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गोशालाओं में भूख से तड़प रहे गोवंश
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दिगारा स्थित जय श्रीकृष्ण गौशाला में मौजूद गोवंश।
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झांसी। कोरोना संक्रमण के चलते हुए लॉकडाउन से गोवंशों के लिए भी संकट खड़ा हो गया है। गोशालाओं में जहां चारा नहीं पहुंच पा रहा है। वहीं, पशुओं को एक जगह पर बांधे रखने में भी गोवंश आश्रय स्थल संचालकों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि गोशालाओं में गोवंश भूख से तड़प रहे हैं। हरा चारा तो लॉकडाउन के बाद से मवेशियों के लिए मिला ही नहीं है। साथ ही लॉकडाउन के चलते गोवंशों को विचरण करने के लिए छोड़ा नहीं जा रहा। सरकारी इंतजाम भी नदारद नजर आ रहे हैं।
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जैसे-तैसे कर रहे भूसे का इंतजाम
गांव गोरामछिया स्थित सरकारी गोवंश आश्रय स्थल में करीब 300 गोवंशों को संरक्षित किया गया है। इन गोवंशों के लिए चारे का इंतजाम करना ग्राम पंचायत के लिए बड़ी दिक्कत बन रहा है। गोवंश के लिए रोज 100 क्विंटल भूसे की जरूरत होती है, लेकिन वह भी बमुश्किल पूरी हो पा रही है। ग्राम प्रधान ने बताया कि गोवंशों के लिए हरा चारा तो मिल नहीं पा रहा है। पहले आसपास के लोग मदद करने आ जाते थे। सब्जी मंडी से सब्जी भी आ जाती थी, लेकिन अब सब कुछ बंद हो गया है।
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नहीं मिल रहा चारा
बचावली बुजुर्ग स्थित सरकारी गोवंश आश्रय स्थल में पशुओं के लिए चारे का संकट है। यहां करीब 400 से अधिक गोवंश हैं। लॉकडाउन के चलते गोवंश के लिए चारे का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। गोवंश को रोज कम से कम 10 किलो चारा देना होता है, लेकिन लॉकडाउन में वह भी मुनासिब नहीं है। इसके साथ ही गेहूं कटाई होने के बाद गोवंश को खेतों में छोड़ देते थे, लेकिन अब वह भी बंद हो गया है। गोवंश के लिए अपने स्तर से ग्राम प्रधान और गांव के लोग व्यवस्था कर रहे हैं।
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दानवीर भी नहीं पहुंच रहे
गांव दिगारा में संचालित जय श्रीकृष्ण गोशाला में 350 गोवंश संरक्षित है। निजी संस्था द्वारा संचालित गोशाला में भूसे का इंतजाम दानवीरों के जरिए होता है, लेकिन अब वह भी कम हो पा रहा है। लोग भी लॉकडाउन के चलते गोशाला नहीं पहुंच रहे हैं। हाल ही में गांव के लोगों के जरिए भूसे का इंतजाम किया गया है। गोशाला के कैलाश अग्रवाल बताते हैं कि गोशाला को आज तक सरकारी सहायता नहीं मिली, लेकिन विभाग ने यहां आवारा जानवर भी संरक्षित करा दिए हैं। भूसे का इंतजाम किया है, लेकिन पुलिसकर्मी भूसे की गाड़ियों को भी रोक लेते हैं।
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इनका कहना है
गोवंश के लिए चारा ले जाने वाली गाड़ियों को लॉकडाउन से बाहर रखा गया है। इसके लिए लगातार निर्देश जारी हो रहे हैं। गोशालाओं में चारे का इंतजाम कराया जा रहा है। जहां भूसा नहीं हैं, वहां भी भूसा भिजवाया जा रहा है।
डॉ. वाईएस तोमर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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जैसे-तैसे कर रहे भूसे का इंतजाम
गांव गोरामछिया स्थित सरकारी गोवंश आश्रय स्थल में करीब 300 गोवंशों को संरक्षित किया गया है। इन गोवंशों के लिए चारे का इंतजाम करना ग्राम पंचायत के लिए बड़ी दिक्कत बन रहा है। गोवंश के लिए रोज 100 क्विंटल भूसे की जरूरत होती है, लेकिन वह भी बमुश्किल पूरी हो पा रही है। ग्राम प्रधान ने बताया कि गोवंशों के लिए हरा चारा तो मिल नहीं पा रहा है। पहले आसपास के लोग मदद करने आ जाते थे। सब्जी मंडी से सब्जी भी आ जाती थी, लेकिन अब सब कुछ बंद हो गया है।
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नहीं मिल रहा चारा
बचावली बुजुर्ग स्थित सरकारी गोवंश आश्रय स्थल में पशुओं के लिए चारे का संकट है। यहां करीब 400 से अधिक गोवंश हैं। लॉकडाउन के चलते गोवंश के लिए चारे का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। गोवंश को रोज कम से कम 10 किलो चारा देना होता है, लेकिन लॉकडाउन में वह भी मुनासिब नहीं है। इसके साथ ही गेहूं कटाई होने के बाद गोवंश को खेतों में छोड़ देते थे, लेकिन अब वह भी बंद हो गया है। गोवंश के लिए अपने स्तर से ग्राम प्रधान और गांव के लोग व्यवस्था कर रहे हैं।
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दानवीर भी नहीं पहुंच रहे
गांव दिगारा में संचालित जय श्रीकृष्ण गोशाला में 350 गोवंश संरक्षित है। निजी संस्था द्वारा संचालित गोशाला में भूसे का इंतजाम दानवीरों के जरिए होता है, लेकिन अब वह भी कम हो पा रहा है। लोग भी लॉकडाउन के चलते गोशाला नहीं पहुंच रहे हैं। हाल ही में गांव के लोगों के जरिए भूसे का इंतजाम किया गया है। गोशाला के कैलाश अग्रवाल बताते हैं कि गोशाला को आज तक सरकारी सहायता नहीं मिली, लेकिन विभाग ने यहां आवारा जानवर भी संरक्षित करा दिए हैं। भूसे का इंतजाम किया है, लेकिन पुलिसकर्मी भूसे की गाड़ियों को भी रोक लेते हैं।
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इनका कहना है
गोवंश के लिए चारा ले जाने वाली गाड़ियों को लॉकडाउन से बाहर रखा गया है। इसके लिए लगातार निर्देश जारी हो रहे हैं। गोशालाओं में चारे का इंतजाम कराया जा रहा है। जहां भूसा नहीं हैं, वहां भी भूसा भिजवाया जा रहा है।
डॉ. वाईएस तोमर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी