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डाक्टरों को स्वीकार नहीं क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट बिल

Thu, 28 Jul 2016 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 28 Jul 2016 01:06 AM IST
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 Clinical Establishment Bill doctors accept
hospital, jhansi news - फोटो : demo
झांसी। क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट बिल के विरोध में डाक्टर लामबंद हो गए हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) बिल के विरोध में 30 जुलाई को विरोध दिवस मनाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा जाएगा। बुधवार को यह जानकारी आईएमए के पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता में दी। प्रदेश सरकार पहले ही बिल की अधिसूचना जारी कर चुकी है।
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एक होटल में पत्रकारों से चर्चा करते हुए आईएमए के सचिव डा. अनु निगम ने बताया कि क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट बिल की अधिसूचना सरकार ने 12 जुलाई को जारी कर दी है। यह जन विरोधी है, इससे तमाम प्राइवेट अस्पताल बंद हो जाएंगे व चिकित्सा महंगी होगी। यहां तक कि स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित नहीं हो पाएंगे, इसके लिए भी पंजीकरण कराना होगा। अस्पताल व शिविर के पंजीकरण के लिए सत्ताइस विभागों से क्लियरेंस लेना होगा, इससे इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिलेगा। 
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आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डा. एके सांवल ने कहा कि यह बिल अमेरिका और इंग्लैंड जैसे विकसित देशों की तर्ज पर बनाया गया है, इसमें देश की जमीनी हकीकत का ध्यान नहीं रखा गया है। इससे बेरोजगारी बढ़ेगी। इस मौके पर डा. बीके गुप्ता, डा. रोबिन श्रीवास्तव, डा. राजीव कुमार, डा. आरके बादल व डा. मुकेश रजा मौजूद रहे।
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इस्टेब्लिशमेंट बिल के मुख्य प्रावधान
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- अस्पतालोें व क्लिनिक का पंजीकरण अनिवार्य होगा। स्वास्थ्य शिविर का भी पंजीकरण होगा।
- प्राइवेट अस्पतालों में नर्स व अन्य स्टाफ का ट्रेंड होना जरूरी होगा।
- इलाज से पहले डायग्नोसिस कराना होगा अनिवार्य। 
- अस्पताल व क्लिनिक खोलने के लिए सत्ताइस जगह से लेनी होगी एनओसी। 
- अस्पताल के लिए जरूरी होगी न्यूनतम पांच हजार वर्ग फिट जगह। 
- हर मरीज के इलाज का ब्योरा करना होगा ऑनलाइन। 
- अस्पताल में जीवन रक्षक उपकरणों का होना होगा जरूरी।

डाक्टरों की यह हैं समस्याएं 
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- ट्रेंड नर्सों की है भारी कमी। डब्लूएचओ के मुताबिक देश में हैं 24 लाख नर्सों की कमी।
- क्लिनिक व नर्सिंग होम के लिए बिल के मानक पूरा करना होगा मुश्किल।
- नये अस्पतालों को खोलना हो जाएगा मुश्किल।
- बढ़े खर्चों का बोझ मरीजों पर भी पढ़ेगा।
- अलग-अलग जगह से सरकारी एनओसी लेना आसान नहीं होगा।
- ट्रेंड स्टाफ ज्यादा लेगा वेतन, अस्पतालों का खर्च बढ़ेगा।
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