाली।    

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