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जांच करने गए अफसरों के सामने निकले असलहे

Sat, 06 Feb 2021 02:04 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 06 Feb 2021 02:04 AM IST
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Cheaking goes to field arise gun officer
झांसी। मनरेगा में अनियमितता की जांच करने बामौर ब्लॉक के करगुवां खुर्द गांव पहुंचे अफसरोें के सामने ही दो पक्ष आपस में भिड़ गए। धक्कामुक्की के बाद असलहे भी निकल आए। मामला बिगड़ने पर अफसर जांच बीच में छोड़कर बैरंग वापस लौट गए। सहमे अफसर बिना पुलिस फोर्स के वहां जाने को राजी नहीं हो रहे।
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कुछ दिनों पहले करगुवां खुर्द गांव में मनरेगा में लाखों रुपये के घपले का खुलासा हुआ था। इसमें 9.26 लाख रुपये बिना काम कराए मिलीभगत से हड़प लिए गए। जांच में बीडीओ ने इस अनियमितता की पुष्टि करते हुए ग्राम प्रधान, तकनीकी सहायक, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी से रिकवरी आदेश जारी कर दिए। ग्राम प्रधान ने इसे चुनावी राजनीति करार देते हुए दोबारा जांच कराने की गुहार लगाई। सीडीओ ने जिला विकास अधिकारी एवं लघु सिंचाई अभियंता को नामित करते हुए दो जांच कमेटी गठित कर दीं।
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जांच के लिए दोनों अफसर करगुवां खुर्द गए थे। जैसे ही दोनों पक्षों को अफसरों के पहुंचने की सूचना मिली वे भी वहां आ धमके। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वाद-विवाद के दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्कामुक्की शुरू हो गई। अफसर जब तक कुछ समझ पाते वहां असलहे निकाल लिए गए। उधर, मामले को बढ़ता देख दोनों अफसर ने वहां से खिसकने में भलाई समझी और निकल भागे। लौटकर उन्होंने पूरे मामले की जानकारी सीडीओ को दी है। जांच के दौरान दोनों पक्षों के आमने-सामने आने और असलहे निकल आने से घबराए अफसर अब जांच के लिए पुलिस फोर्स की मौजूदगी में ही जाएंगे हालांकि राज्यपाल के कार्यक्रम के चलते नई तिथि तय नहीं हुई लेकिन, इसी सप्ताह जांच करने टीम फिर से इस गांव जाएगी।
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पुराने काम को नया बता कर हड़प ली पूरी रकम
करगुवां खुर्द में मनरेगा कार्यों की जांच में बीडीओ को तमाम अनियमिताएं मिली थीं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक पुराने काम को नया बता कर पूरा पैसा ग्राम प्रधान, तकनीकी सहायक एवं ग्राम विकास अधिकारी ने हड़प लिया। यहां पक्का नाला निर्माण (वकील तिवारी से भगवानदास तक), पुलिया निर्माण बेलिया संपर्क मार्ग पर (रतन के खेत के पास), आरसी पुलिया निर्माण (गुल्ली जयराम के खेत के पास) एवं एपेक्स निर्माण (बैजनाथ के मकान से गजराज के मकान तक) के काम में अनियमितताएं पाई गई हैं। ग्रामीणों का कहना है मौके पर कोई कार्य नहीं कराए गए।
सामने आ रहे बड़े-बड़े घपले, अफसर खामोश
मनरेगा में लगातार घपले सामने आ रहे लेकिन, आरोपियों के साथ ही मनरेगा सेल के जिम्मेदारों के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही। रोजगार से सीधी जुड़ी योजना होने केनाते शासन स्तर पर इसकी खास निगरानी होती है। स्थानीय स्तर पर सीडीओ को भी निगरानी करनी होती है। सिर्फ मनरेगा कार्य के लिए उपायुक्त स्तर का अधिकारी भी तैनात है लेकिन, इसके बावजूद बड़े-बड़े घपले लगातार सामने आ रहे। पिछले माह बामौर ब्लॉक में ही बकरी आश्रय स्थल के नाम पर करीब 18 लाख रुपये का घपला उजागर हुआ लेकिन, कार्रवाई के बजाए निगरानी में लगे आला अफसर इस पूरे मामले की लीपापोती में जुटे हैं। गबन साबित हो चुके कई मामलों में आज तक किसी भी जिम्मेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई जा सकी। इन सब वजहों से आला अफसरों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।

जांच के दौरान दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई। इस वजह से हम लोग वापस लौट आए। पुलिस फोर्स की मांग की गई है। अब पुलिस की मौजूदगी में जांच के लिए वहां जाएंगे।
उग्रसेन यादव, जांच अधिकारी (डीडीओ)
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