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कोरोना का नया स्ट्रेन खतरनाक, तेजी से गिराता ऑक्सीजन लेवल
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झांसी। यदि आपका ऑक्सीजन लेवल 94 प्रतिशत से कम है और एक मिनट में 24 से ज्यादा बार सांसें भर रहे हैं तो सावधान हो जाइए। आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की जरूरत है। कोरोना के नए स्ट्रेन में ऑक्सीजन लेवल तेजी से गिरता है। शुरूआत में हल्के लक्षण चंद घंटों में कब गंभीर हो जाएं, किसी को नहीं पता। इसलिए हालत गंभीर होने से पहले ही उपचार शुरू कर देना चाहिए।
कोरोना संक्रमण काल में किसी को तो हल्की सी छींक तनाव में ला देती है तो कुछ ऐसे भी हैं जो हालत खतरे के निशान तक पहुंच जाने के बावजूद नहीं चेतते। कोरोना लाइलाज बीमारी नहीं है। थोड़ी सी सावधानी बरतकर इससे ठीक हुआ जा सकता है। झांसी के डॉक्टरों के मुताबिक कोरोना संक्रमण की चपेट में आने वाले 99 प्रतिशत मरीज ठीक हो रहे हैं। मर वो लोग रहे हैं, जो देर से अस्पताल पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि गले में खरास, हल्की खांसी, बुखार के साथ सांस फूले तो कोरोना हो सकता है। ऐसे में जांच कराएं। यदि ऑक्सीजन लेवल 94 के नीचे पहुंच जाए तो घर पर रहकर दवाइयों के सहारे कतई इलाज न करें। तुरंत अस्पताल में पहुुंचकर भर्ती हो जाएं। ऑक्सीजन लेवल 90 के नीचे पहुंचने पर तो आईसीयू की जरूरत पड़ जाती है।
ये बोले डॉक्टर
गले में खरास, हल्की खांसी, बुखार के साथ सांस फूले तो तुरंत ऑक्सीजन की जांच कराकर डॉक्टर से संपर्क करें। 90 से नीचे तो ऑक्सीजन बिल्कुल नहीं जानी चाहिए। इससे पहले ही डॉक्टर को दिखाएं। कोरोना के नए स्ट्रेन में एक दिन में ही ऑक्सीजन लेवल 90 से 80 तक पहुंच रहा है। जबकि, पहले ऐसा तीन से चार दिन में होता था। - डॉ. डीएस गुप्ता, जिला अस्पताल।
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सांस का औसत 24 बार प्रति मिनट होता है। यदि कोई व्यक्ति की सांस फूल रही है और वह 30 से अधिक बार सांस ले और छोड़ रहा है तो यह गंभीर स्थिति है। ऑक्सीजन लेवल 94 से कम नहीं होना चाहिए। यदि ऐसा है तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। बीमारी से डरें नहीं। डरेंगे तो बीमारी से ठीक होने की रफ्तार कम हो जाएगी। - डॉ. अरविंद कनकने, मेडिकल कॉलेज।
कोरोना के नए स्ट्रेन में पेट में ऐंठन, लूज मोशन, सिरदर्द, कमजोरी होना आदि सामान्य लक्षण वाले कई मरीज भी सामने आए हैं। ऐसे में ये लक्षण होने पर भी कोरोना की जांच कराएं। देखा जा रहा है कि लोग लक्षण होने के बावजूद ये सोचते हैं कि उन्हें कोरोना नहीं हो सकता। जितनी जल्दी बीमारी पकड़ में आएगी, उतना ही गंभीर होने से बच सकेंगे। - डॉ. अमित सहगल, मेडिकल कॉलेज।
मेडिकल कॉलेज में कोरोना के गंभीर अवस्था में आने वाले अधिकांश मरीजों का समय पर उपचार शुरू हो जाता तो स्थिति गंभीर नहीं होती। इसलिए ध्यान रखें कि कोविड के जैसे ही शुरूआती लक्षण हों तो तुरंत जांच कराएं। पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन जांचते रहें। 94 प्रतिशत से नीचे जाए तो अस्पताल में आकर भर्ती हो जाएं। - डॉ. विनय कुमार, मेडिकल कॉलेज।
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कोरोना संक्रमण काल में किसी को तो हल्की सी छींक तनाव में ला देती है तो कुछ ऐसे भी हैं जो हालत खतरे के निशान तक पहुंच जाने के बावजूद नहीं चेतते। कोरोना लाइलाज बीमारी नहीं है। थोड़ी सी सावधानी बरतकर इससे ठीक हुआ जा सकता है। झांसी के डॉक्टरों के मुताबिक कोरोना संक्रमण की चपेट में आने वाले 99 प्रतिशत मरीज ठीक हो रहे हैं। मर वो लोग रहे हैं, जो देर से अस्पताल पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि गले में खरास, हल्की खांसी, बुखार के साथ सांस फूले तो कोरोना हो सकता है। ऐसे में जांच कराएं। यदि ऑक्सीजन लेवल 94 के नीचे पहुंच जाए तो घर पर रहकर दवाइयों के सहारे कतई इलाज न करें। तुरंत अस्पताल में पहुुंचकर भर्ती हो जाएं। ऑक्सीजन लेवल 90 के नीचे पहुंचने पर तो आईसीयू की जरूरत पड़ जाती है।
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ये बोले डॉक्टर
गले में खरास, हल्की खांसी, बुखार के साथ सांस फूले तो तुरंत ऑक्सीजन की जांच कराकर डॉक्टर से संपर्क करें। 90 से नीचे तो ऑक्सीजन बिल्कुल नहीं जानी चाहिए। इससे पहले ही डॉक्टर को दिखाएं। कोरोना के नए स्ट्रेन में एक दिन में ही ऑक्सीजन लेवल 90 से 80 तक पहुंच रहा है। जबकि, पहले ऐसा तीन से चार दिन में होता था। - डॉ. डीएस गुप्ता, जिला अस्पताल।
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सांस का औसत 24 बार प्रति मिनट होता है। यदि कोई व्यक्ति की सांस फूल रही है और वह 30 से अधिक बार सांस ले और छोड़ रहा है तो यह गंभीर स्थिति है। ऑक्सीजन लेवल 94 से कम नहीं होना चाहिए। यदि ऐसा है तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। बीमारी से डरें नहीं। डरेंगे तो बीमारी से ठीक होने की रफ्तार कम हो जाएगी। - डॉ. अरविंद कनकने, मेडिकल कॉलेज।
कोरोना के नए स्ट्रेन में पेट में ऐंठन, लूज मोशन, सिरदर्द, कमजोरी होना आदि सामान्य लक्षण वाले कई मरीज भी सामने आए हैं। ऐसे में ये लक्षण होने पर भी कोरोना की जांच कराएं। देखा जा रहा है कि लोग लक्षण होने के बावजूद ये सोचते हैं कि उन्हें कोरोना नहीं हो सकता। जितनी जल्दी बीमारी पकड़ में आएगी, उतना ही गंभीर होने से बच सकेंगे। - डॉ. अमित सहगल, मेडिकल कॉलेज।
मेडिकल कॉलेज में कोरोना के गंभीर अवस्था में आने वाले अधिकांश मरीजों का समय पर उपचार शुरू हो जाता तो स्थिति गंभीर नहीं होती। इसलिए ध्यान रखें कि कोविड के जैसे ही शुरूआती लक्षण हों तो तुरंत जांच कराएं। पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन जांचते रहें। 94 प्रतिशत से नीचे जाए तो अस्पताल में आकर भर्ती हो जाएं। - डॉ. विनय कुमार, मेडिकल कॉलेज।