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मेंटल स्ट्रेस दे रहा कोरोना, रात को नींद भी नहीं आ रही, चिड़चिड़े हुए लोग
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झांसी। कोरोना से लड़कर जीवन दान पा चुके लोगों को अब कोरोना मेंटल स्ट्रेस दे रहा है। लोगों को रात में देर तक नींद नहीं आ रही। उनकी याददाश्त कमजोर हो रही है। पेट दर्द, घुटना दर्द, पैर दर्द और सिरदर्द की शिकायत इनमें आम हो रही है। लोग इस तनाव से घिरते जा रहे हैं कि कहीं उन्हें फिर से कोरोना तो नहीं हो रहा है। मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग की ओपीडी में महीने में ऐसे 25 से 30 केस डॉक्टरों के पास आ रहे हैं।
कोरोना ने वर्ष 2019 से लेकर 2021 तक कई लोगों की जान ली। वहीं कई कोरोना से लड़कर जिंदगी की जंग जीत गए। अब इन्हीं में से कई मरीज मेंटल स्ट्रेस (मानसिक तनाव) से घिर रहे हैं। जो लोग शुगर और ब्लड प्रेशर का शिकार हैं, उनकी यह बीमारी बार-बार घट-बढ़ रही है। मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग के आचार्य प्रोफेसर डॉ. रामबाबू ने बताया कि इन दिनों ओपीडी में हर महीने 25-30 केस आ रहे हैं। इनमें जो लोग गंभीर रूप से कोरोना की चपेट में आए थे, उन लोगों को ज्यादा दिक्कत हो रही है।
शरीर में जगह-जगह दर्द, अनिद्रा सहित कई दिक्कतों से इनमें मानसिक तनाव पैदा हो रहा है। इन्हें दोबारा कोरोना होने का भय भी सता रहा है। वह बार-बार अपनी कोविड जांच करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे मरीजों को दवाइयों के साथ-साथ काउंसलिंग भी दी जा रही हैं कि कोरोना को लेकर दिल और दिमाग में भ्रम न पालें। प्रोफेसर रामबाबू ने बताया कि जिन लोगों को दोनों वैक्सीन लग चुकी है उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ी है।
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उधर, मेडिकल कॉलेज की प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमा जे शोभने ने बताया कि ओपीडी में आने वाली महिलाओं में ऐसी समस्या नहीं है लेकिन कोरोना के दौरान घर में हुई किसी की मौत और इलाज में हुए खर्च को लेकर आई आर्थिक समस्या के कारण तमाम महिलाएं कई तरह की परेशानी बता रही हैं।
ये हो रही परेशानी
-शरीर में बार-बार अलग-अलग अंगों में दर्द होना।
-रात को देर तक नींद नहीं आ रही, दिन में थकावट रहना।
-याददाश्त में फर्क पड़ना, काम में मन न लगना।
-मानिसक रूप से परेशानी महसूस करना।
-शुगर के रोगियों का शुगर घटना-बढ़ना।
-बार-बार ये सोचना कि वैक्सीन का असर नहीं हुआ।
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कोरोना ने वर्ष 2019 से लेकर 2021 तक कई लोगों की जान ली। वहीं कई कोरोना से लड़कर जिंदगी की जंग जीत गए। अब इन्हीं में से कई मरीज मेंटल स्ट्रेस (मानसिक तनाव) से घिर रहे हैं। जो लोग शुगर और ब्लड प्रेशर का शिकार हैं, उनकी यह बीमारी बार-बार घट-बढ़ रही है। मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग के आचार्य प्रोफेसर डॉ. रामबाबू ने बताया कि इन दिनों ओपीडी में हर महीने 25-30 केस आ रहे हैं। इनमें जो लोग गंभीर रूप से कोरोना की चपेट में आए थे, उन लोगों को ज्यादा दिक्कत हो रही है।
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शरीर में जगह-जगह दर्द, अनिद्रा सहित कई दिक्कतों से इनमें मानसिक तनाव पैदा हो रहा है। इन्हें दोबारा कोरोना होने का भय भी सता रहा है। वह बार-बार अपनी कोविड जांच करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे मरीजों को दवाइयों के साथ-साथ काउंसलिंग भी दी जा रही हैं कि कोरोना को लेकर दिल और दिमाग में भ्रम न पालें। प्रोफेसर रामबाबू ने बताया कि जिन लोगों को दोनों वैक्सीन लग चुकी है उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ी है।
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उधर, मेडिकल कॉलेज की प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमा जे शोभने ने बताया कि ओपीडी में आने वाली महिलाओं में ऐसी समस्या नहीं है लेकिन कोरोना के दौरान घर में हुई किसी की मौत और इलाज में हुए खर्च को लेकर आई आर्थिक समस्या के कारण तमाम महिलाएं कई तरह की परेशानी बता रही हैं।
ये हो रही परेशानी
-शरीर में बार-बार अलग-अलग अंगों में दर्द होना।
-रात को देर तक नींद नहीं आ रही, दिन में थकावट रहना।
-याददाश्त में फर्क पड़ना, काम में मन न लगना।
-मानिसक रूप से परेशानी महसूस करना।
-शुगर के रोगियों का शुगर घटना-बढ़ना।
-बार-बार ये सोचना कि वैक्सीन का असर नहीं हुआ।