फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Coconut oil saved the lives of those who ate sulphas poison in jhansi Doctors did research on 87 patients

UP: नारियल तेल से बचाई सल्फास खाने वालों की जान... 87 मरीजों पर किया शोध, 18 गंभीर में से आठ की बचाई जिंदगी

Mon, 29 Jul 2024 02:09 PM IST
शाहरुख खान नीरज वर्मा, अमर उजाला, झांसी
नीरज वर्मा, अमर उजाला, झांसी Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 29 Jul 2024 02:09 PM IST
सार

सल्फास खाने वालों की नारियल तेल से जान बचाई गई। झांसी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने 87 रोगियों पर शोध किया। शोध के दौरान 18 बेहद गंभीर मरीजों से आठ लोगों की जान बचाने में कामयाबी भी मिली।

विज्ञापन
Coconut oil saved the lives of those who ate sulphas poison in jhansi Doctors did research on 87 patients
Coconut oil - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आत्महत्या के बढ़ते मामलों के बीच सल्फास खाकर खुदकुशी करने के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। सल्फास खाकर जान देने की कोशिश करने वालों की जान नारियल के तेल के जरिये बचाई जा सकती है। झांसी मेडिकल कॉलेज के तीन डॉक्टरों ने जनवरी 2022 से जुलाई 2023 के बीच 87 रोगियों पर इसका शोध किया। 
विज्ञापन


शोध के दौरान 18 बेहद गंभीर मरीजों से आठ लोगों की जान बचाने में कामयाबी भी मिली। अब इसकी बड़े चिकित्सा संस्थानों में ट्रायल की तैयारी है। डॉ. नूतन अग्रवाल, डॉ. जकी सिद्दीकी व डॉ. क्षितिज नाथ के अनुसार, सल्फास खाने वाले मरीजों का सबसे पहले ग्लूकोज के जरिए गैस्ट्रिक लैवज कराया जाता है। 
विज्ञापन


इस प्रक्रिया में पेट के भीतर विषाक्त पदार्थों को निकालने के लिए एक ट्यूब के माध्यम से तरल भेजा जाता है। शोध के तहत इन रोगियों को डेढ़ लीटर नारियल तेल से गैस्ट्रिक लैवेज कराया गया तो आठ लोगों की जान बचाई गई। शोध की इस सफलता का जर्नल में प्रकाशन हो चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सबसे खतरनाक होता है सील पैक सल्फास
डॉ. जकी सिद्दीकी ने बताया कि खुले सल्फास से ज्यादा खतरनाक पैक सल्फास होता है। खुले में रखी हुई सल्फास की तीक्षणता कम हो जाती है, जबकि पैक सल्फास शरीर में पहुंचते ही अपना असर दिखाने लगती है।

ऐसे प्रभावशाली है नारियल का तेल
डॉ. नूतन अग्रवाल व जकी सिद्दीकी ने बताया कि सल्फास खाने से फॉस्फीन गैस बनती है। यह रासायनिक रूप से प्रतिक्रियाशील व अत्यधिक जहरीली होती है। इससे अंग (लीवर, किडनी, फेफडे आदि) खराब होने से मृत्यु हो जाती है। नारियल के तेल की पीएच वैल्यू एल्कलाइन होती है, जो शरीर में पहुंचकर फॉस्फीन गैस का बनना और प्रभाव कम कर देता है। इससे रोगी की जान बच जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed