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चूल्हे पर खाना पकाने से बुंदेलखंड में कई महिलाएं हो गईं सीओपीडी का शिकार

Tue, 15 Nov 2022 11:49 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 15 Nov 2022 11:49 PM IST
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COPD day BU women
झांसी। वैसे तो सीओपीडी की बीमारी 40 साल की उम्र के बाद ही होती है मगर बुंदेलखंड में 20 से 30 प्रतिशत युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं, जिनकी उम्र 30 से 35 साल के बीच होती है। इसका मुख्य कारण धूम्रपान, प्रदूषित वातावरण के अलावा महिलाओं का अभी भी चूल्हे में खाना पकाना है। चूल्हे से निकलने वाला धुआं महिलाओं को इस बीमारी की चपेट में ला देता है। ये कहना है मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मधुर्मय शास्त्री का।
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सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) लंबे समय तक बनी रहने वाली गंभीर बीमारी है। डॉ. मधुर्मय ने बताया कि इस बीमारी में मरीज को सांस लेने में दिक्कत आती है और शरीर में ऑक्सीजन पूरी तरह नहीं पहुंच पाती है। हर पांच सीओपीडी मरीजों में से दो को लंग अटैक का खतरा बना रहता है। ये अटैक आने पर मरीज को वेंटिलेटर पर भर्ती करना पड़ता है। एक बार अटैक आने पर दूसरी बार ऐसा होने का खतरा ढाई गुना बढ़ जाता है। दुनिया में सीओपीडी मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक भारत में इसके करीब तीन करोड़ मरीज हैं। देश में हर दस सेकंड में एक सीओपीडी रोगी की मौत हो जाती है। मौजूदा समय में मेडिकल कॉलेज की चेस्ट रोग विभाग की ओपीडी में 100 में 30 से 40 सीओपीडी के रोगी आते हैं। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. डीएस गुप्ता ने बताया कि मौजूदा समय में सीओपीडी का कोई स्थायी उपचार नहीं है। दवाओं और जीवनशैली में बदलाव करके ही इसको नियंत्रित रखा जा सकता है।
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ये हैं लक्षण
- लंबे समय तक खांसी होना।
- खांसी के साथ बलगम आना।
- सांस लेने पर आवाज आना।
- छाती में जकड़न।
- होंठ या नाखूनों की जड़ में नीलापन।
उज्ज्वला योजना: 1.85 लाख को मिले थे गैस कनेक्शन, 50 हजार ने दोबारा नहीं भरवाया सिलिंडर
केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना के तहत जिले में करीब 1.85 लाख लाभार्थियों को गैस सिलिंडर और चूल्हे दिए गए थे। गांव-गांव व्यापक अभियान चलाकर इसके लिए लाभार्थियों को चिह्नित किया गया। योजना के पीछे उद्देश्य था कि गांवों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को चूल्हे पर खाना न बनाना पड़े। 2016 में जब योजना शुरू हुई, तब सिलेंडर की कीमत साढ़े चार सौ रुपये के आसपास थी। अब इसकी कीमत 1087 हो गई है। ऐसे में जिले के करीब 50 हजार लाभार्थियों ने दोबारा सिलिंडर नहीं भरवाया है।
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केस-1
30 साल की युवती हुई सीओपीडी का शिकार
मेडिकल कॉलेज में हुई जांच में एक 30 साल की युवती सीओपीडी की रोगी मिली। डॉक्टर को युवती ने बताया कि घर पर गैस सिलेंडर नहीं है। इसलिए वो पिछले 15 सालों से चूल्हे पर खाना बना रही है। डॉक्टर ने दवाएं देने के बाद चूल्हे पर खाना न बनाने की सलाह दी है।

केस-2
20 साल से पी रहा बीड़ी, अब बीमारी से घिरा
मेडिकल कॉलेज में हुई जांच में सीपरी बाजार का 35 वर्षीय युवक सीओपीडी का शिकार मिला। पूछताछ करने पर डॉक्टर को उसने बताया कि वो रोजाना 20-22 बीड़ी पी जाता है। डॉक्टर ने कहा कि बीस साल तक रोजाना 20 बीड़ी पीने से सीओपीडी की बीमारी हो जाती है।
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