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एक तो कुओं में पानी कम, उस पर गंदगी का आलम
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Jul 2025 01:47 PM IST
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- फोटो : demo
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झांसी। बुंदेलखंड क्षेत्र में जलस्तर नीचे जाने का कुप्रभाव महानगर के कुओं पर भी पड़ा है। यहां के अधिकांश कुओं में जहां पानी कम बचा है, वहीं कई कुओं का पानी केवल इसलिए प्रयोग में नहीं लिया जाता, क्योंकि उनमें गंदगी का अंबार है। प्रत्येक वार्ड के समस्याग्रस्त कुओं की सफाई व मरम्मत की सूची तैयार है। नगर निगम इन कुओं की सफाई कराना चाहता है, मगर ठेकेदार नहीं मिल रहे हैं।
सूखाग्रस्त बुंदेलखंड में जलस्तर काफी गिर गया है। एक तो हैंडपंपों साथ छोड़ दिया है, वहीं कुओं का पानी भी नीचे चला गया है। महानगर में मौजूद 312 सार्वजनिक कुओं में से लगभग 150 कुएं ऐसे हैं जो गंदगी से भरे हैं। इनका पानी प्रयोग नहीं किया जाता है। वहीं, लगभग 85 कुओं का पानी या तो सूख चुका है या फिर उन्हें पाट (मिट्टी से भर कर अस्तित्व समाप्त) दिया गया है। ऐसे में शेष बचे 77 कुओं का पानी ही इस्तेमाल किया जा रहा है।
जहां हैंडपंप खराब हैं, वहां लोग कुओं के पानी से काम चला लेते थे, मगर अब स्थिति उलट है। कुओं का उचित रखरखाव न होने से पेयजल तो दूर, इन कुओं के पानी को किसी भी कार्य में इस्तेमाल नहीं किया जाता। अधिकांश सूख चुके कुओं में खरपतवार, झाड़ियां अथवा बड़े-बड़े पेड़ तक उग आए हैं। वहीं कई कुओं को नवनिर्मित मकानों के नीचे दफन कर उनका अस्तित्व ही समाप्त कर दिया गया है।
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वर्जन
पहले प्रत्येक कुएं की सफाई के साथ ही उसमें क्लोरीन डाली जाती थी। जिससे कुओं का पानी पेयजल के रूप में इस्तेमाल होता था। दो वर्षों से इन कुओं की सफाई के लिए ठेकेदार ही नहीं आ रहे। विभाग ने निविदा निकाली, मगर टेंडर ही नहीं पड़े। उधर, पार्षदों से प्रत्येक वार्ड के समस्याग्रस्त दो-दो कुओं की सूची मंगवाई गई थी। इस सूची में शहरी क्षेत्र के वार्डों से कम, जबकि महानगर के बाहरी क्षेत्र से गंदे कुएं अधिक शामिल किए गए थे। कुल 130 कुओं की सूची तैयार की गई थी। जैसे ही ठेकेदार मिलेगा, इन कुओं की सफाई का कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
- अरुण प्रकाश, नगर आयुक्त
प्रार्थना पत्र दिया, मगर नहीं हुई कुएं की सफाई
झांसी। सिविल लाइन की पार्षद नीता विकास यादव ने बताया कि उनके क्षेत्र के मोहल्ला हैवटगंज में कुआं गंदगी से भरा पड़ा है। लोग इसका पानी पहले इस्तेमाल करते थे, मगर गंदगी के चलते अब वहां कोई नहीं जाता। उन्होंने इसकी सफाई के लिए नगर आयुक्त को पत्र लिखा था, मगर सफाई नहीं हो सकी। यदि यह कुआं साफ हो जाए तो क्षेत्र में पानी की परेशानी काफी हद तक दूर हो जाएगी।
इतना कचरा डाला, कि कुआं बंद हो गया
झांसी। लक्ष्मी गेट निवासी हुकुम सिंह प्रजापति बताते हैं कि प्रजापति समाज मंदिर के पास स्थित वर्षों पुराना कुआं था। इसको लोगों ने कचरा डाल-डाल कर भर दिया। कई बार इसकी सफाई भी हुई, मगर अब इस कुएं का अस्तित्व ही समाप्त होने को है। उनका कहना है कि क्षेत्र में गर्मी के दिनों में पेयजल की किल्लत हो जाती है, यदि इस कुएं पर अधिकारी समय रहते ध्यान देते तो शायद यहां के लोगों के लिए यह कुआं संजीवनी साबित होता।
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सूखाग्रस्त बुंदेलखंड में जलस्तर काफी गिर गया है। एक तो हैंडपंपों साथ छोड़ दिया है, वहीं कुओं का पानी भी नीचे चला गया है। महानगर में मौजूद 312 सार्वजनिक कुओं में से लगभग 150 कुएं ऐसे हैं जो गंदगी से भरे हैं। इनका पानी प्रयोग नहीं किया जाता है। वहीं, लगभग 85 कुओं का पानी या तो सूख चुका है या फिर उन्हें पाट (मिट्टी से भर कर अस्तित्व समाप्त) दिया गया है। ऐसे में शेष बचे 77 कुओं का पानी ही इस्तेमाल किया जा रहा है।
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जहां हैंडपंप खराब हैं, वहां लोग कुओं के पानी से काम चला लेते थे, मगर अब स्थिति उलट है। कुओं का उचित रखरखाव न होने से पेयजल तो दूर, इन कुओं के पानी को किसी भी कार्य में इस्तेमाल नहीं किया जाता। अधिकांश सूख चुके कुओं में खरपतवार, झाड़ियां अथवा बड़े-बड़े पेड़ तक उग आए हैं। वहीं कई कुओं को नवनिर्मित मकानों के नीचे दफन कर उनका अस्तित्व ही समाप्त कर दिया गया है।
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पहले प्रत्येक कुएं की सफाई के साथ ही उसमें क्लोरीन डाली जाती थी। जिससे कुओं का पानी पेयजल के रूप में इस्तेमाल होता था। दो वर्षों से इन कुओं की सफाई के लिए ठेकेदार ही नहीं आ रहे। विभाग ने निविदा निकाली, मगर टेंडर ही नहीं पड़े। उधर, पार्षदों से प्रत्येक वार्ड के समस्याग्रस्त दो-दो कुओं की सूची मंगवाई गई थी। इस सूची में शहरी क्षेत्र के वार्डों से कम, जबकि महानगर के बाहरी क्षेत्र से गंदे कुएं अधिक शामिल किए गए थे। कुल 130 कुओं की सूची तैयार की गई थी। जैसे ही ठेकेदार मिलेगा, इन कुओं की सफाई का कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
- अरुण प्रकाश, नगर आयुक्त
प्रार्थना पत्र दिया, मगर नहीं हुई कुएं की सफाई
झांसी। सिविल लाइन की पार्षद नीता विकास यादव ने बताया कि उनके क्षेत्र के मोहल्ला हैवटगंज में कुआं गंदगी से भरा पड़ा है। लोग इसका पानी पहले इस्तेमाल करते थे, मगर गंदगी के चलते अब वहां कोई नहीं जाता। उन्होंने इसकी सफाई के लिए नगर आयुक्त को पत्र लिखा था, मगर सफाई नहीं हो सकी। यदि यह कुआं साफ हो जाए तो क्षेत्र में पानी की परेशानी काफी हद तक दूर हो जाएगी।
इतना कचरा डाला, कि कुआं बंद हो गया
झांसी। लक्ष्मी गेट निवासी हुकुम सिंह प्रजापति बताते हैं कि प्रजापति समाज मंदिर के पास स्थित वर्षों पुराना कुआं था। इसको लोगों ने कचरा डाल-डाल कर भर दिया। कई बार इसकी सफाई भी हुई, मगर अब इस कुएं का अस्तित्व ही समाप्त होने को है। उनका कहना है कि क्षेत्र में गर्मी के दिनों में पेयजल की किल्लत हो जाती है, यदि इस कुएं पर अधिकारी समय रहते ध्यान देते तो शायद यहां के लोगों के लिए यह कुआं संजीवनी साबित होता।