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Jhansi News: चिल ब्लेन से सूज जा रहीं हाथ-पैर की उंगलियां, खुजली से हो जाते जख्म
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झांसी। ठंड के कहर के बीच लोग खांसी, जुकाम और बुखार के साथ-साथ चिल ब्लेन बीमारी का शिकार हो रहे हैं। ये बीमारी खासकर सर्दियों में उन महिलाओं को ज्यादा होती है, जो ठंड में काम करती हैं। चिल ब्लेन का शिकार व्यक्ति की हाथ-पैर की उंगलियां सूज जातीं हैं। जलन के साथ खुजली होने से जख्म हो जाते हैं। इन दिनों अस्पतालों में इस बीमारी के मरीज बढ़ गए हैं।
जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील होती है, उन्हें तेज ठंड के बाद जब अचानक से बहुत ज्यादा गर्माहट मिलती है या गर्मी से अचानक तेज ठंड में जाते हैं तो चिल ब्लेन की समस्या हो सकती है। ये समस्या सबसे ज्यादा दिसंबर के अंत और जनवरी की शुरूआत में देखने को मिलती है। क्योंकि इस सीजन में ही सबसे ज्यादा ठंड पड़ती है। मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि ठंड में हाथ-पैर की उंगलियों, पैर के पंजे में ठंड की वजह से रक्त धमनियां सिकुड़ने से सूजन आ जाती है और नसों में रक्त का संचार धीमा हो जाने से अल्सर हो जाता है। फिर खुजली और जलन शुरू हो जाती है। खुजलाते-खुजलाते घाव हो जाता है। इन दिनों रोजाना 10 से 12 मरीज ओपीडी में चिल ब्लेन के दिखाने के लिए आ रहे हैं। वहीं, त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतीक शिवहरे ने बताया कि चिल ब्लेन के मरीज तेज दर्द की वजह से सो नहीं पाते हैं। चलने-फिरने तक में परेशानी होती है। इसलिए बीमारी के लक्षण दिखते ही इलाज कराएं।
इन बातों का रखें ध्यान
- ठंड से बचाव करें
- ऊनी दस्ताने पहनें
- सुबह और रात में पानी के इस्तेमाल से बचें
- हाथ-पैर गीले होने पर पोंछ लें
- घरों में भी मोजे पहनें
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जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील होती है, उन्हें तेज ठंड के बाद जब अचानक से बहुत ज्यादा गर्माहट मिलती है या गर्मी से अचानक तेज ठंड में जाते हैं तो चिल ब्लेन की समस्या हो सकती है। ये समस्या सबसे ज्यादा दिसंबर के अंत और जनवरी की शुरूआत में देखने को मिलती है। क्योंकि इस सीजन में ही सबसे ज्यादा ठंड पड़ती है। मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि ठंड में हाथ-पैर की उंगलियों, पैर के पंजे में ठंड की वजह से रक्त धमनियां सिकुड़ने से सूजन आ जाती है और नसों में रक्त का संचार धीमा हो जाने से अल्सर हो जाता है। फिर खुजली और जलन शुरू हो जाती है। खुजलाते-खुजलाते घाव हो जाता है। इन दिनों रोजाना 10 से 12 मरीज ओपीडी में चिल ब्लेन के दिखाने के लिए आ रहे हैं। वहीं, त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतीक शिवहरे ने बताया कि चिल ब्लेन के मरीज तेज दर्द की वजह से सो नहीं पाते हैं। चलने-फिरने तक में परेशानी होती है। इसलिए बीमारी के लक्षण दिखते ही इलाज कराएं।
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इन बातों का रखें ध्यान
- ठंड से बचाव करें
- ऊनी दस्ताने पहनें
- सुबह और रात में पानी के इस्तेमाल से बचें
- हाथ-पैर गीले होने पर पोंछ लें
- घरों में भी मोजे पहनें