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...तो रिपोर्ट पर आंखें मूंद कर हस्ताक्षर करते रहे अधिकारी
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झांसी। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के नाम पर हुए खेल में अधिकारियों की काफी मिलीभगत नजर आ रही है। भुगतान से पहले कंपनियों द्वारा दी जाने वाली रिपोर्ट पर अधिकारियों के हस्ताक्षर किए जाते हैं, लेकिन अधिकारियों ने रिपोर्ट की पड़ताल तक नहीं कराई। अधिकारियों के हस्ताक्षर से सत्यापित की गईं रिपोर्ट पर भुगतान होता रहा। मामले को लेकर लगातार पार्षद सवाल उठा रहे हैं, लेकिन अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है।
महानगर में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए पांच कंपनियों से अनुबंध किया गया। कंपनियों को जिम्मा दिया गया था कि उनको हर घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठान से कूड़ा लेना है। इसके एवज में घर से 40 रुपये और व्यावसायिक प्रतिष्ठान से 500 रुपये बतौर यूजर चार्ज वसूलना है। कंपनियां भुगतान के लिए नगर निगम के अधिकारियों को हर महीने कूड़ा लेने की रिपोर्ट और जमा किए गए यूजर चार्ज की कॉपी बिल के साथ सौंपती हैं। जिस पर हर महीने नगर निगम के अधिकारियों के हस्ताक्षर होते हैं। इसे लेकर पार्षदों ने पहले भी सवाल उठाए थे। पार्षदों का कहना है कि कंपनियों ने वार्ड के सभी घरों से कूड़ा नहीं लिया। वार्ड में सप्ताह में दो बार ही टीमें कूड़ा लेने पहुंचीं। जबकि हर महीने सौंपी जाने वाली रिपोर्ट में निचले स्तर से लेकर उच्चाधिकारियों के हस्ताक्षर होते रहे। पार्षद उमेश जोशी का कहना है कि कूड़ा कलेक्शन का सत्यापन कभी पार्षदों से कराया ही नहीं गया। जब शिकायत की, तो अधिकारी टाल मटोल करते रहे। तीन दिन में रिपोर्ट देने की बात कही गई, लेकिन डेढ़ साल में वो तीन दिन नहीं आए। मामले में अफसर अब भी चुप्पी साधे हैं।
तो कूड़े के कंटेनर क्यों खरीदे
महानगर में जब कंपनियों को हर घर से कूड़ा लेना था, तो निगम ने लाखों रुपये खर्च कर हर सार्वजनिक स्थान पर कूड़े कंटेनर क्यों रखवाए? जहां कूड़े का ढेर लगा रहता है। इससे साफ है कि कंपनियां पांच साल में भी पूरा कवरेज नहीं कर सकीं। लेकिन भुगतान होता रहा।
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कूड़ा निस्तारण प्लांट भी बंद
नगर निगम ने एक कंपनी की मदद करते हुए अपने बजट से कूड़ा निस्तारण का प्लांट भी लगवाया था। यहां गीले और सूखे कूड़े को अलग करते हुए खाद बनाई जानी थी। लेकिन अब कंपनी ने यह प्लांट भी बंद कर दिया है। जबकि निगम ने प्लांट में मशीनरी पर लाखों रुपये खर्च किए थे।
मामले की हो जांच
कूड़ा कलेक्शन के खेल को लेकर पार्षदों ने जांच की मांग की है। पार्षद दिनेश प्रताप सिंह दीपू ने कहा कि कूड़ा कंपनियों की जांच की जानी चाहिए। पार्षद प्रदीप नगरिया का कहना है कि वार्ड में 30 फीसद कूड़ा कलेक्शन हो रहा है। इसकी जांच कराई जाए। साथ ही नगर निगम कूड़ा कलेक्शन का तंत्र विकसित करे।
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महानगर में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए पांच कंपनियों से अनुबंध किया गया। कंपनियों को जिम्मा दिया गया था कि उनको हर घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठान से कूड़ा लेना है। इसके एवज में घर से 40 रुपये और व्यावसायिक प्रतिष्ठान से 500 रुपये बतौर यूजर चार्ज वसूलना है। कंपनियां भुगतान के लिए नगर निगम के अधिकारियों को हर महीने कूड़ा लेने की रिपोर्ट और जमा किए गए यूजर चार्ज की कॉपी बिल के साथ सौंपती हैं। जिस पर हर महीने नगर निगम के अधिकारियों के हस्ताक्षर होते हैं। इसे लेकर पार्षदों ने पहले भी सवाल उठाए थे। पार्षदों का कहना है कि कंपनियों ने वार्ड के सभी घरों से कूड़ा नहीं लिया। वार्ड में सप्ताह में दो बार ही टीमें कूड़ा लेने पहुंचीं। जबकि हर महीने सौंपी जाने वाली रिपोर्ट में निचले स्तर से लेकर उच्चाधिकारियों के हस्ताक्षर होते रहे। पार्षद उमेश जोशी का कहना है कि कूड़ा कलेक्शन का सत्यापन कभी पार्षदों से कराया ही नहीं गया। जब शिकायत की, तो अधिकारी टाल मटोल करते रहे। तीन दिन में रिपोर्ट देने की बात कही गई, लेकिन डेढ़ साल में वो तीन दिन नहीं आए। मामले में अफसर अब भी चुप्पी साधे हैं।
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तो कूड़े के कंटेनर क्यों खरीदे
महानगर में जब कंपनियों को हर घर से कूड़ा लेना था, तो निगम ने लाखों रुपये खर्च कर हर सार्वजनिक स्थान पर कूड़े कंटेनर क्यों रखवाए? जहां कूड़े का ढेर लगा रहता है। इससे साफ है कि कंपनियां पांच साल में भी पूरा कवरेज नहीं कर सकीं। लेकिन भुगतान होता रहा।
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कूड़ा निस्तारण प्लांट भी बंद
नगर निगम ने एक कंपनी की मदद करते हुए अपने बजट से कूड़ा निस्तारण का प्लांट भी लगवाया था। यहां गीले और सूखे कूड़े को अलग करते हुए खाद बनाई जानी थी। लेकिन अब कंपनी ने यह प्लांट भी बंद कर दिया है। जबकि निगम ने प्लांट में मशीनरी पर लाखों रुपये खर्च किए थे।
मामले की हो जांच
कूड़ा कलेक्शन के खेल को लेकर पार्षदों ने जांच की मांग की है। पार्षद दिनेश प्रताप सिंह दीपू ने कहा कि कूड़ा कंपनियों की जांच की जानी चाहिए। पार्षद प्रदीप नगरिया का कहना है कि वार्ड में 30 फीसद कूड़ा कलेक्शन हो रहा है। इसकी जांच कराई जाए। साथ ही नगर निगम कूड़ा कलेक्शन का तंत्र विकसित करे।