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बुंदेलखंड की जलवायु छत्तीसगढ़ के अमरूद के अनुकूल

Tue, 14 Sep 2021 01:17 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 14 Sep 2021 01:17 AM IST
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Climate of Bundelkhand favorable to guava of Chhattisgarh
झांसी। संयुक्त कृषि निदेशक लखनऊ डा. यूपी सिंह ने परंपरागत कृषि विकास योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि बुंदेलखंड की भूमि देवभूमि है। यहां का जैविक अन्न अमृत समान है। फार्मर प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन (एफपीओ) जैविक उत्पाद की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने में सहायक बनें। अधिक से अधिक एफपीओ गठित कर पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराएं, ताकि विभिन्न विभागों की योजनाओं का लाभ मिल सके। बुंदेलखंड क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु बहुत अच्छी है। किसान छत्तीसगढ़ के अमरूद की पैदावार करें। इसकी पैकेजिंग और ब्रांडिंग करें। इसमें शासन सहयोग करेगा।
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कृषि भवन उप संभागीय सभागार में उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड दलहन और तिलहन का हब है। एफपीओ आगे आकर उत्पादों का जैविक प्रमाणन कराएं और उनकी बिक्री करें। इससे किसानों को अधिक से अधिक लाभ होगा। क्षेत्र में सब्जी, अदरक की खेती के साथ- साथ फूलों की खेती करें। क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी जैविक खेती के लिए वरदान है। क्षेत्र में कम लागत से तिल की खेती कर अधिक उत्पादन लिया जा सकता है। पॉलीहाउस बनाकर खेती करें और शासन से अनुदान लें। जैविक खेती को पोर्टल पर भी पंजीकरण करा लें, ताकि उपभोक्ता सीधे उत्पाद को खरीद सके।
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इस मौके पर संयुक्त कृषि निदेशक एसएस चौहान, उपनिदेशक शोध रजितराम, बीएसए संजय कुमार, विवेक कुमार, विनय मोघे, विषय वस्तु विशेषज्ञ दीपक कुशवाहा, अनिल कुमार, एफपीओ निदेशक गुंचीलाल, पूरन लाल, बड़ी संख्या में किसान आदि मौजूद रहे।
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मिठास में बेजोड़ होता है छत्तीसगढ़ का अमरूद
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर (छत्तीसगढ़) द्वारा विकसित की गई अमरूद की प्रजाति छह महीने में फल देने लगती है। एक बार लागत लगाने पर 25 से 28 साल तक अमरूद फल देता है। एक एकड़ में 1600 पौधे लगाए जा सकते हैँ और ढाई लाख तक खर्च आता है। इसकी चार प्रजातियां ललित, सफेदा, लखनऊ- 41 और वीएनआरबी हैं। मिठास में इस फल का कोई जवाब नहीं है और एक पाव से आधा किलोग्राम तक का फल होता है। यह सेब से भी महंगा बिकता है। दस से बारह दिन तक यह फल ताजा दिखाई देता है और छत्तीसगढ़ के भिलाई व रायसेन जिले में पैदा होता है।
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