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बुखार की तपिश बर्दाश्त नहीं कर पा रहे बच्चे, आ रहे हैं दिमागी दौरे
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झांसी। छह माह से पांच साल तक के बच्चों को तेज बुखार आते ही बुखार दिमाग पर चढ़ रहा है। जिसके चलते दस से पंद्रह फीसदी बच्चों में दिमागी दौरे (फेबराइल कनवल्जन) का असर देखा जा रहा है। दौरे के दौरान समय पर इलाज नहीं मिलने पर बच्चों की मृत्यु तक हो जाती है। इन दौरों को बुखारी दौरे भी कहा जाता है। एक से अधिक बार दौरे आने पर दो साल तक नियमित इलाज करने के बाद ही बच्चे स्वस्थ होते हैं।
बच्चे हों या बड़े बुखार आना एक सामान्य प्रक्रिया है। साधारण बुखार तो तीन से चार दिन के भीतर ही दफा हो जाता है। जिसके चलते बुखार को लेकर लोग गंभीर नजर नहीं आते हैं। लेकिन आज कल बच्चों में बुखार का तापमान सौ डिग्री से अधिक होते ही दिमाग पर चढ़ जाता है। दिमाग पर चढ़ते ही बच्चों के दिमाग में करंट जैसा एक झटका सा महसूस होता है। इस दौरान बच्चे की आंखें ऊपर की ओर चली जाती है। कई बच्चों के मुंह से झाग भी निकलने के साथ ही शरीर में अकड़न की स्थिति हो जाती है। कुछ देर के लिए बच्चा बेहोश होकर कोमा की स्थिति में पहुंच जाता है। कई बच्चों को दौरे के दौरान उल्टी हो जाती है। हालांकि इन झटकों की अवधि एक से दो मिनट की होती है। कई मामलों में यह दस से पंद्रह मिनट तक खिंच सकती है। लेकिन समय पर इलाज नहीं मिलने पर बच्चे की हालत गंभीर हो सकती है। चिकित्सकों के अनुसार 18 माह से कम उम्र के बच्चे को दौरे के दौरान बेहोशी अथवा मुंह से झाग आने की दशा में अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया जाता है। कई बच्चों को भर्ती किए बिना ही इलाज किया जाता है।
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. ओम शंकर चौरसिया ने बताया कि वर्तमान में बच्चों में दिमागी दौरों की संख्या में लगातार इजाफा रहा है। दस से पंद्रह फीसदी तक बच्चों में बुखार के दौरान दिमागी झटकों का असर हो रहा है। हालांकि इलाज के दौरान बच्चे स्वस्थ हो जाते हैं।
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यह करे उपचार
- बच्चों में बुखार आने पर तुरंत ही गीले कपड़े से बदन को पोंछना शुरू करें
- शरीर का तापमान कम होते ही बच्चों के विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें
- झटका आने पर बच्चे को एक ओर करवट कर लिटाएं
- खाने पीने की कोई भी सामग्री नहीं दें
- झटके के दौरान मुंह पर पानी कदापि नहीं डालें
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बच्चे हों या बड़े बुखार आना एक सामान्य प्रक्रिया है। साधारण बुखार तो तीन से चार दिन के भीतर ही दफा हो जाता है। जिसके चलते बुखार को लेकर लोग गंभीर नजर नहीं आते हैं। लेकिन आज कल बच्चों में बुखार का तापमान सौ डिग्री से अधिक होते ही दिमाग पर चढ़ जाता है। दिमाग पर चढ़ते ही बच्चों के दिमाग में करंट जैसा एक झटका सा महसूस होता है। इस दौरान बच्चे की आंखें ऊपर की ओर चली जाती है। कई बच्चों के मुंह से झाग भी निकलने के साथ ही शरीर में अकड़न की स्थिति हो जाती है। कुछ देर के लिए बच्चा बेहोश होकर कोमा की स्थिति में पहुंच जाता है। कई बच्चों को दौरे के दौरान उल्टी हो जाती है। हालांकि इन झटकों की अवधि एक से दो मिनट की होती है। कई मामलों में यह दस से पंद्रह मिनट तक खिंच सकती है। लेकिन समय पर इलाज नहीं मिलने पर बच्चे की हालत गंभीर हो सकती है। चिकित्सकों के अनुसार 18 माह से कम उम्र के बच्चे को दौरे के दौरान बेहोशी अथवा मुंह से झाग आने की दशा में अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया जाता है। कई बच्चों को भर्ती किए बिना ही इलाज किया जाता है।
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मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. ओम शंकर चौरसिया ने बताया कि वर्तमान में बच्चों में दिमागी दौरों की संख्या में लगातार इजाफा रहा है। दस से पंद्रह फीसदी तक बच्चों में बुखार के दौरान दिमागी झटकों का असर हो रहा है। हालांकि इलाज के दौरान बच्चे स्वस्थ हो जाते हैं।
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यह करे उपचार
- बच्चों में बुखार आने पर तुरंत ही गीले कपड़े से बदन को पोंछना शुरू करें
- शरीर का तापमान कम होते ही बच्चों के विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें
- झटका आने पर बच्चे को एक ओर करवट कर लिटाएं
- खाने पीने की कोई भी सामग्री नहीं दें
- झटके के दौरान मुंह पर पानी कदापि नहीं डालें