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सफाई व्यवस्था की हो कड़ी निगरानी, रोकी जाए कर्मचारियों की मनमानी

Tue, 01 Mar 2022 01:26 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2022 01:26 AM IST
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Cleanliness should be closely monitored, arbitrariness of employees should be stopped
झांसी। इस बार होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण में झांसी महानगर की रैंकिंग को देश व प्रदेश में ऊंचे पायदान पर ले जाने के लिए ‘अमर उजाला’ की ओर से मुहिम चलाई जा रही है। इसी के तहत सोमवार को संवाद का आयोजन हुआ, इसमें शामिल हुए नगर निगम के पार्षदों ने महानगर की साफ-सफाई से जुड़ीं विभिन्न समस्याएं उठाईं और सुधार के सुझाव भी दिए। पार्षदों ने कहा कि तमाम सफाई कर्मचारी अपनी ड्यूटी से गायब रहते हैं। वार्डों में होने वाले सफाई कार्य की निगम की ओर से निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई है। इसकी कड़ी निगरानी हो और कर्मचारियों की मनमानी रोकी जाए। विदित हो कि पिछले स्वच्छता सर्वेक्षण में दस लाख से कम आबादी वाले शहरों में झांसी महानगर प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा था, जबकि देश में 18वां स्थान था।
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पार्षद राजू साहू ने कहा कि कई सफाई इंस्पेक्टर काम में लापरवाही बरत रहे हैं। वे सफाई कर्मचारियों की निगरानी सही ढंग से नहीं करते हैं। यही वजह है कि सफाई कर्मचारी मनमानी पर उतारू हैं। नगर निगम के उप सभापति सुनील नैनवानी ने कहा कि जन सहयोग के बगैर सफाई संभव नहीं है। लोग घर-दुकान का कचरा बाहर खुले में न फेंके, निर्धारित स्थान पर उसे डालें या कचरा उठाने के लिए आने वाले कर्मचारियों को ही दें। मनोनीत पार्षद उमाशंकर राय ने कहा कि सफाई के लिए जन जागरण जरूरी है। पार्षद और सभी जनप्रतिनिधि इसके लिए आगे आएं और सफाई अभियान चलाएं। सड़कों से कचरा उठाकर दूसरों को इसके लिए प्रेरित करें।
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पार्षद मुकेश सोनी (बंटी) ने कहा कि कई दुकानदार बाजारों की सफाई होने के बाद अपनी दुकानों को साफ कर कचरा बाहर फेंक देते हैं। ये सड़क पर ही पड़ा रहता है। दूसरे दिन इसकी उठान होती है। इस प्रवृत्ति में बदलाव जरूरी है। गोकुल दुबे ने कहा कि दूसरों को जागरूक करने से पहले हमें जागरूक होना होगा। बाहर की सफाई का भी हमें उसी तरह से ध्यान रखना होगा, जैसे हम अपने घर का रखते हैं। पार्षद सुशीला दुबे ने कहा कि महानगर की सुबह और शाम दो बार सफाई होनी चाहिए। पार्षद भरत सेन ने कहा कि प्रेमनगर क्षेत्र विकास और सफाई दोनों ही मामलों में अछूता है। वार्ड में 30 कर्मचारी तैनात है, जबकि काम करते हुए 15 ही नजर आते हैं। इस दौरान बृजेश, कमलेश पांडेय, सत्यप्रकाश राजपूत व नरेंद्र झा ने भी अपने विचार रखे।
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लड़ने पर आमादा हो जाते हैं सफाई कर्मचारी
पार्षद जितेंद्र सिंह ने कहा कि सभी तैनात कर्मचारी आते नहीं है और जो आते भी हैं, वो अपना काम फौरी तौर पर ही निपटाकर चले जाते हैं। पार्षद अमन राय ने कहा कि गलियों में सही ढंग से सफाई नहीं होती। सफाई का दबाव बनाने पर सफाई कर्मचारी लड़ने पर आमादा हो जाते हैं। इसके अलावा दो पालियों में सफाई की व्यवस्था की जानी चाहिए। आदर्श गुप्ता ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था लागू होनी चाहिए, इससे मनमानी पर लगाम लगेगी। मनोनीत पार्षद प्रमिला झा ने कहा कि इंस्पेक्टर घूमते नहीं, हवलदार आते नहीं, सफाई कर्मी भी कभी-कभी ही नजर आते हैं। निगम को सफाई कर्मचारियों की कड़ी निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
ये दिए सुझाव
- वार्डों में तैनात सफाई कर्मचारियों के काम की कड़ी निगरानी हो।
- सभी कर्मचारी नियमित रूप से अपनी ड्यूटी करें, इसके लिए व्यवस्था बनाई जाए।
- वार्डों में सफाई कर्मियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज की जाए।
- महानगर की सुबह और शाम दो पालियों में हो सफाई।
- लोग भी अपनी जिम्मेदारी समझें, निर्धारित स्थान पर ही कचरा फेंकें।
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