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झांसी: ट्रेन से उतारी गईं नन और किशोरियों के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठे कांग्रेसी, भारी पुलिस बल तैनात

Fri, 26 Mar 2021 05:20 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Fri, 26 Mar 2021 05:20 PM IST
सार

  • किसी पर कोई कार्रवाई न होने से कांग्रेसी नाराज
  • धर्मांतरण के शक में ट्रेन से उतारी गई थी नन और किशोरी
  • जांच पूरी न होने तक धरना जारी

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Congress leader on strike demanding action in the case of nuns and teenagers who were taken off the train
नन और किशोरियों के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठे कांग्रेसी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झांसी में धर्मांतरण के शक में ट्रेन से उतारी गईं नन और किशोरियों के मामले में अब तक कार्रवाई न होने से नाराज कांग्रेसी स्टेशन परिसर में धरने पर बैठ गए। कार्यकर्ताओं ने कहा कि अब तक किसी पर कोई कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। जांच पूरी न होने तक सभी धरना देंगे। धरना प्रदर्शन को देखते हुए स्टेशन पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

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बता दें कि उत्कल एक्सप्रेस से जीआरपी द्वारा उतारे जाने के बाद दो नन और दो किशोरियों को साढ़े तीन घंटे पुलिस के ऊलजलूल सवालों से जूझना पड़ा। उनकी एक नहीं सुनी गई, न ही उनके दस्तावेजों को सही माना गया। केरल के मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृहमंत्री को लिखे पत्र में मामले सख्त आपत्ति जताई। पुलिस एक के बाद एक सवाल दागे जा रही थी, जैसे वे कोई पेशेवर अपराधी हों। वे अपनी बेगुनाही के सबूत देती रहीं, लगातार अनसुनी हुई। 
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खाकी वालों के इस रवैये से त्रस्त नन और किशोरी सहम गईं। यही नहीं, इतनी लंबी पूछताछ नियमों को ताक पर रख कर होती रही। इस दौरान कोई महिला पुलिसकर्मी वहां मौजूद नहीं रही। पुलिसिया उत्पीड़न की जानकारी लखनऊ तक पहुंची। वहां से एक आला पुलिस अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें बेगुनाह मानते हुए रात 11 बजे छोड़ा गया।
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केरल के मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री को लिखा पत्र
हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से ओडिशा के राउरकेला जा रहीं नन और किशोरी ताजिंदगी यह वाकया नहीं भूलेंगी। अचानक उन्हें झांसी स्टेशन पर उतारकर थाने में बैठा दिया गया। आरोप लगाया कि किशोरियों को धर्मांतरण के लिए ले जाया जा रहा है। घटनाक्रम पर आपत्ति जताते हुए केरल के मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री को पत्र लिखा था, जिस पर सक्रिय हुए गृह मंत्रालय ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए जीआरपी से रिपोर्ट तलब की है। मुख्यमंत्री द्वारा गृहमंत्री को भेजे गए पत्र में इस बात का जिक्र किया गया है कि चारों महिलाओं से बगैर महिला पुलिस कर्मी की मौजूदगी में पूछताछ की गई। चारों ने अपने पहचान पत्र दिखाए, परंतु नहीं माने गए। केरल के मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री से इस मामले में कार्रवाई की बात कही है।

गौरतलब है कि 19 मार्च को उत्कल एक्सप्रेस के कोच नंबर बी-2 में नन लीविया थोमस व हेमलता सवार हुई थीं। उनके साथ दो किशोरियां श्वेता व बीतरंग भी थीं। अचानक शाम 7.30 बजे चारों को झांसी स्टेशन पर जीआरपी ने उतार लिया था। पुलिस उन्हें थाने ले आई और धर्मांतरण को लेकर पूछताछ शुरू कर दी। तब उन्हें बताया गया कि एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने शिकायत है कि दो किशोरियों को धर्मांतरण के लिए ले जाया जा रहा है।

उन्होंने पुलिस को बताया कि ऐसा कोई मामला नहीं है। वे दिल्ली की एक चर्च से ट्रेनिंग करके लौट रहीं हैं और इसके उनके पास प्रमाण भी हैं। उन्होंने प्रमाण पत्र भी दिखाए। साथ ही आधार कार्ड भी पुलिस के सामने रखे। बावजूद, पुलिस लगातार नजरंदाज करती रही और सवाल दागती रही। उन्होंने व्हाट्सएप के जरिए भी प्रपत्र मंगाए और पुलिस को दिखाए, परंतु ध्यान नहीं दिया गया।

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