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पुलिस की लापरवाही, पीड़ितों पर पड़ रही भारी
ब्यूरो
Updated Wed, 09 Dec 2015 12:57 AM IST
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झांसी। पुलिस की लापरवाही से हादसे में घायल व मृतक के परिजनों को फौरी तौर पर आर्थिक मदद नहीं मिल पा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जनपद में ‘एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल’ तो गठित है, लेकिन यहां पुलिस ने छह साल में एक भी मामला नहीं भेजा है। इससे घायल अथवा मृतक के परिजनों को त्वरित आर्थिक सहायता राशि नहीं मिल पा रही है।
वर्ष 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना के एक मामले में सुनवाई के बाद जिला स्तर पर ‘एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल’ गठित करने के निर्देश दिए थे। पदेन अध्यक्ष जिला जज को बनाया गया था। ट्रिब्यूनल का काम सड़क दुर्घटना में घायल अथवा मृतक के परिजनों को त्वरित आर्थिक सहायता दिलवाना है। ट्रिब्यूनल तक पीड़ित की फरियाद पहुंचाने की जिम्मेदारी संबंधित थाना पुलिस को सौंपी गई थी।
इस व्यवस्था के तहत थाना पुलिस को एफआईआर की कॉपी के साथ घायल की मेडिकल रिपोर्ट अथवा मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट टिब्यूनल को भेजनी होती है। ट्रिब्यूनल अध्यक्ष द्वारा दस्तावेज के आधार पर क्षति का आकलन कर उसका एक चौथाई भाग का तत्काल भुगतान करने की संस्तुति कर पीड़ित को दिलवाई जाती।
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यदि दुर्घटना अज्ञात वाहन से होती है तो आर्थिक मदद जिला प्रशासन की ओर से दिलवाई जाती है। यदि दुर्घटना करने वाले वाहन का इंश्योरेंस होता है तो इंश्योरेंस कंपनी से भुगतान होता है और यदि इंश्योरेंस नहीं है तो वाहन स्वामी को भुगतान करना होता है। जनपद में ट्रिब्यूनल तो गठित हो गया, लेकिन पुलिस ने इस व्यवस्था पर गौर नहीं किया और आज तक ट्रिब्यूनल तक एक भी मामला नहीं भेजा है।
डीआईजी अजय मोहन शर्मा स्वीकारते हैं कि जागरूकता के अभाव में रेंज के किसी भी जिले में एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल काम नहीं कर रहा है। इस वजह से पीड़ितों को त्वरित आर्थिक मदद नहीं मिल पा रही है। इसके प्रति लोगों और पुलिस विभाग को जागरूक करने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि तीनों जिलों के कप्तानों से बात कर कोशिश की जाएगी की जल्द से जल्द हादसों के मामलों को ट्रिब्यूनल तक पहुंचाया जाए, ताकि पीड़ितों को तत्काल मदद मिल सके।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जनपद में ‘एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल’ तो गठित है, लेकिन यहां पुलिस ने छह साल में एक भी मामला नहीं भेजा है। इससे घायल अथवा मृतक के परिजनों को त्वरित आर्थिक सहायता राशि नहीं मिल पा रही है।
वर्ष 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना के एक मामले में सुनवाई के बाद जिला स्तर पर ‘एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल’ गठित करने के निर्देश दिए थे। पदेन अध्यक्ष जिला जज को बनाया गया था। ट्रिब्यूनल का काम सड़क दुर्घटना में घायल अथवा मृतक के परिजनों को त्वरित आर्थिक सहायता दिलवाना है। ट्रिब्यूनल तक पीड़ित की फरियाद पहुंचाने की जिम्मेदारी संबंधित थाना पुलिस को सौंपी गई थी।
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इस व्यवस्था के तहत थाना पुलिस को एफआईआर की कॉपी के साथ घायल की मेडिकल रिपोर्ट अथवा मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट टिब्यूनल को भेजनी होती है। ट्रिब्यूनल अध्यक्ष द्वारा दस्तावेज के आधार पर क्षति का आकलन कर उसका एक चौथाई भाग का तत्काल भुगतान करने की संस्तुति कर पीड़ित को दिलवाई जाती।
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यदि दुर्घटना अज्ञात वाहन से होती है तो आर्थिक मदद जिला प्रशासन की ओर से दिलवाई जाती है। यदि दुर्घटना करने वाले वाहन का इंश्योरेंस होता है तो इंश्योरेंस कंपनी से भुगतान होता है और यदि इंश्योरेंस नहीं है तो वाहन स्वामी को भुगतान करना होता है। जनपद में ट्रिब्यूनल तो गठित हो गया, लेकिन पुलिस ने इस व्यवस्था पर गौर नहीं किया और आज तक ट्रिब्यूनल तक एक भी मामला नहीं भेजा है।
डीआईजी अजय मोहन शर्मा स्वीकारते हैं कि जागरूकता के अभाव में रेंज के किसी भी जिले में एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल काम नहीं कर रहा है। इस वजह से पीड़ितों को त्वरित आर्थिक मदद नहीं मिल पा रही है। इसके प्रति लोगों और पुलिस विभाग को जागरूक करने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि तीनों जिलों के कप्तानों से बात कर कोशिश की जाएगी की जल्द से जल्द हादसों के मामलों को ट्रिब्यूनल तक पहुंचाया जाए, ताकि पीड़ितों को तत्काल मदद मिल सके।