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कॉलेजों को संसाधनों की करानी होगी जीओ टैगिंग
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 27 May 2017 01:24 AM IST
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय
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डिग्री कॉलेजों के लिए संबद्धता पाना अब आसान नहीं होगा। इसके लिए नियम कड़े हो गए हैं। अब कॉलेजों को बिल्डिंग, स्मार्ट क्लास रूम, लाइब्रेरी, लैब समेत विभिन्न संसाधनों की जीओ टैगिंग करानी होगी, ताकि ऑनलाइन सत्यापन किया जा सके। इससे फर्जीवाड़े पर किसी हद तक अंकुश लग सकता है ।
मानकों की कमी के बावजूद अब तक कॉलेज सांठगांठ करके संबद्धता हासिल कर लेते थे। इससे छात्र-छात्राओं को सुविधाएं नहीं मिल पाती थी और पढ़ाई की गुणवत्ता भी दिनों दिन कम होती जा रही थी। इसमें सुधार करने के लिए अब शासन ने सभी कॉलेजों की जीओ टैगिंग कराने का फैसला लिया है। हाल ही में लखनऊ में हुई उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक में इसी सत्र से जीओ टैगिंग को प्रभावी करने का निर्णय हुआ है। इसके चलते अब कॉलेजों को जीओ टैगिंग पोर्टल पर लाइब्रेरी, क्लास, विभाग, लैब आदि का ब्योरा अपलोड करना होगा। ब्योरा अपलोड होने के बाद ऑनलाइन ही इसे देखा जा सकेगा। इससे कागजों में खेल करके कॉलेज क्लास, लैब नहीं दर्शा पाएंगे।
हर क्लास में लगेंगे कैमरे
शासन उच्च शिक्षण संस्थानों में हर क्लास में कैमरे लगाने पर विचार कर रहा है। बैठक में कैमरों को सेटेलाइट से जोड़ने पर भी चर्चा हुई। कैमरे लगने के बाद सभी कॉलेजों से शिक्षकों के पढ़ाने का टाइम टेबल भी मांगा जाएगा। शिक्षक पढ़ा रहे हैं अथवा नहीं, इसकी जानकारी शासन और विश्वविद्यालय कभी भी सेटेलाइट की मदद से पा सकेगा।
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मानकों की कमी के बावजूद अब तक कॉलेज सांठगांठ करके संबद्धता हासिल कर लेते थे। इससे छात्र-छात्राओं को सुविधाएं नहीं मिल पाती थी और पढ़ाई की गुणवत्ता भी दिनों दिन कम होती जा रही थी। इसमें सुधार करने के लिए अब शासन ने सभी कॉलेजों की जीओ टैगिंग कराने का फैसला लिया है। हाल ही में लखनऊ में हुई उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक में इसी सत्र से जीओ टैगिंग को प्रभावी करने का निर्णय हुआ है। इसके चलते अब कॉलेजों को जीओ टैगिंग पोर्टल पर लाइब्रेरी, क्लास, विभाग, लैब आदि का ब्योरा अपलोड करना होगा। ब्योरा अपलोड होने के बाद ऑनलाइन ही इसे देखा जा सकेगा। इससे कागजों में खेल करके कॉलेज क्लास, लैब नहीं दर्शा पाएंगे।
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हर क्लास में लगेंगे कैमरे
शासन उच्च शिक्षण संस्थानों में हर क्लास में कैमरे लगाने पर विचार कर रहा है। बैठक में कैमरों को सेटेलाइट से जोड़ने पर भी चर्चा हुई। कैमरे लगने के बाद सभी कॉलेजों से शिक्षकों के पढ़ाने का टाइम टेबल भी मांगा जाएगा। शिक्षक पढ़ा रहे हैं अथवा नहीं, इसकी जानकारी शासन और विश्वविद्यालय कभी भी सेटेलाइट की मदद से पा सकेगा।
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