{"_id":"6682060ccab3e47178011875","slug":"courts-are-tired-of-giving-date-after-date-neither-accused-nor-witnesses-are-found-jhansi-news-c-11-jhs1008-342942-2024-07-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi News: तारीख पर तारीख देकर थक गईं अदालतें, मुल्जिम मिले न गवाहे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi News: तारीख पर तारीख देकर थक गईं अदालतें, मुल्जिम मिले न गवाहे
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जिला अदालत में लंबित तमाम मामले ऐसे हैं, जिनमें कई साल बीत जाने के बाद भी पुलिस न मुल्जिम का पता लगा सकी, न कोई गवाह कोर्ट में हाजिर कर सकी। ऐसे मामलों में अदालतें तारीख पर तारीख देकर थक गईं।
मजबूरन अदालतों को स्थायी वारंट जारी करना पड़ रहा है। तकरीबन हर थाने में ऐसे स्थाई वारंट लंबित हैं। हर माह इनकी संख्या में इजाफा हो रहा है। लंबित आपराधिक मामलों को जल्द निपटाने को लेकर न्यायालयों पर दबाव है लेकिन, दर्जनों मामले ऐसे लंबित हैं, जिनमें 20-25 साल बीत जाने के बाद भी पुलिस न मुल्जिम पेश कर सकी न गवाह।
तारीख आने पर कोर्ट के सामने सिर्फ पत्रावलियां पेश होती हैं। मजबूरन कोर्ट को आगे की तारीख देनी पड़ जाती है। ऐसे मामलों में अब कोर्ट से स्थाई वारंट जारी हो रहे हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कई मामलों में आरोपियों के पते सही नहीं मिलते। इस वजह से उनकी तलाश नहीं हो पाती। अब कोर्ट के सामने पत्रावलियां तभी पेश होंगी जब आरोपी कोर्ट के सम्मुख हाजिर होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। जिला अदालत में लंबित तमाम मामले ऐसे हैं, जिनमें कई साल बीत जाने के बाद भी पुलिस न मुल्जिम का पता लगा सकी, न कोई गवाह कोर्ट में हाजिर कर सकी। ऐसे मामलों में अदालतें तारीख पर तारीख देकर थक गईं।
मजबूरन अदालतों को स्थायी वारंट जारी करना पड़ रहा है। तकरीबन हर थाने में ऐसे स्थाई वारंट लंबित हैं। हर माह इनकी संख्या में इजाफा हो रहा है। लंबित आपराधिक मामलों को जल्द निपटाने को लेकर न्यायालयों पर दबाव है लेकिन, दर्जनों मामले ऐसे लंबित हैं, जिनमें 20-25 साल बीत जाने के बाद भी पुलिस न मुल्जिम पेश कर सकी न गवाह।
विज्ञापन
तारीख आने पर कोर्ट के सामने सिर्फ पत्रावलियां पेश होती हैं। मजबूरन कोर्ट को आगे की तारीख देनी पड़ जाती है। ऐसे मामलों में अब कोर्ट से स्थाई वारंट जारी हो रहे हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कई मामलों में आरोपियों के पते सही नहीं मिलते। इस वजह से उनकी तलाश नहीं हो पाती। अब कोर्ट के सामने पत्रावलियां तभी पेश होंगी जब आरोपी कोर्ट के सम्मुख हाजिर होंगे।
विज्ञापन