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Court: पार्सल न मिलने पर मेघालय और झांसी के डाक अधीक्षकों पर कार्रवाई, उपभोक्ता न्यायालय ने सुनाया फैसला
Wed, 24 Sep 2025 12:59 PM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Wed, 24 Sep 2025 12:59 PM IST
सार
दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता न्यायालय के अध्यक्ष अमर पाल सिंह ने डाक अधीक्षकों पर पार्सल सही पते पर न पहुंचाने पर 20 हजार रुपये का जुर्माना तथा मानसिक कष्ट देने पर 10 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया।
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कोर्ट
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
मेघालय के शिलांग से 40 हजार रुपये का गृहस्थी का सामान न मिलने पर उपभोक्ता न्यायालय ने मेघालय और झांसी के डाक अधीक्षकों पर 30 हजार का जुर्माना लगाया है।
मूल रूप से कानपुर के किदवई नगर व हाल निवासी मिनर्वा के पीछे स्टेट बैंक के पास के सुनील कुमार ने 4 जनवरी 2022 को उपभोक्ता न्यायालय में वाद दायर किया था। बताया था कि उसने 14 अगस्त 2021 को 40 हजार का एक कंसाइनमेंट शिलांग में डाक विभाग से बुक कराया था। उस पार्सल को रघुवीर सिंह के नाम पर झांसी भेजा गया था जो कि उन्हें प्राप्त नहीं हुआ। उसका पार्सल शिलांग से गुवाहटी, कोलकाता, पटना, इलाहबाद, आगरा, लखनऊ, नई दिल्ली, हैदराबाद के रूट से डाक विभाग ने भेजा। हैदराबाद में डिलेवरी कंफर्म भी कर दी, जबकि पार्सल झांसी में रिसीव कराना था।
डाक विभाग के अधीक्षकों ने अपने पक्ष में कहा कि यदि सामान इतना कीमती था तो उसका बीमा कराया जाना चाहिए था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता न्यायालय के अध्यक्ष अमर पाल सिंह ने डाक अधीक्षकों पर पार्सल सही पते पर न पहुंचाने पर 20 हजार रुपये का जुर्माना तथा मानसिक कष्ट देने पर 10 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया। यह धनराशि दो महीने में वादी को प्रदान करनी होगी।
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मूल रूप से कानपुर के किदवई नगर व हाल निवासी मिनर्वा के पीछे स्टेट बैंक के पास के सुनील कुमार ने 4 जनवरी 2022 को उपभोक्ता न्यायालय में वाद दायर किया था। बताया था कि उसने 14 अगस्त 2021 को 40 हजार का एक कंसाइनमेंट शिलांग में डाक विभाग से बुक कराया था। उस पार्सल को रघुवीर सिंह के नाम पर झांसी भेजा गया था जो कि उन्हें प्राप्त नहीं हुआ। उसका पार्सल शिलांग से गुवाहटी, कोलकाता, पटना, इलाहबाद, आगरा, लखनऊ, नई दिल्ली, हैदराबाद के रूट से डाक विभाग ने भेजा। हैदराबाद में डिलेवरी कंफर्म भी कर दी, जबकि पार्सल झांसी में रिसीव कराना था।
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डाक विभाग के अधीक्षकों ने अपने पक्ष में कहा कि यदि सामान इतना कीमती था तो उसका बीमा कराया जाना चाहिए था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता न्यायालय के अध्यक्ष अमर पाल सिंह ने डाक अधीक्षकों पर पार्सल सही पते पर न पहुंचाने पर 20 हजार रुपये का जुर्माना तथा मानसिक कष्ट देने पर 10 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया। यह धनराशि दो महीने में वादी को प्रदान करनी होगी।
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