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Jhansi News: सल्फास खाने वालों की नारियल के तेल से बचाई जानज
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झांसी। सल्फास खाने वाले लोगों की जान बचाने के लिए मेडिकल कॉलेज में हुई रिसर्च में बड़ी कामयाबी मिली है। डेढ़ लीटर नारियल के तेल से गैस्ट्रिक लैवेज (ट्यूब के माध्यम से पेट की सफाई) कराया तो 45 फीसदी रोगी की जान बच गई। अब शोध का बड़े चिकित्सा संस्थानों में ट्रायल की तैयारी है। इसमें सफलता के बाद नारियल के तेल से गैस्ट्रिक लैवेज का ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल जारी होगा।
बुंदेलखंड में आत्महत्या के एक के बाद एक मामले सामने आते रहते हैं। कोई सल्फास तो कोई अन्य विषाक्त पदार्थ खाकर जान गंवाता है। अभी तक डॉक्टरों के सामने सल्फास खाने वालों की जान बचाना चुनौती है, क्योंकि अधिकांश लोगों की मौत हो जाती है। इन रोगियों को बचाने के लिए पानी (ग्लूकोज) से गैस्ट्रिक लैवेज कराया जाता है, मगर सफलता कम मिलती है।
मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नूतन अग्रवाल, डॉ. जकी सिद्दीकी व डॉ. क्षितिज नाथ ने संयुक्त रूप से शोध किया। उन्होंने जनवरी 2022 से जुलाई 2023 तक सल्फास खाकर मेडिकल कॉलेज में आने वाले रोगियों पर शोध किया। बेहद नाजुक हालत में रहे 18 रोगियों को डेढ़ लीटर नारियल तेल से गैस्ट्रिक लैवेज कराया गया तो फॉस्फीन गैस का बनना और उसका असर कम हो गया, जिससे आठ लोगों की जान बचाई गई। शोध की इस सफलता का जर्नल में प्रकाशन हो चुका है। अब जल्द कई चिकित्सा केंद्रों पर ट्रायल कराने की तैयारी है, ताकि यह ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल में शामिल हो सके।
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बुंदेलखंड में आत्महत्या के एक के बाद एक मामले सामने आते रहते हैं। कोई सल्फास तो कोई अन्य विषाक्त पदार्थ खाकर जान गंवाता है। अभी तक डॉक्टरों के सामने सल्फास खाने वालों की जान बचाना चुनौती है, क्योंकि अधिकांश लोगों की मौत हो जाती है। इन रोगियों को बचाने के लिए पानी (ग्लूकोज) से गैस्ट्रिक लैवेज कराया जाता है, मगर सफलता कम मिलती है।
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मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नूतन अग्रवाल, डॉ. जकी सिद्दीकी व डॉ. क्षितिज नाथ ने संयुक्त रूप से शोध किया। उन्होंने जनवरी 2022 से जुलाई 2023 तक सल्फास खाकर मेडिकल कॉलेज में आने वाले रोगियों पर शोध किया। बेहद नाजुक हालत में रहे 18 रोगियों को डेढ़ लीटर नारियल तेल से गैस्ट्रिक लैवेज कराया गया तो फॉस्फीन गैस का बनना और उसका असर कम हो गया, जिससे आठ लोगों की जान बचाई गई। शोध की इस सफलता का जर्नल में प्रकाशन हो चुका है। अब जल्द कई चिकित्सा केंद्रों पर ट्रायल कराने की तैयारी है, ताकि यह ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल में शामिल हो सके।
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