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संक्रमण काल में योद्धा बनकर जुटे रहे चिकित्सक
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झांसी। कोरोना काल में चिकित्सकों ने लोगों को हौसले और काबिलियत के दम पर बचाया। डॉक्टर कोविड से बचाव के लिए साथ खड़े नजर आए। जांच से लेकर उपचार, काउंसलिंग यहां तक कि मानव संसाधन प्रबंधन के लिए भी डॉक्टरों ने अहम भूमिका निभाई। चिकित्सक की विशेषज्ञता को परे रखकर डॉक्टरों ने मिलकर काम किया। आज डॉक्टर्स डे है। डॉक्टरों ने कोरोना काल के कुछ अनुभव साझा किए हैं।
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17-18 घंटे करते थे काम
मेडिकल कालेज के मेडिसन डिपार्टमेंट में तैनात प्रोफेसर डॉ. जकी सिद्दिकी बताते हैं कि कोविड की पहली लहर में जब झांसी में पहला कोविड का मरीज मिला था। तब न तो बीमारी को लेकर किसी को ज्यादा जानकारी थी, न ही उपयुक्त संसाधन थे। फिर भी पहला मरीज जब अस्पताल से सही होकर गया तो मन को काफी तसल्ली हुई। दूसरी लहर के लिए भी कोई तैयार नहीं था। अचानक से बढ़े मरीजों के उपचार के लिए सारे डॉक्टर एक टीम के रूप में कार्य करने लगे । 17 से18 घंटे काम करने के बाद भी लगता था समय बहुत कम है।
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बिना डरे की सैंपलों की जांच
कोरोना संदिग्ध के सैंपलों की जांच में भी डॉक्टरों ने अहम भूमिका अदा की। माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अध्यक्ष और कोविड-19 लैब की प्रभारी डॉ. नमिता श्रीवास्तव ने बताया कि 8 अप्रैल वर्ष 2020 से अब तक करीब 7.50 लाख की जांच की जा चुकी है। वे बताती हैं कि झांसी मेडिकल कॉलेज में सिर्फ झांसी ही नहीं बल्कि ललितपुर और महोबा के भी सैंपल जांच के लिए आते हैं। कोविड-19 के समय में टीम के साथ बहुत मेहनत से काम किया।
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ताकि न हो संसाधनों का अभाव
प्लास्टिक सर्जन डॉ. सुधीर ने कोविड के समय मेडिकल कॉलेज में मानव संसाधन प्रबंधन के प्रभारी के रूप में कार्य किया। उन्होंने बताया कि कोविड-19 की दूसरी लहर के समय मानव संसाधन का बहुत संकट मंडराया था। कई एजेंसी और संस्था के माध्यम से कर्मचारियों को लिया गया। इसके साथ ही अन्य संसाधनों के लिए भी जुटकर काम किया।
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मंडलायुक्त ने दी सभी डॉक्टरों को बधाई
मंडलायुक्त अजय शंकर पांडेय का कहना है कि चिरकाल से ही चिकित्सकों ने अपनी सेवाओं के माध्यम से लोगों के कष्टों को दूर करने का कार्य किया है। चिकित्सकों की सेवाएं तब और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं जब कोई महामारी भयंकर रूप धारण कर ले। विगत कुछ महीनों में चिकित्सकों ने अपनी लगन, निष्ठा व समर्पण भाव से कोविड-19 महामारी से संक्रमित लोगों के उपचार में अपनी परवाह किये बगैर लोगों की जान बचाने में अथक परिश्रम किया है। इस के लिए समाज व प्रशासन सदैव उनका आभारी रहेगा।
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17-18 घंटे करते थे काम
मेडिकल कालेज के मेडिसन डिपार्टमेंट में तैनात प्रोफेसर डॉ. जकी सिद्दिकी बताते हैं कि कोविड की पहली लहर में जब झांसी में पहला कोविड का मरीज मिला था। तब न तो बीमारी को लेकर किसी को ज्यादा जानकारी थी, न ही उपयुक्त संसाधन थे। फिर भी पहला मरीज जब अस्पताल से सही होकर गया तो मन को काफी तसल्ली हुई। दूसरी लहर के लिए भी कोई तैयार नहीं था। अचानक से बढ़े मरीजों के उपचार के लिए सारे डॉक्टर एक टीम के रूप में कार्य करने लगे । 17 से18 घंटे काम करने के बाद भी लगता था समय बहुत कम है।
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बिना डरे की सैंपलों की जांच
कोरोना संदिग्ध के सैंपलों की जांच में भी डॉक्टरों ने अहम भूमिका अदा की। माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अध्यक्ष और कोविड-19 लैब की प्रभारी डॉ. नमिता श्रीवास्तव ने बताया कि 8 अप्रैल वर्ष 2020 से अब तक करीब 7.50 लाख की जांच की जा चुकी है। वे बताती हैं कि झांसी मेडिकल कॉलेज में सिर्फ झांसी ही नहीं बल्कि ललितपुर और महोबा के भी सैंपल जांच के लिए आते हैं। कोविड-19 के समय में टीम के साथ बहुत मेहनत से काम किया।
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ताकि न हो संसाधनों का अभाव
प्लास्टिक सर्जन डॉ. सुधीर ने कोविड के समय मेडिकल कॉलेज में मानव संसाधन प्रबंधन के प्रभारी के रूप में कार्य किया। उन्होंने बताया कि कोविड-19 की दूसरी लहर के समय मानव संसाधन का बहुत संकट मंडराया था। कई एजेंसी और संस्था के माध्यम से कर्मचारियों को लिया गया। इसके साथ ही अन्य संसाधनों के लिए भी जुटकर काम किया।
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मंडलायुक्त ने दी सभी डॉक्टरों को बधाई
मंडलायुक्त अजय शंकर पांडेय का कहना है कि चिरकाल से ही चिकित्सकों ने अपनी सेवाओं के माध्यम से लोगों के कष्टों को दूर करने का कार्य किया है। चिकित्सकों की सेवाएं तब और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं जब कोई महामारी भयंकर रूप धारण कर ले। विगत कुछ महीनों में चिकित्सकों ने अपनी लगन, निष्ठा व समर्पण भाव से कोविड-19 महामारी से संक्रमित लोगों के उपचार में अपनी परवाह किये बगैर लोगों की जान बचाने में अथक परिश्रम किया है। इस के लिए समाज व प्रशासन सदैव उनका आभारी रहेगा।