{"_id":"60a428458ebc3e34684ac198","slug":"covid-mneraga-jhansi-news-jhs1951776172","type":"story","status":"publish","title_hn":"गांव के कोरोना ने थामी मनरेगा की रफ्तार, काम मांगने नहीं आ रहे मजदूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गांव के कोरोना ने थामी मनरेगा की रफ्तार, काम मांगने नहीं आ रहे मजदूर
विज्ञापन
झांसी। गांव में फैले कोरोना ने मनरेगा की रफ्तार भी थाम ली है। इसके चलते मजदूर काम मांगने नहीं आ रहे। स्थिति यह है कि मनरेगा से जो कार्य कराए जा रहे थे, वह अब ठप पड़ चुके हैं। सिर्फ प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्य किसी तरह हो रहे हैं।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से पहले बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर महाराष्ट्र, गुजरात, मप्र, दिल्ली से वापस गांव की ओर लौटे। इस बार भी मनरेगा के जरिए जल संरक्षण, जल संचयन, चेकडैम, पुलिया जैसे कार्यों के अलावा डेढ़ दर्जन विभागों से भी प्रस्ताव तैयार कराए गए। चालू वित्तीय वर्ष के लिए 10260 लाख रुपये का बजट आवंटित हो गया लेकिन, पिछले माह से गांव की ओर बढ़ते कोरोना संक्रमण ने मनरेगा की रफ्तार भी पूरी तरह रोक दी।
गांव में तकरीबन हर घर में खांसी-जुकाम एवं बुखार से पीड़ित लोग हैं। घर-घर बीमारी फैल जाने की वजह से मजदूर भी घर से बाहर निकलने से हिचक रहे हैं। इसका असर मनरेगा के कार्यों पर पड़ रहा है। कई कार्य पिछले साल शुरू हुए थे, इनको अब तक पूरा होना था लेकिन, अब मजदूरों की कमी से यह काम आगे नहीं बढ़ पा रहे। बंधी, चेकडैम जैसे अहम काम भी ठप पड़े हैं जबकि इनको मानसून आने से पहले पूरा कराया जाना है। इसी तरह पीडब्यूडी, भूमि संरक्षण, व्यक्तिगत लाभार्थी योजना के भी कई कार्य मजदूर न मिलने से अटक गए। ब्लॉकों में अभी सिर्फ पीएम आवास योजना के ही कार्य किसी तरह पूरे कराए जा रहे हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल-मई के बीच औसतन सिर्फ छह हजार मजदूर ही काम कर रहे हैं जबकि यह संख्या आम दिनों में करीब 21 हजार के करीब रहती थी। झांसी में पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान 41.63 लाख मानव दिवस सृजित किए गए थे। इस वर्ष इसमें कमी आने की आशंका जताई जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से पहले बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर महाराष्ट्र, गुजरात, मप्र, दिल्ली से वापस गांव की ओर लौटे। इस बार भी मनरेगा के जरिए जल संरक्षण, जल संचयन, चेकडैम, पुलिया जैसे कार्यों के अलावा डेढ़ दर्जन विभागों से भी प्रस्ताव तैयार कराए गए। चालू वित्तीय वर्ष के लिए 10260 लाख रुपये का बजट आवंटित हो गया लेकिन, पिछले माह से गांव की ओर बढ़ते कोरोना संक्रमण ने मनरेगा की रफ्तार भी पूरी तरह रोक दी।
विज्ञापन
गांव में तकरीबन हर घर में खांसी-जुकाम एवं बुखार से पीड़ित लोग हैं। घर-घर बीमारी फैल जाने की वजह से मजदूर भी घर से बाहर निकलने से हिचक रहे हैं। इसका असर मनरेगा के कार्यों पर पड़ रहा है। कई कार्य पिछले साल शुरू हुए थे, इनको अब तक पूरा होना था लेकिन, अब मजदूरों की कमी से यह काम आगे नहीं बढ़ पा रहे। बंधी, चेकडैम जैसे अहम काम भी ठप पड़े हैं जबकि इनको मानसून आने से पहले पूरा कराया जाना है। इसी तरह पीडब्यूडी, भूमि संरक्षण, व्यक्तिगत लाभार्थी योजना के भी कई कार्य मजदूर न मिलने से अटक गए। ब्लॉकों में अभी सिर्फ पीएम आवास योजना के ही कार्य किसी तरह पूरे कराए जा रहे हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल-मई के बीच औसतन सिर्फ छह हजार मजदूर ही काम कर रहे हैं जबकि यह संख्या आम दिनों में करीब 21 हजार के करीब रहती थी। झांसी में पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान 41.63 लाख मानव दिवस सृजित किए गए थे। इस वर्ष इसमें कमी आने की आशंका जताई जा रही है।
विज्ञापन