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Jhansi News: ओपीडी में निमोनिया और ब्रोंकोलाइटिस से पीड़ित बच्चे पहुंचने लगे
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झांसी। मौसम में बदलाव के साथ बच्चों की सेहत पर असर दिखने लगा है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में निमोनिया और ब्रोंकोलाइटिस से पीड़ित 10 से 12 बच्चे पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार, सुबह-शाम की ठंड और बदलते तापमान के बीच एक वर्ष तक के बच्चों को विशेष देखभाल की जरूरत है।
वहीं, हृदय रोगियों को भी सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि ठंड के संपर्क में आने से रक्तचाप बढ़ सकता है और हृदय संबंधी जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि नवजात और एक वर्ष तक के बच्चों को बदलते मौसम में विशेष देखभाल की जरूरत होती है। उन्हें खांसी-जुकाम और बुखार के साथ निमोनिया व ब्रोंकोलाइटिस जैसी बीमारियां हो सकती हैं। अभिभावक बच्चों को मौसम के अनुरूप कपड़े पहनाएं। सुबह-शाम सिर और पैर ढककर रखें तथा ठंडी हवा से बचाएं।
सांस तेज चले तो तुरंत दिखाएं डॉक्टर को
डॉ. चौरसिया के अनुसार, बच्चे की सांस तेज चलने, सांस लेते समय आवाज आने या छाती का निचला हिस्सा अंदर धंसने जैसे लक्षण दिखें तो लापरवाही न करें। ऐसी स्थिति में बच्चे को तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
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ठंड में बढ़ सकता है हृदय संबंधी परेशानी का खतरा
मेडिकल कॉलेज की हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. ऊषा किरन ने बताया कि तापमान गिरने पर रक्त वाहिकाएं सिकुड़ सकती हैं, जिससे रक्तचाप बढ़ सकता है। इससे खासकर पहले से हृदय रोग या उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों में हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे लोगों को ठंड और वायरल संक्रमण से बचाव करना चाहिए।
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वहीं, हृदय रोगियों को भी सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि ठंड के संपर्क में आने से रक्तचाप बढ़ सकता है और हृदय संबंधी जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि नवजात और एक वर्ष तक के बच्चों को बदलते मौसम में विशेष देखभाल की जरूरत होती है। उन्हें खांसी-जुकाम और बुखार के साथ निमोनिया व ब्रोंकोलाइटिस जैसी बीमारियां हो सकती हैं। अभिभावक बच्चों को मौसम के अनुरूप कपड़े पहनाएं। सुबह-शाम सिर और पैर ढककर रखें तथा ठंडी हवा से बचाएं।
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सांस तेज चले तो तुरंत दिखाएं डॉक्टर को
डॉ. चौरसिया के अनुसार, बच्चे की सांस तेज चलने, सांस लेते समय आवाज आने या छाती का निचला हिस्सा अंदर धंसने जैसे लक्षण दिखें तो लापरवाही न करें। ऐसी स्थिति में बच्चे को तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
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ठंड में बढ़ सकता है हृदय संबंधी परेशानी का खतरा
मेडिकल कॉलेज की हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. ऊषा किरन ने बताया कि तापमान गिरने पर रक्त वाहिकाएं सिकुड़ सकती हैं, जिससे रक्तचाप बढ़ सकता है। इससे खासकर पहले से हृदय रोग या उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों में हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे लोगों को ठंड और वायरल संक्रमण से बचाव करना चाहिए।