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कोरोना संक्रमित माओं ने जन्मे स्वस्थ बच्चे
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corona posative mother born helthy baby
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झांसी। कोविड दौर में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में अब तक 35 मरीजों की डिलीवरी हो चुकी है। खास बात ये है कि प्रसव कराते हुए 11 महिला डॉक्टर और पांच कर्मचारी कोरोना संक्रमित हो गए लेकिन स्टाफ ने सुरक्षा बरतते हुए एक भी नवजात को पॉजिटिव नहीं होने दिया।
कोरोना वायरस के दौर में गर्भवतियों की नर्सिंगहोमों ने पहले जांच कराई। जांच में जब रिपोर्ट निगेटिव आ गई तब ही मरीज का प्रसव कराया। वहीं, जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई, उनको महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। कोविड दौर में मेडिकल कॉलेज में 50 गर्भवती महिलाएं भर्ती हुईं। इनमें से 35 की डिलीवरी हुई, जिसमें 15 के सिजेरियन और 20 के सामान्य प्रसव कराए गए। इस दौरान एक भी बच्चा कोरोना संक्रमित नहीं हुआ। कोविड टेस्ट कराने पर सभी नवजातों की रिपोर्ट निगेटिव आई। हालांकि, डिलीवरी कराते हुए 11 महिला डॉक्टर, तीन स्टाफ नर्स और दो आया जरूर कोरोना पॉजिटिव हो गईं।
बच्चा छोड़ भाग गए
डेढ़-दो महीने पहले मेडिकल कॉलेज में एक गर्भवती महिला भर्ती हुई थी। उस समय कोरोना को लेकर लोगों में बहुत अधिक खौफ था। गर्भवती महिला की डिलेवरी के पहले कोरोना जांच कराई गई। जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। इसके बाद गर्भवती को कोविड अस्पताल में भर्ती कराकर प्रसव कराया गया। मगर नवजात के जन्म के बाद स्टाफ ने परिजनों को ढूंढा तो पता चला कि वह भाग गए हैं। बाद में पुलिस को सूचना देकर फाइल में दर्ज फोन नंबर, पते के आधार पर परिजनों को बुलाकर बच्चा सुपुर्द किया गया।
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कोविड के दौर में डॉक्टरों और स्टाफ ने मरीजों के इलाज में खुद को समर्पित कर रखा है। मेडिकल कॉलेज के कोविड हॉस्पिटल में अब तक 50 गर्भवती महिलाएं भर्ती हो चुकी हैं, इनमें से 35 का प्रसव कराया गया है। प्रसव के बाद नवजात संक्रमित न हो जाए, इसका पूरा ध्यान रखा गया। - डॉ. संजय शर्मा, गायनी विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
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कोरोना वायरस के दौर में गर्भवतियों की नर्सिंगहोमों ने पहले जांच कराई। जांच में जब रिपोर्ट निगेटिव आ गई तब ही मरीज का प्रसव कराया। वहीं, जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई, उनको महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। कोविड दौर में मेडिकल कॉलेज में 50 गर्भवती महिलाएं भर्ती हुईं। इनमें से 35 की डिलीवरी हुई, जिसमें 15 के सिजेरियन और 20 के सामान्य प्रसव कराए गए। इस दौरान एक भी बच्चा कोरोना संक्रमित नहीं हुआ। कोविड टेस्ट कराने पर सभी नवजातों की रिपोर्ट निगेटिव आई। हालांकि, डिलीवरी कराते हुए 11 महिला डॉक्टर, तीन स्टाफ नर्स और दो आया जरूर कोरोना पॉजिटिव हो गईं।
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बच्चा छोड़ भाग गए
डेढ़-दो महीने पहले मेडिकल कॉलेज में एक गर्भवती महिला भर्ती हुई थी। उस समय कोरोना को लेकर लोगों में बहुत अधिक खौफ था। गर्भवती महिला की डिलेवरी के पहले कोरोना जांच कराई गई। जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। इसके बाद गर्भवती को कोविड अस्पताल में भर्ती कराकर प्रसव कराया गया। मगर नवजात के जन्म के बाद स्टाफ ने परिजनों को ढूंढा तो पता चला कि वह भाग गए हैं। बाद में पुलिस को सूचना देकर फाइल में दर्ज फोन नंबर, पते के आधार पर परिजनों को बुलाकर बच्चा सुपुर्द किया गया।
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कोविड के दौर में डॉक्टरों और स्टाफ ने मरीजों के इलाज में खुद को समर्पित कर रखा है। मेडिकल कॉलेज के कोविड हॉस्पिटल में अब तक 50 गर्भवती महिलाएं भर्ती हो चुकी हैं, इनमें से 35 का प्रसव कराया गया है। प्रसव के बाद नवजात संक्रमित न हो जाए, इसका पूरा ध्यान रखा गया। - डॉ. संजय शर्मा, गायनी विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।