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पारीछा थर्मल प्लांट में रांची से आ रहा सस्ता कोयला
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झांसी। भले ही पारीछा थर्मल पावर प्लांट की उत्पादन इकाइयां बिजली की मांग कम होने के कारण बंद चल रही हो। मगर रांची से सस्ता कोयला मिलने से प्लांट में कोयले का भंडारण बढ़ता जा रहा है। अगर प्लांट को किसी स्थिति में कोयला न भी मिले तो भी एक महीने तक बराबर बिजली बनाने का इंतजाम हो गया है।
उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के प्रदेश में चार उत्पादन प्लांट हैं। इनमें पारीछा थर्मल पावर प्लांट में 920 मेगावाट, अनपरा में 2630 मेगावाट, ओबरा में पांच सौ मेगावाट और हरदुआ गंज में पांच सौ मेगावाट की इकाइयां लगीं हैं। पारीछा प्लांट में स्थित 250 मेेगावाट की दो व 210 मेगावाट की दो इकाइयों को लगातार चलाने के लिए प्रतिदिन दस हजार टन से ज्यादा कोयले की आवश्यकता पड़ती है। यह कोयला मध्यप्रदेश के सिंगरौली व झारखंड के रांची व धनबाद से आता है। एक मालगाड़ी में चार हजार टन कोयला आता है। सितंबर के आखिर में प्रदेश में कोयला संकट बन गया था। प्लांट में उस समय धनबाद से महंगा कोयला मंगाया जा रहा था। एक मालगाड़ी दो करोड़ रुपये की पड़ रही थी। वह भी मुश्किल से मिल पा रही थी।
मगर 15 अक्तूबर के बाद प्रदेश में बिजली की मांग होने पर स्टेट लोड डिस्पेच सेंटर लखनऊ (एसएलडी) के आदेश पर बंद कर दी गई थी। जो अभी तक इकाइयां बंद ही चल रही हैं। मगर कोयला लगातार आ रहा है। इन दिनों रांची से उच्च गुणवत्ता का सस्ता कोयला मंगाया जा रहा है। यहां से एक मालगाड़ी कोयला 1.60 करोड़ का पड़ रहा है। प्रमुख महाप्रबंधक एम के सचान ने बताया कि प्लांट में 2.75 लाख टन कोयले का भंडारण हो गया है। उत्पादन इकाइयां 15 दिसंबर के बाद चालू होने की उम्मीद है।
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उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के प्रदेश में चार उत्पादन प्लांट हैं। इनमें पारीछा थर्मल पावर प्लांट में 920 मेगावाट, अनपरा में 2630 मेगावाट, ओबरा में पांच सौ मेगावाट और हरदुआ गंज में पांच सौ मेगावाट की इकाइयां लगीं हैं। पारीछा प्लांट में स्थित 250 मेेगावाट की दो व 210 मेगावाट की दो इकाइयों को लगातार चलाने के लिए प्रतिदिन दस हजार टन से ज्यादा कोयले की आवश्यकता पड़ती है। यह कोयला मध्यप्रदेश के सिंगरौली व झारखंड के रांची व धनबाद से आता है। एक मालगाड़ी में चार हजार टन कोयला आता है। सितंबर के आखिर में प्रदेश में कोयला संकट बन गया था। प्लांट में उस समय धनबाद से महंगा कोयला मंगाया जा रहा था। एक मालगाड़ी दो करोड़ रुपये की पड़ रही थी। वह भी मुश्किल से मिल पा रही थी।
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मगर 15 अक्तूबर के बाद प्रदेश में बिजली की मांग होने पर स्टेट लोड डिस्पेच सेंटर लखनऊ (एसएलडी) के आदेश पर बंद कर दी गई थी। जो अभी तक इकाइयां बंद ही चल रही हैं। मगर कोयला लगातार आ रहा है। इन दिनों रांची से उच्च गुणवत्ता का सस्ता कोयला मंगाया जा रहा है। यहां से एक मालगाड़ी कोयला 1.60 करोड़ का पड़ रहा है। प्रमुख महाप्रबंधक एम के सचान ने बताया कि प्लांट में 2.75 लाख टन कोयले का भंडारण हो गया है। उत्पादन इकाइयां 15 दिसंबर के बाद चालू होने की उम्मीद है।
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