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कॉपियां अधूरी, कम नंबर पाए, अच्छे रिजल्ट के लिए अब मेहनत करेंगे पूरी

Tue, 29 Mar 2022 12:06 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 29 Mar 2022 12:06 AM IST
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Copies are incomplete, get less marks, now will work hard for good results
झांसी। कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई होने से बच्चे कॉपियों में पूरा काम नहीं कर पाए। वहीं अबकी जैसे-तैसे बच्चों ने वार्षिक परीक्षा दी लेकिन अब परीक्षाओं में नंबर कम आए। बच्चों को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया गया है लेकिन अब नए सत्र के लिए स्कूल और अभिभावक मिलकर बच्चों को मोटीवेट करेंगे ताकि वे फिर से शत-प्रतिशत रिजल्ट दे सकें।
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पिछले सत्र में ऑनलाइन कक्षाएं संचालित होने के कारण बच्चों ने पढ़ाई और परीक्षा को गंभीरता से नहीं लिया। साल भर ऑनलाइन कक्षाएं संचालित हुई लेकिन परीक्षाएं ऑफलाइन हुईं। दो सालों से ऑनलाइन पढ़ रहे बच्चों की यह मानसिकता बन गई थी कि इस वर्ष भी वार्षिक परीक्षा ऑनलाइन होगी। वार्षिक परीक्षा के कुछ समय पहले जब विद्यालय खुले तो अधिकांश बच्चों के कॉपियों में काम भी पूरे नहीं थे। शिक्षकों ने बताया कि कक्षाओं में बैठाकर ही बच्चों का पहले तो काम पूरा करवाया गया। हालांकि ऑनलाइन कक्षाओं में पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन फिर भी बच्चों की शिक्षा का स्तर काफी नीचे गिरा था। वार्षिक परीक्षा के अंक पत्र में विद्यार्थियों का प्राप्तांक प्रतिशत बहुत कम रहा।
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हर विद्यालय के लगभग 60 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों के रिजल्ट का यही हाल है। शिक्षक आपस में बैठक कर यह प्लानिंग कर रहे हैं कि पिछले दो सालों में बच्चों की शिक्षा में जो कमी आई है उसकी भरपाई इस नए सत्र में करनी ही है। विद्यालय प्रशासन लगातार बच्चों के अभिभावकों से मिलकर उनको बच्चों की स्थिति समझा रहे हैं कि बच्चे को इतने कम अंकों के साथ अगली कक्षा में भेज तो रहे हैं लेकिन अगली कक्षा की मेहनत बहुत ज्यादा होगी इसके लिए बच्चा, अभिभावक और शिक्षक तीनों को तैयार रहना पड़ेगा।
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ऑनलाइन पढ़ाई से कई बच्चों को मुश्किल आई अब अगली कक्षा में बच्चों के साथ एक नई शुरूआत की जाएगी। - सैमसन जैकब, प्रधानाचार्य, जैकब स्कूल
जब स्कूल खुले तब आधे से ज्यादा बच्चों का कॉपियों में काम ही पूरा नहीं था। बच्चों में स्कूल आने पर उमंग था लेकिन परीक्षाओं कई बच्चों का प्रदर्शन बहुत खराब रहा। - दिपाली तिवारी, शिक्षिका
अगली कक्षा में बच्चों को पढ़ाने से पहले उनकी शिक्षा का स्तर जांचेंगे। एक दो माह बच्चों को पुरानी कक्षाओं के विषय पढ़ाकर फिर अगली कक्षा का पढ़ाया जाएगा। - आरती प्रजापति, शिक्षिका

बच्चों ने भी वार्षिक परीक्षा में स्वयं का आंकलन कर लिया है। अधिकांश बच्चे खुद से अगली कक्षा के लिए भी खुद को मानसिक तौर पर तैयार कर रहे हैं। - श्रद्धा कृष्णा
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